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ऑनलाइन क्लास बंद होने से 60 हजार छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप
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ऑनलाइन क्लास बंद होने से 60 हजार छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप
गाजियाबाद। स्कूल खुल जाने के बाद जिले के 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों ने ऑफलाइन पढ़ाई के चलते कक्षा नौ से 12 तक की ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं। दूसरी ओर कोरोना के डर से 66.66 फीसदी से अधिक अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। ऐसे में इन बच्चों की ऑफलाइन व ऑनलाइन पढ़ाई बंद है। वहीं, निजी स्कूलों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों का विकल्प रखा है।
बंद स्कूलों को सरकार ने 16 अगस्त से खोलने के आदेश दिए थे। कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल भेजना था। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 33.44 फीसदी छात्र ही स्कूल पहुंच रहे हैं। जबकि 70 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई थी। निजी स्कूलों में 50 फीसदी अभिभावकों ने सहमति पत्र भेजे हैं। उसमें से केवल 22.43 फीसदी ही छात्र स्कूल पहुंच रहे हैं। कुछ स्कूल तो ऐसे हैं, जहां पांच फीसदी भी उपस्थिति नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन भी असमंजस में हैं कि क्या करें? यही कारण है कि सीबीएसई के 175 स्कूलों में से केवल 70 स्कूल ही खुले पाए हैं। कुछ परीक्षाओं के कारण बंद हैं तो कुछ व्यवस्था बनाने के चलते बंद हैं। कुछ स्कूलों के पास नाममात्र के ही सहमति पत्र आए हैं।
जिले में 226 माध्यमिक स्कूलों में अधिकतर स्कूल खुले हैं, लेकिन इन्होंने कक्षा नौ से 12 तक की ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं। केवल ऑफलाइन छात्र-छात्राओं को दो पालियों में पढ़ा जा रहा है। जिन बच्चों को अभिभावक कोरोना के डर से स्कूल नहीं भेज रहे हैं, उनकी पढ़ाई ठप हो गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ऐसे करीब 60 हजार छात्र-छात्राएं हैं। निजी स्कूलों में 78.57 फीसदी छात्र-छात्राएं घर से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक पीके द्विवेदी का कहना है कि सभी स्कूलों ने दो पालियों में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की है। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं देना संभव नहीं है। पढ़ने के लिए बच्चों को स्कूल जाना ही पड़ेगा। धीरे-धीरे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
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गाजियाबाद। स्कूल खुल जाने के बाद जिले के 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ठप हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों ने ऑफलाइन पढ़ाई के चलते कक्षा नौ से 12 तक की ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं। दूसरी ओर कोरोना के डर से 66.66 फीसदी से अधिक अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। ऐसे में इन बच्चों की ऑफलाइन व ऑनलाइन पढ़ाई बंद है। वहीं, निजी स्कूलों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों का विकल्प रखा है।
बंद स्कूलों को सरकार ने 16 अगस्त से खोलने के आदेश दिए थे। कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल भेजना था। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 33.44 फीसदी छात्र ही स्कूल पहुंच रहे हैं। जबकि 70 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई थी। निजी स्कूलों में 50 फीसदी अभिभावकों ने सहमति पत्र भेजे हैं। उसमें से केवल 22.43 फीसदी ही छात्र स्कूल पहुंच रहे हैं। कुछ स्कूल तो ऐसे हैं, जहां पांच फीसदी भी उपस्थिति नहीं हैं। स्कूल प्रबंधन भी असमंजस में हैं कि क्या करें? यही कारण है कि सीबीएसई के 175 स्कूलों में से केवल 70 स्कूल ही खुले पाए हैं। कुछ परीक्षाओं के कारण बंद हैं तो कुछ व्यवस्था बनाने के चलते बंद हैं। कुछ स्कूलों के पास नाममात्र के ही सहमति पत्र आए हैं।
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जिले में 226 माध्यमिक स्कूलों में अधिकतर स्कूल खुले हैं, लेकिन इन्होंने कक्षा नौ से 12 तक की ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं। केवल ऑफलाइन छात्र-छात्राओं को दो पालियों में पढ़ा जा रहा है। जिन बच्चों को अभिभावक कोरोना के डर से स्कूल नहीं भेज रहे हैं, उनकी पढ़ाई ठप हो गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ऐसे करीब 60 हजार छात्र-छात्राएं हैं। निजी स्कूलों में 78.57 फीसदी छात्र-छात्राएं घर से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक पीके द्विवेदी का कहना है कि सभी स्कूलों ने दो पालियों में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था की है। ऐसे में बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं देना संभव नहीं है। पढ़ने के लिए बच्चों को स्कूल जाना ही पड़ेगा। धीरे-धीरे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है।