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पावर कारपारेशन के नियम हो आसान तो खत्म हो बिल्डर और एओए का खेल
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पावर कारपोरेशन के नियम हो आसान तो खत्म हो सोसायटियों में वसूली का खेल
गाजियाबाद। बहुमंजिला रिहायशी इमारतों और सोसायटियों में बिजली बिल व फिक्स चार्ज का खेल पावर कारपोरेशन के सख्त नियमों की वजह से चल रहा है। रेजिडेंट्स का कहना है कि विद्युत निगम के मल्टीपल कनेक्शन के नियमों को आसान किया जाए तो बिल्डर और एओए के इस खेल पर लगाम लग सकती है। मल्टीपल कनेक्शन दिए जाने से पहले पावर कारपोरेशन ने किसी भी सोसायटी के 51 फीसदी फ्लैट मालिकों की सहमति अनिवार्य कर दी है। किसी भी सोसायटी में यह आंकड़ा पूरा नहीं हो पा रहा है।
पावर कारपोरेशन की ओर से बिल्डरों को सिंगल प्वाइंट बिजली कनेक्शन दिए हुए हैं। इस कनेक्शन से बिल्डर अपने स्तर से फ्लैटों को कनेक्शन देते हैं। यही से अवैध वसूली का खेल शुरू हो जाता है। सोसायटी में मौजूद बिजली कनेक्शन की क्षमता से कहीं ज्यादा लोड बिल्डर फ्लैटों में बांट देते हैं और फिक्स चार्ज के नाम पर चार से पांच गुना ज्यादा तक वसूली की जा रही है। ऐसे में अब रेजिडेंट्स की ओर से मल्टीपल कनेक्शन की शर्तों को आसान बनाए जाने की मांग उठने लगी है। राजनगर एक्सटेंशन की कई सोसायटियों के लोग इस मांग को लेकर पावर कारपोरेशन के सामने शर्त भी रखेंगे। उनकी मांग है कि मल्टीपल कनेक्शन दिए जाने के लिए निर्धारित की गई 51 फीसदी रेजिडेंट्स की सहमति को घटाकर 25 फीसदी किया जाए।
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परिचर्चा
बिल्डर और एओए मनमाना फिक्स चार्ज, यूनिट चार्ज लेकर रेजिडेंट्स से अवैध वसूली कर रहे हैं। पावर कारपोरेशन को मल्टीपल कनेक्शन की शर्तों को आसान करना चाहिए, ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। - दिग्विजय चौधरी, केडीपी निवासी
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सोसायटियों में सबसे पहले बिजली और मेंटेनेंस मीटर और उनके बैंक अकाउंट अलग-अलग होने चाहिए, ताकि पता रहे कि बिल्डर या एओए किस मद में कितना पैसा वसूल रहे हैं। समय-समय पर एओए को जनरल बॉडी की बैठक बुलाकर उसमें वसूली और खर्च का ब्यौरा देना चाहिए। - वीके जैन, केडीपी निवासी
पावर कारपोरेशन की मिलीभगत से बिल्डर और एओए बिजली के फिक्स चार्ज वसूली में मनमानी कर रहे हैं। पावर कारपोरेशन सभी फ्लैटों में अलग-अलग कनेक्शन दे दे तो दोनों की ही अवैध वसूली का खेल खत्म हो जाएगा। - प्रेमप्रकाश, एसजी इंप्रेशन निवासी
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गाजियाबाद। बहुमंजिला रिहायशी इमारतों और सोसायटियों में बिजली बिल व फिक्स चार्ज का खेल पावर कारपोरेशन के सख्त नियमों की वजह से चल रहा है। रेजिडेंट्स का कहना है कि विद्युत निगम के मल्टीपल कनेक्शन के नियमों को आसान किया जाए तो बिल्डर और एओए के इस खेल पर लगाम लग सकती है। मल्टीपल कनेक्शन दिए जाने से पहले पावर कारपोरेशन ने किसी भी सोसायटी के 51 फीसदी फ्लैट मालिकों की सहमति अनिवार्य कर दी है। किसी भी सोसायटी में यह आंकड़ा पूरा नहीं हो पा रहा है।
पावर कारपोरेशन की ओर से बिल्डरों को सिंगल प्वाइंट बिजली कनेक्शन दिए हुए हैं। इस कनेक्शन से बिल्डर अपने स्तर से फ्लैटों को कनेक्शन देते हैं। यही से अवैध वसूली का खेल शुरू हो जाता है। सोसायटी में मौजूद बिजली कनेक्शन की क्षमता से कहीं ज्यादा लोड बिल्डर फ्लैटों में बांट देते हैं और फिक्स चार्ज के नाम पर चार से पांच गुना ज्यादा तक वसूली की जा रही है। ऐसे में अब रेजिडेंट्स की ओर से मल्टीपल कनेक्शन की शर्तों को आसान बनाए जाने की मांग उठने लगी है। राजनगर एक्सटेंशन की कई सोसायटियों के लोग इस मांग को लेकर पावर कारपोरेशन के सामने शर्त भी रखेंगे। उनकी मांग है कि मल्टीपल कनेक्शन दिए जाने के लिए निर्धारित की गई 51 फीसदी रेजिडेंट्स की सहमति को घटाकर 25 फीसदी किया जाए।
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परिचर्चा
बिल्डर और एओए मनमाना फिक्स चार्ज, यूनिट चार्ज लेकर रेजिडेंट्स से अवैध वसूली कर रहे हैं। पावर कारपोरेशन को मल्टीपल कनेक्शन की शर्तों को आसान करना चाहिए, ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। - दिग्विजय चौधरी, केडीपी निवासी
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सोसायटियों में सबसे पहले बिजली और मेंटेनेंस मीटर और उनके बैंक अकाउंट अलग-अलग होने चाहिए, ताकि पता रहे कि बिल्डर या एओए किस मद में कितना पैसा वसूल रहे हैं। समय-समय पर एओए को जनरल बॉडी की बैठक बुलाकर उसमें वसूली और खर्च का ब्यौरा देना चाहिए। - वीके जैन, केडीपी निवासी
पावर कारपोरेशन की मिलीभगत से बिल्डर और एओए बिजली के फिक्स चार्ज वसूली में मनमानी कर रहे हैं। पावर कारपोरेशन सभी फ्लैटों में अलग-अलग कनेक्शन दे दे तो दोनों की ही अवैध वसूली का खेल खत्म हो जाएगा। - प्रेमप्रकाश, एसजी इंप्रेशन निवासी