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ट्रॉनिका सिटी में थाने से दो किमी. दूरी पर ही छापी जा रही थी जाली करेंसी
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ट्रॉनिका सिटी में थाने से दो किमी. दूरी पर ही छापी जा रही थी जाली करेंसी
दिल्ली पुलिस प्रिंटिंग प्रेस में छापा मार दो लोगों को ले गई, पांच-पांच सौ के जाली नोट बरामद
लोनी। ट्रानिका सिटी थाने से महज दो किमी. की दूरी पर ही जाली नोट छापे जा रहे थे। दिखावे के लिए प्रिंटिंग प्रेस खोल रखी थी, अंदर पांच-पांच सौ के नकली नोट छपते थे। ये नकली नोट दिल्ली और एनसीआर में चलाए जाते थे। इसकी जानकारी होने पर दिल्ली पुलिस ने प्रेस पर छापा मारा और दो लोगों को अपने साथ ले गई। यहां से बड़ी संख्या में नकली नोट बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि छानबीन के बाद बड़ा खुलासा हो सकता है।
आसपास के लोगों ने बताया कि छह महीने पहले ही यह प्रेस खोली गई थी। इसमें 10 से 12 लोग काम करते थे। सभी सुबह को आते थे और शाम को बाहर निकलते थे। आसपास के लोगों से कोई वास्ता नहीं रखते थे। प्रेस के बाहर एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात था। उसे सख्त हिदायत थी कि प्रेस के कर्मचारियों के अलावा किसी और को अंदर न आने दे। उसे खुद भी अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को यहां छापा मारा। गार्ड से पूछताछ की तो उसने यही बताया कि वह छह महीने में एक बार भी अंदर नहीं गया है। छापे के दौरान आस पास के लोग भी आ गए थे। उन्होंने बताया कि पांच से छह लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद की गई है।
ऐसे हुआ खुलासा
एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति को पांच सौ रुपये के जाली नोटों सहित गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने लोनी के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के सेक्टर-पांच में एक प्रिंटिंग प्रेस से ये नोट लाने की बात कही। इसके बाद दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने इस प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा।
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दिल्ली के अजीम की है प्रेस
यह प्रिंटिंग प्रेस दिल्ली के भजनपुरा निवासी अजीम की है। पुलिस उसकी तलाश में है। उसने इसके नाम की जगह सिर्फ प्रिंटिंग प्रेस लिखवा रखा था। पुलिस ने उसके घर भी दबिश दी है। उसके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई गई है।
कैला भट्ठा में भी पकड़ा गया था गिरोह
इसी साल सात जनवरी को गाजियाबाद पुलिस ने कैला भट्ठा में जाली करेंसी की फैक्टरी पकड़ी थी। यहां से 17 लाख की जाली करेंसी बरामद की गई थी। 11 लाख बाजार में खपाए जा चुके थे। चमन कॉलोनी निवासी आजाद इसे चला रहा था। उसने यू-ट्यूब पर जाली करेंसी छापना सीखा था। नोट छपाई का काम कैलाभट्ठा निवासी युनूस के घर पर चल रहा था। यहां पर आजाद, सोनू गंजा और युनूस नोटों की छपाई व फिनिशिंग करते थे। अमन और आलम उर्फ आशीष नकली नोट रहबर (सप्लायर) को उपलब्ध कराते थे, जो बाजार में खपाता था। आजाद सप्लायरों को एक असली नोट के बदले में तीन जाली नोट देता था।
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दिल्ली पुलिस प्रिंटिंग प्रेस में छापा मार दो लोगों को ले गई, पांच-पांच सौ के जाली नोट बरामद
लोनी। ट्रानिका सिटी थाने से महज दो किमी. की दूरी पर ही जाली नोट छापे जा रहे थे। दिखावे के लिए प्रिंटिंग प्रेस खोल रखी थी, अंदर पांच-पांच सौ के नकली नोट छपते थे। ये नकली नोट दिल्ली और एनसीआर में चलाए जाते थे। इसकी जानकारी होने पर दिल्ली पुलिस ने प्रेस पर छापा मारा और दो लोगों को अपने साथ ले गई। यहां से बड़ी संख्या में नकली नोट बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि छानबीन के बाद बड़ा खुलासा हो सकता है।
आसपास के लोगों ने बताया कि छह महीने पहले ही यह प्रेस खोली गई थी। इसमें 10 से 12 लोग काम करते थे। सभी सुबह को आते थे और शाम को बाहर निकलते थे। आसपास के लोगों से कोई वास्ता नहीं रखते थे। प्रेस के बाहर एक सिक्योरिटी गार्ड तैनात था। उसे सख्त हिदायत थी कि प्रेस के कर्मचारियों के अलावा किसी और को अंदर न आने दे। उसे खुद भी अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को यहां छापा मारा। गार्ड से पूछताछ की तो उसने यही बताया कि वह छह महीने में एक बार भी अंदर नहीं गया है। छापे के दौरान आस पास के लोग भी आ गए थे। उन्होंने बताया कि पांच से छह लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद की गई है।
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ऐसे हुआ खुलासा
एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति को पांच सौ रुपये के जाली नोटों सहित गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में उसने लोनी के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के सेक्टर-पांच में एक प्रिंटिंग प्रेस से ये नोट लाने की बात कही। इसके बाद दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने इस प्रिंटिंग प्रेस पर छापा मारा।
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दिल्ली के अजीम की है प्रेस
यह प्रिंटिंग प्रेस दिल्ली के भजनपुरा निवासी अजीम की है। पुलिस उसकी तलाश में है। उसने इसके नाम की जगह सिर्फ प्रिंटिंग प्रेस लिखवा रखा था। पुलिस ने उसके घर भी दबिश दी है। उसके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई गई है।
कैला भट्ठा में भी पकड़ा गया था गिरोह
इसी साल सात जनवरी को गाजियाबाद पुलिस ने कैला भट्ठा में जाली करेंसी की फैक्टरी पकड़ी थी। यहां से 17 लाख की जाली करेंसी बरामद की गई थी। 11 लाख बाजार में खपाए जा चुके थे। चमन कॉलोनी निवासी आजाद इसे चला रहा था। उसने यू-ट्यूब पर जाली करेंसी छापना सीखा था। नोट छपाई का काम कैलाभट्ठा निवासी युनूस के घर पर चल रहा था। यहां पर आजाद, सोनू गंजा और युनूस नोटों की छपाई व फिनिशिंग करते थे। अमन और आलम उर्फ आशीष नकली नोट रहबर (सप्लायर) को उपलब्ध कराते थे, जो बाजार में खपाता था। आजाद सप्लायरों को एक असली नोट के बदले में तीन जाली नोट देता था।