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गोलमाल : छह करोड़ का डीजल पी गए नगर निगम अफसर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 02:01 AM IST
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नगर निगम
गोलमाल : छह करोड़ का डीजल पी गए नगर निगम अफसर
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गाजियाबाद। नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग एक साल में छह करोड़ रुपये का डीजल पी गया। नाला सफाई केे लिए इस्तेमाल होने वाली मिनी पोकलेन मशीनों के 37 लीटर क्षमता वाले टैंक में कागजों में 50 लीटर तेल भर दिया गया। इस तरह से हर महीने 500 से 600 लीटर डीजल की चोरी की गई। एक साल में यह रकम छह करोड़ के करीब बैठती है।
शहर में छोटे नालों की सफाई के लिए नगर निगम ने मिनी पोकलेन मशीनें खरीदी हैं। मशीन बनाने वाली कंपनी के ब्रोशर में बताया गया है कि इन मशीनों के ईंधन टैंक की अधिकतम क्षमता 37 लीटर है, लेकिन इनमें 35 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं डाला जाना चाहिए। कविनगर, सिटी जोन में इन वाहनों को एक-एक शिफ्ट में 50-50 लीटर डीजल आवंटित दर्शाया गया है।नगर निगम पार्षद व कार्यकारिणी समिति सदस्य अजय शर्मा का आरोप है क िईंधन टैंक की क्षमता से ज्यादा डीजल आवंटित दर्शाकर खेल किया जा रहा है। वह जल्द ही नगरायुक्त से मिलकर इसकी शिकायत करेंगे और उन्हें दस्तावेज भी सौंपेंगे।
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टिपर, टैंपो को को भी तेल देने में मनमानी
कूड़ा उठाने में लगे टिपर, टैंपो, ट्रैक्टर ट्रॉली और हाईवा वाहनों (बड़े ट्रकों) को डीजल आवंटन में भी मनमानी की गई है। इन वाहनों को रोजाना 100 से लेकर 140 लीटर तक डीजल दिया गया। कई वाहनों को दूसरी शिफ्ट में भी काम करना दर्शाया गया है, जबकि पार्षदों का कहना है कि दूसरी शिफ्ट में कूडे़ का उठान हुआ ही नहीं। नगर निगम ने रिकार्ड में दर्शाया है कि पानी के छिड़काव के लिए दूसरी शिफ्ट में भी वाहनों को 50-50 लीटर डीजल दिया गया है, जबकि दूसरी शिफ्ट में पानी का छिड़काव किया ही नहीं जा रहा है। सुबह के वक्त चुनिंदा मुख्य मार्गों पर पानी का छिड़काव किया जाता है।
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रोड स्वीपिंग मशीनें भी सवालों के घेरे में
पार्षद और शहर के लोग भी कह रहे हैं कि इन रोड स्वीपिंग मशीनों को चलते हुए देखे उन्हें करीब-करीब सालभर बीत गया। कोरोना काल में ट्रैफिक संचालन बंद हो जाने की वजह से सड़कें खुद ही साफ रहीं तो इन पर सफाई की जरूरत ही कहां पड़ी। कोरोना काल में साफ-सफाई के नाम पर डीजल चोरी जमकर की गई।
वायरल ऑडियो से भी सामने आया था तेल का खेल
नगर निगम में तेल का खेल किस तरह से चल रहा है, इसको उजागर करने वाला एक ऑडियो बीते दिनों की वायरल हुआ था। इस ऑडियो में नगर निगम का एक कर्मचारी एक पेट्रोल पंप कर्मचारी से बात कर रहा था। पेट्रोल पंप कर्मचारी बताता है कि वह सैनिटरी इंस्पेक्टर को ढाई लाख रुपये दे चुका है, लेकिन वह डीजल भुगतान की फाइल नहीं पास करा रहे हैं। पेट्रोल पंप पर ही निगम के वाहनों से सैनिटरी इंस्पेक्टर के हिस्से के डीजल की कटौती कर ली जाती है। निगम कर्मचारी का ऑडियो में कहना था कि इसका हिसाब महीने में करीब आठ लाख रुपये बनता है, जबकि पेट्रोल पंप कर्मचारी कह रहा था कि हिसाब बाद में जोड़ लेंगे और जो उनका पैसा बनेगा वह दे देंगे, लेकिन फाइल पास करा दें। इस मामले में भी नगर आयुक्त ने जांच बैठा दी है।
कोट
नगर निगम के वाहनों को डीजल आवंटन में बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिन वाहनों का डीजल टैंक 35 लीटर का है, उनमें कैसे 50 लीटर डीजल भरा जा सकता है। टैंपो, टीपर, हाईवा, ट्रैक्टरों को डीजल आवंटन में खेल किया जा रहा है। आगामी बोर्ड बैठक में यह मामला दस्तावेजों के साथ उठाया जाएगा। नगर निगम को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

- अजय शर्मा, कांग्रेस पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य
अधिकारी बोले
डीजल आवंटन में अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पूर्व में जीपीएस रीडिंग के माध्यम से अनियमितता पकड़ी गई थी और वाहनों का डीजल आवंटन कोटा घटाया गया था। मिनी पोकलेन वाहनों को टैंक क्षमता से ज्यादा डीजल आवंटित करने के मामला अभी जानकारी में नहीं है। इस स्तर पर भी जांच कराई जाएगी। फिलहाल मिनी पोकलेन मशीन का डीजल कोटा भी घटाकर 35 लीटर कर दिया गया है।
- डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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