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समूह बीमा की रकम का झांसा देकर 10 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों से ठगी
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गाजयाबाद : इंदिरापुरम पुलिस की गिरफ्त में ठगी के आरोपी। कॉल सेंटर पकड़े जाने का मामला।
- फोटो : SHAHIBABAD
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समूह बीमा की रकम का झांसा देकर 10 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों से ठगी
साहिबाबाद। साइबर अपराधियों ने फर्जी कॉल सेंटर खोलकर दस हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों व अधिकारियों से 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा रकम अपने खातों में जमा करा ली। 2012 से ठगी कर रहे गिरोह के दो सरगना सहित तीन अपराधियों को गिरफ्तार कर शनिवार को पुलिस ने इसका खुलासा किया। ये शातिर खुद को ईपीएफओ का कर्मचारी बताकर समूह बीमा की रकम दिलाने का झांसा देते थे और फिर प्रोसेसिंग फीस जमा कराने के नाम पर रकम ठग लेते थे। इनके निशाने पर यूपी, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र के लोग थे। गिरोह के किराए पर लिए गए 50 से ज्यादा खातों की जानकारी पुलिस को मिली है जिनमें जमा कराकर रकम निकाल ली जाती थी।
एसपी सेकेंड ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार आरोपियों मे नोएडा के सेक्टर-49 का निवासी घनश्याम, सेक्टर 20 का धर्मेंद्र और रबुपुरा का राहुल ( हाल निवासी खोड़ा ) हैं। 12वीं पास घनश्याम और बीकॉम कर चुका राहुल सरगना हैं। घनश्याम हैदराबाद से 2015 में दस लाख रुपये की ठगी में जेल जा चुका है। गिरोह के सदस्य सुमित और अंकित फरार हैं।
इस गिरोह के बारे में पड़ताल तब शुरु हुई जब वैशाली स्थित रामप्रस्था ग्रीन सोसायटी निवासी नीरज शर्मा के साथ ठगी की जानकारी मिली। वह ओएनजीसी से रिटायर्ड हैं। उनसे 11 लाख रुपये की ठगी की गई। इंदिरापुरम थाना में केस दर्ज कर उनसे मिले मोबाइल नंबरों की डिटेल और लोकेशन निकलवाई तो पता चला कि यह गिरोह नोएडा के गौड़ ग्रीन सिटी में फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा है। गिरोह से पूछताछ में पता चला कि ठगी गई रकम 100 करोड़ से ज्यादा की है। इसकी डिटेल निकलवाई जा रही है। मुंबई के रिटायर्ड अधिकारी से 1.5 करोड़ की ठगी की गई।
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झुग्गी वालों से किराए पर ले रखे थे बैंक खाते
शातिर ठगों ने पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा था। साइबर सेल प्रभारी एवं सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार ने बताया, ठगी के शिकार लोगों से रकम उन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी जो झुग्गी वाले लोगों से किराए पर लिए जाते थे। जैसे ही रकम आती, वैसे ही निकाल ली जाती। एक खाते का प्रति माह दस हजार रुपये किराया देते थे। झुग्गी में रहने वाले लोगों से दस्तावेज लेकर ये खाते भी ठगों ने ही खुलवाए थे । ऐसा इसलिए किया ताकि पकड़े जाएं तो पुलिस को साक्ष्य न मिलें।
50 हजार से 1.5 करोड़ तक ठगे
पुलिस ने गिरोह से पूछताछ के हवाले से बताया कि लोगों से 50 हजार रुपये से 1.5 करोड़ तक की ठगी की गई है। ये शातिर फोन पर झांसा देते थे कि वे समूह बीमा की रकम दिला देंगे। पीएफ के साथ ही समूह बीमार होता है। इसके लिए प्रोसेसिंग फीस जमा कराने के लिए कहते थे। एक रिटायर्ड कर्मचारी को एक बार ही नहीं, कई कई बार ठगते थे। वैशाली के नीरज से 23 बार में 11 लाख की ठगी की गई। एक बार पैसा आते ही कहते थे कि समूह बीमा की रकम ज्यादा है, प्रोसेसिंग फीस और चाहिए। फिर कहते थे कि बीमा परिवार के हर सदस्य का है, सबकी फीस अलग अलग लगेगी।
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साहिबाबाद। साइबर अपराधियों ने फर्जी कॉल सेंटर खोलकर दस हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों व अधिकारियों से 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा रकम अपने खातों में जमा करा ली। 2012 से ठगी कर रहे गिरोह के दो सरगना सहित तीन अपराधियों को गिरफ्तार कर शनिवार को पुलिस ने इसका खुलासा किया। ये शातिर खुद को ईपीएफओ का कर्मचारी बताकर समूह बीमा की रकम दिलाने का झांसा देते थे और फिर प्रोसेसिंग फीस जमा कराने के नाम पर रकम ठग लेते थे। इनके निशाने पर यूपी, दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र के लोग थे। गिरोह के किराए पर लिए गए 50 से ज्यादा खातों की जानकारी पुलिस को मिली है जिनमें जमा कराकर रकम निकाल ली जाती थी।
एसपी सेकेंड ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार आरोपियों मे नोएडा के सेक्टर-49 का निवासी घनश्याम, सेक्टर 20 का धर्मेंद्र और रबुपुरा का राहुल ( हाल निवासी खोड़ा ) हैं। 12वीं पास घनश्याम और बीकॉम कर चुका राहुल सरगना हैं। घनश्याम हैदराबाद से 2015 में दस लाख रुपये की ठगी में जेल जा चुका है। गिरोह के सदस्य सुमित और अंकित फरार हैं।
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इस गिरोह के बारे में पड़ताल तब शुरु हुई जब वैशाली स्थित रामप्रस्था ग्रीन सोसायटी निवासी नीरज शर्मा के साथ ठगी की जानकारी मिली। वह ओएनजीसी से रिटायर्ड हैं। उनसे 11 लाख रुपये की ठगी की गई। इंदिरापुरम थाना में केस दर्ज कर उनसे मिले मोबाइल नंबरों की डिटेल और लोकेशन निकलवाई तो पता चला कि यह गिरोह नोएडा के गौड़ ग्रीन सिटी में फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा है। गिरोह से पूछताछ में पता चला कि ठगी गई रकम 100 करोड़ से ज्यादा की है। इसकी डिटेल निकलवाई जा रही है। मुंबई के रिटायर्ड अधिकारी से 1.5 करोड़ की ठगी की गई।
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झुग्गी वालों से किराए पर ले रखे थे बैंक खाते
शातिर ठगों ने पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा था। साइबर सेल प्रभारी एवं सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार ने बताया, ठगी के शिकार लोगों से रकम उन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी जो झुग्गी वाले लोगों से किराए पर लिए जाते थे। जैसे ही रकम आती, वैसे ही निकाल ली जाती। एक खाते का प्रति माह दस हजार रुपये किराया देते थे। झुग्गी में रहने वाले लोगों से दस्तावेज लेकर ये खाते भी ठगों ने ही खुलवाए थे । ऐसा इसलिए किया ताकि पकड़े जाएं तो पुलिस को साक्ष्य न मिलें।
50 हजार से 1.5 करोड़ तक ठगे
पुलिस ने गिरोह से पूछताछ के हवाले से बताया कि लोगों से 50 हजार रुपये से 1.5 करोड़ तक की ठगी की गई है। ये शातिर फोन पर झांसा देते थे कि वे समूह बीमा की रकम दिला देंगे। पीएफ के साथ ही समूह बीमार होता है। इसके लिए प्रोसेसिंग फीस जमा कराने के लिए कहते थे। एक रिटायर्ड कर्मचारी को एक बार ही नहीं, कई कई बार ठगते थे। वैशाली के नीरज से 23 बार में 11 लाख की ठगी की गई। एक बार पैसा आते ही कहते थे कि समूह बीमा की रकम ज्यादा है, प्रोसेसिंग फीस और चाहिए। फिर कहते थे कि बीमा परिवार के हर सदस्य का है, सबकी फीस अलग अलग लगेगी।