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प्रदूषण पर वार के मास्टर स्ट्रोक पर लगा ब्रेक
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प्रदूषण पर वार के मास्टरस्ट्रोक पर लगा ब्रेक
गाजियाबाद। देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल गाजियाबाद को राहत देने वाली सबसे बड़ी योजना महंगाई की वजह से दम तोड़ गई है। साल 2011 में जब यहां की 27 हजार इंडस्ट्री को पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) में परिवर्तित करने का ऐलान किया गया तो इसे मास्टरस्ट्रोक माना गया। बीते नौ साल में केवल 351 यूनिटों ने ही पीएनजी कनेक्शन लिया और इनमेें से महज 30 ही पीएनजी से पूरी तरह संचालित हैं। उद्यमी चाहते हैं कि ताजनगरी की तरह उन्हें भी 50 फीसदी कीमत पर ही पीएनजी दी जाए।
जिले में करीब 345 इंडस्ट्री प्रदूषण के मानक के लिहाज से रेड श्रेणी में आती हैं। इनमें से अधिकांश का संचालन कच्चे ईंधन से किया जाता है, जिससे प्रदूषण काफी फैसला है। एनजीटी से सर्वोच्च न्यायालय तक ने कई बार कहा है कि एनसीआर को प्रदूषण से बचाने के लिए इंडस्ट्री को पीएनजी उपलब्ध कराई जाए और उसी पर उनका संचालन हो। कच्चे ईंधन का इस्तेमाल होने से कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन अधिक होता है, जो स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। एनजीटी और न्यायालय की सख्त आपत्ति के बीच वर्ष 2011 से जिले में इंडस्ट्री को पीएनजी पर परिवर्तित करने की योजना पर काम शुरू हुआ। आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) ने जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया। वर्ष 2015 तक लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्रों तक पाइप लाइन पहुंचा दी गई लेकिन कनेक्शन लेने में उद्यमियों ने कोई तत्परता नहीं दिखाई। आईजीएल के अधिकारी उदय माथुर बताते हैं कि लगभग सभी इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में पाइप लाइन डाल चुके हैं, अब उद्यमियों को गैस कनेक्शन लेना है लेकिन बेहद कम लोग अभी तक कनेक्शन ले पाए हैं। बाकी किसी क्षेत्र में डिमांड है तो वहां पर भी पाइप लाइन डालने को तैयार हैं।
आसान नहीं पीएनजी पर इंडस्ट्री को चलाना
उद्यमियों का तर्क है कि पीएनजी पर किसी भी उद्योग को चलाना आसान नहीं है। जिले में अधिकांश उद्योग काफी पहले से पुरानी तकनीक पर संचालित हैं, जिन्हें कच्चे ईंधन से पीएनजी में परिवर्तित करने पर तकनीक में काफी बदलाव करना होगा। नई मशीनें लगानी पड़ेंगी, जिसके लिए प्रति इंडस्ट्री को 20 लाख रुपये से एक-सवा करोड़ रुपया अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
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कीमत पर भी विवाद, सब्सिडी चाहते हैं कारोबारी
स्थानीय उद्यमी कीमतों में कटौती की भी मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रदेश सरकार ताजमहल को बचाने के लिए आगरा व फिरोजाबाद में इंडस्ट्री को सब्सिडी रेट पर पीएनजी उपलब्ध करा रही है, जो यहां से आधी कीमतों पर मिल रही है। इसी तरह से पंजाब सरकार भी 19.50 रुपये प्रति एससीएम ( स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) के हिसाब से दे रही है, जबकि गाजियाबाद में 27.45 एससीएम रुपये से ऊपर मिल रही है। अब अगर उद्यमी इस रेट पर गैस खरीद कर इंडस्ट्री चलाएंगे तो उनकी उत्पादन लागत बढ़ेगी जो आगरा या पंजाब से तैयार माल की कीमतों पर अपना माल तैयार नहीं कर सकेंगे। इसी कीमतों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
उद्यमी मांगें सब्सिडी या ब्याजमुक्त कर्ज
अब उद्यमी चाहते हैं कि सरकार उन्हें सब्सिडी रेट पर आगरा, फिरोजाबाद और पंजाब की तर्ज पर पीएनजी मुहैया कराए। इंडस्ट्री को पीएनजी में परिवर्तित करने पर आने वाले खर्च को सरकार स्वयं ही उठाए। या फिर लंबी अवधि के लिए ब्याजमुक्त कर्ज मुहैया कराए, जिससे की लागत खर्च का बोझ इंडस्ट्री पर सीधे तौर पर न पड़े। लंबे समय से उद्यमियों और सरकार के बीच वार्ता चली आ रही है लेकिन कोई हल नहीं निकला है, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी है।
प्रदूषण से निपटने को चाहिए विजन
सरकार के पास कोई ठोस विजन प्रदूषण से निपटने के लिए नहीं है। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग को अक्तूबर से दिसंबर के बीच प्रदूषण की याद आती है। जिले की महज 27 इंडस्ट्री पूरी तरह से पीएनजी पर संचालित हैं। अगर पुरानी इंडस्ट्री को परिवर्तित करने में दिक्कत आ रही है तो नई इंडस्ट्री को तभी परमिशन मिलनी चाहिए जब उसमें पीएनजी से चलने की तकनीक हो लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
- सुशील राघव, पर्यावरणविद
हमारी अपनी समस्या है। प्रदूषण की समस्या हमें भी दिखाई देती है लेकिन इंडस्ट्री चलाने के लिए काफी चीजें देखनी पड़ती है। आज पीएनजी से अगर किसी इंडस्ट्री को चलाना है तो करीब एक करोड़ रुपया का अतिरिक्त भार पड़ेगा। दूसरे आगरा-फिरोजाबाद से दोगुनी कीमतों पर गैस खरीदे जाने से लागत खर्च अधिक होगा। हमारी मांग यही कि सब्सिडी रेट पर पीएनजी मिले और सरकार 10 वर्ष का ब्याजमुक्त ऋण दे।
- राजीव अरोड़ा, महासचिव इंडस्ट्रियल एरिया मेन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन, बुलंदशहर रोड
हम लगातार प्रयास कर रहें कि इंडस्ट्री को पीएनजी पर परिवर्तित किया जाए। बीते वर्ष सभी इंडस्ट्री को नोटिस दिए गए थे। इस बार भी दिए जा रहे हैं। कुछ इंडस्ट्री की व्यावहारिक दिक्कतें हैं, जिन्हें दूसरे करने में समय लगेगा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और राज्य सरकार के साथ भी इन बिंदुओं पर चर्चा हो चुकी है। बाकी विभाग रेड श्रेणी की इंडस्ट्री में सुनिश्चित कराने में लगा है कि वहां शत प्रतिशत पीएनजी का इस्तेमाल हो।
- उत्सव शर्मा- क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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गाजियाबाद। देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल गाजियाबाद को राहत देने वाली सबसे बड़ी योजना महंगाई की वजह से दम तोड़ गई है। साल 2011 में जब यहां की 27 हजार इंडस्ट्री को पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) में परिवर्तित करने का ऐलान किया गया तो इसे मास्टरस्ट्रोक माना गया। बीते नौ साल में केवल 351 यूनिटों ने ही पीएनजी कनेक्शन लिया और इनमेें से महज 30 ही पीएनजी से पूरी तरह संचालित हैं। उद्यमी चाहते हैं कि ताजनगरी की तरह उन्हें भी 50 फीसदी कीमत पर ही पीएनजी दी जाए।
जिले में करीब 345 इंडस्ट्री प्रदूषण के मानक के लिहाज से रेड श्रेणी में आती हैं। इनमें से अधिकांश का संचालन कच्चे ईंधन से किया जाता है, जिससे प्रदूषण काफी फैसला है। एनजीटी से सर्वोच्च न्यायालय तक ने कई बार कहा है कि एनसीआर को प्रदूषण से बचाने के लिए इंडस्ट्री को पीएनजी उपलब्ध कराई जाए और उसी पर उनका संचालन हो। कच्चे ईंधन का इस्तेमाल होने से कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन अधिक होता है, जो स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। एनजीटी और न्यायालय की सख्त आपत्ति के बीच वर्ष 2011 से जिले में इंडस्ट्री को पीएनजी पर परिवर्तित करने की योजना पर काम शुरू हुआ। आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) ने जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया। वर्ष 2015 तक लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्रों तक पाइप लाइन पहुंचा दी गई लेकिन कनेक्शन लेने में उद्यमियों ने कोई तत्परता नहीं दिखाई। आईजीएल के अधिकारी उदय माथुर बताते हैं कि लगभग सभी इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में पाइप लाइन डाल चुके हैं, अब उद्यमियों को गैस कनेक्शन लेना है लेकिन बेहद कम लोग अभी तक कनेक्शन ले पाए हैं। बाकी किसी क्षेत्र में डिमांड है तो वहां पर भी पाइप लाइन डालने को तैयार हैं।
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आसान नहीं पीएनजी पर इंडस्ट्री को चलाना
उद्यमियों का तर्क है कि पीएनजी पर किसी भी उद्योग को चलाना आसान नहीं है। जिले में अधिकांश उद्योग काफी पहले से पुरानी तकनीक पर संचालित हैं, जिन्हें कच्चे ईंधन से पीएनजी में परिवर्तित करने पर तकनीक में काफी बदलाव करना होगा। नई मशीनें लगानी पड़ेंगी, जिसके लिए प्रति इंडस्ट्री को 20 लाख रुपये से एक-सवा करोड़ रुपया अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
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कीमत पर भी विवाद, सब्सिडी चाहते हैं कारोबारी
स्थानीय उद्यमी कीमतों में कटौती की भी मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रदेश सरकार ताजमहल को बचाने के लिए आगरा व फिरोजाबाद में इंडस्ट्री को सब्सिडी रेट पर पीएनजी उपलब्ध करा रही है, जो यहां से आधी कीमतों पर मिल रही है। इसी तरह से पंजाब सरकार भी 19.50 रुपये प्रति एससीएम ( स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) के हिसाब से दे रही है, जबकि गाजियाबाद में 27.45 एससीएम रुपये से ऊपर मिल रही है। अब अगर उद्यमी इस रेट पर गैस खरीद कर इंडस्ट्री चलाएंगे तो उनकी उत्पादन लागत बढ़ेगी जो आगरा या पंजाब से तैयार माल की कीमतों पर अपना माल तैयार नहीं कर सकेंगे। इसी कीमतों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
उद्यमी मांगें सब्सिडी या ब्याजमुक्त कर्ज
अब उद्यमी चाहते हैं कि सरकार उन्हें सब्सिडी रेट पर आगरा, फिरोजाबाद और पंजाब की तर्ज पर पीएनजी मुहैया कराए। इंडस्ट्री को पीएनजी में परिवर्तित करने पर आने वाले खर्च को सरकार स्वयं ही उठाए। या फिर लंबी अवधि के लिए ब्याजमुक्त कर्ज मुहैया कराए, जिससे की लागत खर्च का बोझ इंडस्ट्री पर सीधे तौर पर न पड़े। लंबे समय से उद्यमियों और सरकार के बीच वार्ता चली आ रही है लेकिन कोई हल नहीं निकला है, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी है।
प्रदूषण से निपटने को चाहिए विजन
सरकार के पास कोई ठोस विजन प्रदूषण से निपटने के लिए नहीं है। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग को अक्तूबर से दिसंबर के बीच प्रदूषण की याद आती है। जिले की महज 27 इंडस्ट्री पूरी तरह से पीएनजी पर संचालित हैं। अगर पुरानी इंडस्ट्री को परिवर्तित करने में दिक्कत आ रही है तो नई इंडस्ट्री को तभी परमिशन मिलनी चाहिए जब उसमें पीएनजी से चलने की तकनीक हो लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
- सुशील राघव, पर्यावरणविद
हमारी अपनी समस्या है। प्रदूषण की समस्या हमें भी दिखाई देती है लेकिन इंडस्ट्री चलाने के लिए काफी चीजें देखनी पड़ती है। आज पीएनजी से अगर किसी इंडस्ट्री को चलाना है तो करीब एक करोड़ रुपया का अतिरिक्त भार पड़ेगा। दूसरे आगरा-फिरोजाबाद से दोगुनी कीमतों पर गैस खरीदे जाने से लागत खर्च अधिक होगा। हमारी मांग यही कि सब्सिडी रेट पर पीएनजी मिले और सरकार 10 वर्ष का ब्याजमुक्त ऋण दे।
- राजीव अरोड़ा, महासचिव इंडस्ट्रियल एरिया मेन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन, बुलंदशहर रोड
हम लगातार प्रयास कर रहें कि इंडस्ट्री को पीएनजी पर परिवर्तित किया जाए। बीते वर्ष सभी इंडस्ट्री को नोटिस दिए गए थे। इस बार भी दिए जा रहे हैं। कुछ इंडस्ट्री की व्यावहारिक दिक्कतें हैं, जिन्हें दूसरे करने में समय लगेगा। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और राज्य सरकार के साथ भी इन बिंदुओं पर चर्चा हो चुकी है। बाकी विभाग रेड श्रेणी की इंडस्ट्री में सुनिश्चित कराने में लगा है कि वहां शत प्रतिशत पीएनजी का इस्तेमाल हो।
- उत्सव शर्मा- क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी