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नगर निगम की बोर्ड बैठक में हंगामा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 01:12 AM IST
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नगर निगम की बोर्ड बैठक में हुआ हंगामा
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गाजियाबाद। विवादित फर्म को 15 साल के लिए विज्ञापन ठेका दिए जाने का मामला सोमवार को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी गूंजा। भाजपा पार्षदों ने इस ठेके पर विरोध जताया तो उनके समर्थन में विपक्षी दलों के पार्षद भी उतर आए और सदन में जमकर हंगामा हुआ। उन्होंने ठेके की अवधि कम करने और अनुबंध की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की। पार्षदों के हंगामे से चौतरफा घिरे निगम अधिकारी ठेके की अवधि कम करने पर राजी नहीं हुए। बैठक में 85 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, इनमें से 79 प्रस्ताव पास कर दिए गए।

13 जुलाई को स्थगित हुई निगम की बोर्ड बैठक सोमवार को दोबारा बुलाई गई थी। हिंदी भवन सभागार में बोर्ड बैठक शुरू होते ही सबसे पहले विज्ञापन ठेके का मुद्दे को पार्षदों ने उठाया और इसका विरोध किया। भाजपा पार्षद राजीव शर्मा ने कहा कि शहर में विज्ञापन का ठेका लेने वाली फर्म यूपी और उत्तरांखड के कई शहरों में विज्ञापन ठेके पहले ले चुकी है और वहां विवादित रही है। नगर निगमों पर इस फर्म ने कोर्ट केस दायर किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम-1959 के मुताबिक विज्ञापन का ठेका 15 साल के लिए नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस ठेके को देकर नगर निगम के अधिकारी आमदनी बढ़ाने का दावा कर रहे हैं, अगर उसी फर्म ने कोर्ट केस कर दिया तो निगम की आमदनी ठप हो जाएगी। भाजपा पार्षद दल के उपनेता राजेंद्र त्यागी ने भी लंबी अवधि के लिए पूर्व में दिए गए इंदिरा प्रियदर्शनी पार्क के कांट्रेक्ट का उदाहरण देकर विज्ञापन ठेका पांच साल के लिए दिए जाने और इसके बाद समीक्षा कर कार्य संतोषजनक पाए जाने पर दोबारा अवधि बढ़ाने की सिफारिश की। विपक्षी दलों के पार्षदों ने कहा कि निगम अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम का हित सर्वोपरि है और किसी भी सूरत में यह ठेका 15 साल के लिए नहीं दिया जाना चाहिए। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने नगर निगम सदन में पार्षदों के आरोपों और शंकाओं का जवाब तो दिया, लेकिन ठेके की अवधि घटाकर 5 साल किए जाने पर सहमति नहीं दी। बैठक में करीब एक घंटे तक इसी मुद्दे पर विरोध और बहस चलती रही। महापौर आशा शर्मा ने इस ठेके की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन करने और अनुबंध की कॉपी सभी पार्षदों को दिए जाने की बात कही। इसके बाद मामला शांत हुआ।
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