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310 करोड़ जीडीए ने दिए नहीं, इंदिरापुरम की जिम्मेदारी को अब निगम ने मांगे 500 करोड़

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:21 AM IST
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310 करोड़ जीडीए ने दिए नहीं, इंदिरापुरम की जिम्मेदारी को अब निगम ने मांगे 500 करोड़
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम में रहने वाले चार लाख लोग नगर निगम और जीडीए के बीच फंस गए हैं। कॉलोनी के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने के लिए नगर निगम ने पूर्व में 310 करोड़ का एस्टिमेट जीडीए को भेजा था। जीडीए ने इसे देने से ही हाथ खड़े कर दिए थे, अब नगर निगम ने 500 करोड़ का नया प्रस्ताव जीडीए को भेज दिया है। इससे इंदिरापुरम के हस्तांतरण में एक नई बाधा खड़ी हो गई है। 2011 से उठ रही कॉलोनी के हस्तांतरण की मांग 10 साल बाद भी पूरी होती नहीं दिख रही है।
जीडीए की ओर से इंदिरापुरम के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपे जाने के लिए प्रस्ताव दिए जाने के बाद इसी साल दोनों विभाग के इंजीनियरों ने संयुक्त सर्वे किया था। जीडीए ने इंदिरापुरम के संसाधनों को पूरा करने पर 184 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया था, लेकिन नगर निगम ने ड्रेनेज, सड़क सुधार, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट, पार्क आदि के रखरखाव के लिए 310 करोड़ का एस्टिमेट बनाकर जीडीए को डिमांड नोटिस भेजा था। जीडीए ने इस रकम को देने से ही इनकार कर दिया था। अब नगर निगम ने जलकल विभाग की ओर से कराए जा रहे सर्वे के पूरा होने पर इसमें करीब 190 करोड़ का इजाफा और कर दिया है। नगर निगम के इस नए एस्टिमेट पर इंदिरापुरम के छह पार्षदों ने नाराजगी जताई है। उन्हें अब इंदिरापुरम के हस्तांतरण की उम्मीद टूटती नजर आ रही है।
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क्यों मांगी जा रही रकम
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इंदिरापुरम को एकल प्लॉट की कॉलोनी के रूप में बसाया गया था। उसी के आधार पर यहां सड़कों, सीवर, ड्रेनेज का नेटवर्क तैयार किया गया। बाद में जीडीए ने यहां ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट बेच दिए। अब यहां अनुमानित आबादी से चार गुना आबादी हो गई है। इस कारण ड्रेनेज, सीवर नेटवर्क के साथ-साथ सड़कें भी छोटी पड़ने लगी हैं। भविष्य में सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करने के अलावा सीवर और ड्रेनेज सिस्टम को भी दोबारा विकसित करना पड़ेगा।
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10 साल में नहीं निकल पाया हल
1987 में जीडीए ने इंदिरापुरम कॉलोनी को बसाना शुरू किया था। सबसे पहले न्यायखंड को बसाया गया था। 1222 एकड़ में फैली जीडीए की इस कॉलोनी में 1994 में लोगों ने यहां रहना शुरू कर दिया था। 2009 में हुई बोर्ड बैठक में जीडीए अधिकारियों ने इस योजना को कंप्लीट करने का प्रस्ताव पास कर दिया था। 2011 से जीडीए के अधिकारियों ने इंदिरापुरम को हैंडओवर करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को पत्र भेजना शुरू कर दिया था। इसके बाद मई 2012, नवंबर 2013, जनवरी 2015, सितंबर 2018, अक्तूबर 2018, दिसंबर 2018, फरवरी 2019, मई 2019, जून 2019, जनवरी 2020, दिसंबर 2020 और अप्रैल 2021 में हस्तांतरण के लिए पत्र के साथ प्रस्ताव निगम को भेजा गया।
किस मद में कितना खर्च
ड्रेनेज का निर्माण : 134 करोड़ रुपये
ड्रेनेज सिस्टम की सफाई : 19.68 करोड़ रुपये
पुराने ड्रेनेज को तोड़कर नया बनाना : 20.31 करोड़ रुपये
सड़कों का पुनर्निर्माण : 136.86 करोड़ रुपये
सड़क, ड्रेनेज, लाइट, पार्क : 370 करोड़ रुपये
सीवर नेटवर्क और पानी आपूर्ति : 130 करोड़ रुपये
मांगी गई कुल रकम : 500 करोड़ रुपये
आंकड़ों में इंदिरापुरम
आबादी : करीब चार लाख
सोसायटियां : 233
जीडीए का सालाना टैक्स : 32 करोड़
निगम का सालाना टैक्स : 14 करोड़
अब तक निगम ने वसूला टैक्स : करीब 78 करोड़
निगम के अधिकारी जानबूझकर अटका रहे रोड़ा
नगर निगम के अधिकारी जानबूझकर कॉलोनी के हस्तांतरण में बाधा डाल रहे हैं। सड़कों और इंटरलॉकिंग टाइल्स की मोटाई कम बताकर उन्हें तोड़कर दूसरी सड़क और टाइल्स लगाने का भी खर्च प्रस्ताव में जोड़ा गया है। अभी भी सड़कों पर वाहन चल रहे हैं, उनकी मोटाई बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

- संजय सिंह, पार्षद इंदिरापुरम
कोर्ट के निर्णय का इंतजार
निर्माण और जलकल विभाग ने संयुक्त सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट दी है। इसके मुताबिक ही एस्टिमेट तैयार किया गया है। इंदिरापुरम में मौजूदा सीवर, ड्रेनेज, सड़कों और अन्य संसाधनों को बढ़ाने की आवश्यकता है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जो निर्णय आएगा, उसके अनुरूप काम किया जाएगा।
- महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त
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