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गन्ने के गढ़ में जमाई केले की धमक
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गन्ने के गढ़ में जमाई केले की धमक
गाजियाबाद। विक्रम यादव जो पहले गन्ने और गेहूं की खेती करते थे अब केले की खेती भी करने लगे हैं। पिछले दो तीन सालों से केले में हुए फायदे को देखते हुए उन्होंने अब लीज पर और खेत लेकर केले की खेती करने की योजना बनाई है। विक्रम यादव ने बताया कि पिछले पांच साल में से दो साल ट्रायल के तौर पर केले की खेती की, जिसमें घाटा हुआ जिसका कारण था हमें मिट्टी, पानी और खाद आदि की जानकारी नहीं थी। उसके बाद जब पूरी जानकारी के बाद केले की खेती शुरू की तो पिछले दो साल में हमें काफी फायदा हुआ है। अब मैंने अपने साथ 10 किसानों को जोड़ा है। इसके अलावा जिनके पास अपनी दो या तीन बीघा भी जमीन है उनको केले की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं।
विक्रम यादव भोजपुर ब्लॉक ने बताया कि पहले अपने स्तर पर केले की खेती शुरू की थी पांच साल पहले। फिर पिछले साल से उद्यान विभाग से सहायता मिलने लगी। मुख्य मार्ग पर केले के खेत होने के कारण लोग देखकर खुद भी पूछने और जानकारी लेने लगे। पिछले दो साल में हमें लागत का दोगुना फायदा होने लगा है। पहले मैंने टेस्टिंग की। पिछले साल मैंने 40 बीघे में केले की खेती का फायदा देखकर इस बार 200 बीघे में फसल लगाई है और आगे के लिए और जमीन लीज पर लेकर केले की खेती की योजना है। उन्होंने बताया कि पहले वह रियल स्टेट का काम करते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा है कि आगे का भविष्य खेती में काफी उज्ज्वल है तो पूरा फोकस खेती पर रखा है। मैं अपने दोनों बेटों को भी कृषि की ही पढ़ाई कराऊंगा, जिससे वह एक विशेषज्ञ बनकर खेती करें। इस ग्रुप में कुछ लोगों का राइपिंग चैंब(पकाने के लिए) भी बनाया है। इसको बाजार भी काफी अच्छा मिल रहा है। इसके अलावा नरेश चंद्र शर्मा भी केले की खेती कर रहे हैं।
पश्चिमी यूपी गन्ने की खेती से जाना जाता है लेकिन पिछले दो साल में यहां के किसानों में केले की खेती की तरफ रुझान बढ़ा है। उद्यान विभाग के पास भी केले की खेती के लिए काफी प्रस्ताव आए हैं, जिसकी वजह से उन्होंने शासन में लक्ष्य बढ़ाने का प्रस्ताव भी भेजा है। पूरे पश्चिमी यूपी में किसानों में केले की खेती के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। जिले में लगभग 20 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है लेकिन सब्सिडी का लाभ अभी इतने किसानों को नहीं मिल रहा है क्योंकि शासन से अभी 10 हेक्टेयर के लक्ष्य के हिसाब से बजट मिला है। पिछले वर्ष शासन से पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था जो इस बार बढ़कर 10 हेक्टेयर हो गया है। इसके अलावा अभी भी आठ से 10 किसानों ने केले की खेती के लिए आवेदन किया है। मेरठ मंडल के जिलों में केले की खेती सर्वाधिक हापुड़ में 150 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है। वहीं मेरठ में 43 हेक्टेयर, बुलंदशहर में 35 हेक्टेयर, बागपत में 30 हेक्टेयर और नोएडा में 20 हेक्टेयर में किसानों ने केले की खेती की है।
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महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात आदि से एनसीआर में केले आते हैं। दिल्ली एनसीआर में रोजाना कम से कम 40-50 गाड़ियां बाहर से आती हैं। अगर यहां के किसान खेती करने लगे तो यहीं पर उन्हें काफी बड़ा बाजार मिल जाएगा।
उद्यान निरीक्षक रचना सिंह ने बताया कि केले की खेती पर प्रति हेक्टेयर 30738 रुपये मिलते हैं। यह सब्सिडी दो साल की होती है। पहले साल में बीज और पौधों के लिए दूसरे साल में सिर्फ खाद पर सब्सिडी मिलती है। सबसे अधिक केले की खेती मोहम्मदपुर सुजानपुर में हो रही है। इनकी जियो टैगिंग भी हो रही है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार दोगुना लक्ष्य
जिले में पिछले साल पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था जो इस बार बढ़ाकर दोगुना यानी 10 हेक्टेयर कर दिया गया है। जिले में आठ किसानों ने केले की खेती के लिए आवेदन किया है लेकिन चार आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं। किसानों में केले की खेती की तरफ रुझान देखते हुए लक्ष्य बढ़ाए जाने की मांग की गई है। - निधि कुमारी, जिला उद्यान अधिकारी
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गाजियाबाद। विक्रम यादव जो पहले गन्ने और गेहूं की खेती करते थे अब केले की खेती भी करने लगे हैं। पिछले दो तीन सालों से केले में हुए फायदे को देखते हुए उन्होंने अब लीज पर और खेत लेकर केले की खेती करने की योजना बनाई है। विक्रम यादव ने बताया कि पिछले पांच साल में से दो साल ट्रायल के तौर पर केले की खेती की, जिसमें घाटा हुआ जिसका कारण था हमें मिट्टी, पानी और खाद आदि की जानकारी नहीं थी। उसके बाद जब पूरी जानकारी के बाद केले की खेती शुरू की तो पिछले दो साल में हमें काफी फायदा हुआ है। अब मैंने अपने साथ 10 किसानों को जोड़ा है। इसके अलावा जिनके पास अपनी दो या तीन बीघा भी जमीन है उनको केले की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा हूं।
विक्रम यादव भोजपुर ब्लॉक ने बताया कि पहले अपने स्तर पर केले की खेती शुरू की थी पांच साल पहले। फिर पिछले साल से उद्यान विभाग से सहायता मिलने लगी। मुख्य मार्ग पर केले के खेत होने के कारण लोग देखकर खुद भी पूछने और जानकारी लेने लगे। पिछले दो साल में हमें लागत का दोगुना फायदा होने लगा है। पहले मैंने टेस्टिंग की। पिछले साल मैंने 40 बीघे में केले की खेती का फायदा देखकर इस बार 200 बीघे में फसल लगाई है और आगे के लिए और जमीन लीज पर लेकर केले की खेती की योजना है। उन्होंने बताया कि पहले वह रियल स्टेट का काम करते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा है कि आगे का भविष्य खेती में काफी उज्ज्वल है तो पूरा फोकस खेती पर रखा है। मैं अपने दोनों बेटों को भी कृषि की ही पढ़ाई कराऊंगा, जिससे वह एक विशेषज्ञ बनकर खेती करें। इस ग्रुप में कुछ लोगों का राइपिंग चैंब(पकाने के लिए) भी बनाया है। इसको बाजार भी काफी अच्छा मिल रहा है। इसके अलावा नरेश चंद्र शर्मा भी केले की खेती कर रहे हैं।
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पश्चिमी यूपी गन्ने की खेती से जाना जाता है लेकिन पिछले दो साल में यहां के किसानों में केले की खेती की तरफ रुझान बढ़ा है। उद्यान विभाग के पास भी केले की खेती के लिए काफी प्रस्ताव आए हैं, जिसकी वजह से उन्होंने शासन में लक्ष्य बढ़ाने का प्रस्ताव भी भेजा है। पूरे पश्चिमी यूपी में किसानों में केले की खेती के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। जिले में लगभग 20 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है लेकिन सब्सिडी का लाभ अभी इतने किसानों को नहीं मिल रहा है क्योंकि शासन से अभी 10 हेक्टेयर के लक्ष्य के हिसाब से बजट मिला है। पिछले वर्ष शासन से पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था जो इस बार बढ़कर 10 हेक्टेयर हो गया है। इसके अलावा अभी भी आठ से 10 किसानों ने केले की खेती के लिए आवेदन किया है। मेरठ मंडल के जिलों में केले की खेती सर्वाधिक हापुड़ में 150 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है। वहीं मेरठ में 43 हेक्टेयर, बुलंदशहर में 35 हेक्टेयर, बागपत में 30 हेक्टेयर और नोएडा में 20 हेक्टेयर में किसानों ने केले की खेती की है।
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महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात आदि से एनसीआर में केले आते हैं। दिल्ली एनसीआर में रोजाना कम से कम 40-50 गाड़ियां बाहर से आती हैं। अगर यहां के किसान खेती करने लगे तो यहीं पर उन्हें काफी बड़ा बाजार मिल जाएगा।
उद्यान निरीक्षक रचना सिंह ने बताया कि केले की खेती पर प्रति हेक्टेयर 30738 रुपये मिलते हैं। यह सब्सिडी दो साल की होती है। पहले साल में बीज और पौधों के लिए दूसरे साल में सिर्फ खाद पर सब्सिडी मिलती है। सबसे अधिक केले की खेती मोहम्मदपुर सुजानपुर में हो रही है। इनकी जियो टैगिंग भी हो रही है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार दोगुना लक्ष्य
जिले में पिछले साल पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था जो इस बार बढ़ाकर दोगुना यानी 10 हेक्टेयर कर दिया गया है। जिले में आठ किसानों ने केले की खेती के लिए आवेदन किया है लेकिन चार आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं। किसानों में केले की खेती की तरफ रुझान देखते हुए लक्ष्य बढ़ाए जाने की मांग की गई है। - निधि कुमारी, जिला उद्यान अधिकारी