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हर बुखार कोरोना नहीं, जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श से लें दवाएं
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चिकित्सक की सलाह..
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हर बुखार कोरोना नहीं, जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श से लें दवाएं
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के बीच हर बुखार को कोरोना समझ लेना भी नुकसानदायक है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे में खुद से इलाज शुरू करना भी ठीक नहीं है। जांच के बाद ही लोग चिकित्सक के परामर्श से इलाज कराएं।
कोरोना के साथ-साथ इन दिनों वायरल और टाइफाइड के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। संजयनगर संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि हर बुखार को कोरोना मान लेने से व्यक्ति मानसिक दबाव में आ जाता है। ऐसे में जरूरत है कि जांच कराने के बाद ही इलाज शुरू किया जाए। कोविड कि रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आती है तो चिकित्सक के परामर्श से दवा लें। माइल्ड केस में होम आइसोलेशन से बेहतर इलाज नहीं हो सकता। यहां अस्पताल के मुकाबले संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है। अगर रिपोर्ट नेगेटिव है और बुखार में आराम नहीं मिल रहा है तो रक्त की जांच कराएं।
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बिना चिकित्सक के न लें दवाएं :
डॉ. गुप्ता ने बताया कि बुखार, सर्दी, खांसी होने पर भी मेडिकल से दवा लेकर न खाएं। पैरासिटामोल का अधिक सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। खासतौर पर जब आप अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। जांच और चिकित्सक की परामर्श के बाद ही दवा लें। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी नुकसानदायक हो सकता है।
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टाइफाइड के लक्षण :
टाइफाइड के लक्षण को लोग कोरोना मानकर चल रहे हैं। गर्मी के मौसम में टाइफाइड का खतरा अधिक होता है। ये पानी और फूड जनित बीमारी है। डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि इसमें मरीज को शरीर में कमजोरी, सिर दर्द, बदन दर्द, दस्त, भूख न लगना और 102 से 104 तक बुखार रहता है। जांच के बाद मरीज को इसका इलाज शुरू करना चाहिए। वायरल बुखार को भी सही होने में सात से आठ दिन लगते हैं।
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कोरोना के लक्षण :
सूखी खांसी, बुखार, गंध न आना, स्वाद महसूस न होना, गले में खराश
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इन बातों का रखें ध्यान
- जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें।
- मास्क का प्रयोग करें, घर से बाहर दो मास्क का प्रयोग करें।
- घर से बाहर सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहें और घर आकर साबुन से हाथ अच्छी तरह साफ करें।
- ठंडा पानी न पीएं, धूप से सीधे आकर पानी न पीएं।
- एसी, कूलर का प्रयोग न करें।
- गुनगुने पानी का प्रयोग करें और नमक डालकर गरारे करें।
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हर बुखार कोरोना नहीं, जांच के बाद चिकित्सक के परामर्श से लें दवाएं
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के बीच हर बुखार को कोरोना समझ लेना भी नुकसानदायक है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे में खुद से इलाज शुरू करना भी ठीक नहीं है। जांच के बाद ही लोग चिकित्सक के परामर्श से इलाज कराएं।
कोरोना के साथ-साथ इन दिनों वायरल और टाइफाइड के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। संजयनगर संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि हर बुखार को कोरोना मान लेने से व्यक्ति मानसिक दबाव में आ जाता है। ऐसे में जरूरत है कि जांच कराने के बाद ही इलाज शुरू किया जाए। कोविड कि रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आती है तो चिकित्सक के परामर्श से दवा लें। माइल्ड केस में होम आइसोलेशन से बेहतर इलाज नहीं हो सकता। यहां अस्पताल के मुकाबले संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है। अगर रिपोर्ट नेगेटिव है और बुखार में आराम नहीं मिल रहा है तो रक्त की जांच कराएं।
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बिना चिकित्सक के न लें दवाएं :
डॉ. गुप्ता ने बताया कि बुखार, सर्दी, खांसी होने पर भी मेडिकल से दवा लेकर न खाएं। पैरासिटामोल का अधिक सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। खासतौर पर जब आप अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। जांच और चिकित्सक की परामर्श के बाद ही दवा लें। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी नुकसानदायक हो सकता है।
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टाइफाइड के लक्षण :
टाइफाइड के लक्षण को लोग कोरोना मानकर चल रहे हैं। गर्मी के मौसम में टाइफाइड का खतरा अधिक होता है। ये पानी और फूड जनित बीमारी है। डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि इसमें मरीज को शरीर में कमजोरी, सिर दर्द, बदन दर्द, दस्त, भूख न लगना और 102 से 104 तक बुखार रहता है। जांच के बाद मरीज को इसका इलाज शुरू करना चाहिए। वायरल बुखार को भी सही होने में सात से आठ दिन लगते हैं।
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कोरोना के लक्षण :
सूखी खांसी, बुखार, गंध न आना, स्वाद महसूस न होना, गले में खराश
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इन बातों का रखें ध्यान
- जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें।
- मास्क का प्रयोग करें, घर से बाहर दो मास्क का प्रयोग करें।
- घर से बाहर सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहें और घर आकर साबुन से हाथ अच्छी तरह साफ करें।
- ठंडा पानी न पीएं, धूप से सीधे आकर पानी न पीएं।
- एसी, कूलर का प्रयोग न करें।
- गुनगुने पानी का प्रयोग करें और नमक डालकर गरारे करें।