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कंप्यूटर-मोबाइल छीन रहे आंखों की नमी
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ghaziabad news
कंप्यूटर-मोबाइल छीन रहे आंखों की नमी
गाजियाबाद। देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने और रात में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आंखों का पानी सूख रहा है। विशेष तौर पर बच्चों की आंखों में दर्द व खुजली की परेशानी बढ़ रही है। डाक्टरों का कहना है कि इस परेशानी को कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है। इसमें आंखों में आंसू सूखने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसा स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने की वजह से होता है। इसकी मुख्य वजह कंप्यूटर और मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताना और इन पर काम करने के दौरान पलकें कम झपकाना होती हैं। पलकें कम झपकाने (आई ब्लिंकिंग) की वजह से आंखों की बारीक धमनियां काम करना बंद कर देती हैं। ये महीन धमनियां हमारी आखों में प्राकृतिक गीलापन बनाए रखने का काम करती हैं। लेकिन पलकें ना झपकने के चलते सूखापन बढ़ जाता है। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की चपेट में आने से इलाज के लिए जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज पहुंच रहे हैं।
आंखों में सूखेपन यानि ड्राइनेस की समस्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक और कम उम्र में देखने को मिलती है। इसकी वजह हॉर्मोनल बदलाव होता है। जब सूखेपन की समस्या होती है तो व्यक्ति को बार-बार ऐसा लगता है कि आंख में कुछ गिर गया है, जबकि ऐसा होता नहीं है। आंख में किरकिराहट की यह दिक्कत सूखेपन की वजह से होती है। इस स्थिति में आंखों को तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए। रगड़ने से बचें नहीं तो आंखों को अधिक नुकसान हो सकता है। स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने के साथ ही एसी कमरों में घंटों बैठना या सर्दी के मौसम में रुम हीटर भी सूखेपन की एक वजह होता है।
आंखों में आंसू सूखने के कारण
एमएमजी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ नरेंद्र कुमार का कहना है कि आंखों में आंसू सूखने की तेजी से बढ़ती समस्या की वजह खासतौर पर युवाओं में देर तक कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने काम करना है। इसके अलावा एलर्जी, किसी दवाई का साइडइफेक्ट, किसी तरह के इंफेक्शन या बढ़ती उम्र के कारण होनेवाली समस्याएं जैसे महिलाओं में मेनॉपॉज और पुरुषों में हॉर्मोन का असंतुलन, कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल, किसी सर्जरी के कारण, थाइरॉइड का असंतुलन। अगर आंखों में ड्राईनेस की समस्या को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो व्यक्ति अंधा तो नहीं होता लेकिन आगे चलकर आंखों में हर समय जलन की समस्या, थकान, भारीपन रहने लगेगा। यहां तक कि मरीज का मन ही नहीं करता है कि वो आंखें खोले।
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गाजियाबाद। देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने और रात में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आंखों का पानी सूख रहा है। विशेष तौर पर बच्चों की आंखों में दर्द व खुजली की परेशानी बढ़ रही है। डाक्टरों का कहना है कि इस परेशानी को कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है। इसमें आंखों में आंसू सूखने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसा स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने की वजह से होता है। इसकी मुख्य वजह कंप्यूटर और मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताना और इन पर काम करने के दौरान पलकें कम झपकाना होती हैं। पलकें कम झपकाने (आई ब्लिंकिंग) की वजह से आंखों की बारीक धमनियां काम करना बंद कर देती हैं। ये महीन धमनियां हमारी आखों में प्राकृतिक गीलापन बनाए रखने का काम करती हैं। लेकिन पलकें ना झपकने के चलते सूखापन बढ़ जाता है। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की चपेट में आने से इलाज के लिए जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज पहुंच रहे हैं।
आंखों में सूखेपन यानि ड्राइनेस की समस्या महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले अधिक और कम उम्र में देखने को मिलती है। इसकी वजह हॉर्मोनल बदलाव होता है। जब सूखेपन की समस्या होती है तो व्यक्ति को बार-बार ऐसा लगता है कि आंख में कुछ गिर गया है, जबकि ऐसा होता नहीं है। आंख में किरकिराहट की यह दिक्कत सूखेपन की वजह से होती है। इस स्थिति में आंखों को तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए। रगड़ने से बचें नहीं तो आंखों को अधिक नुकसान हो सकता है। स्क्रीन पर अधिक वक्त बिताने के साथ ही एसी कमरों में घंटों बैठना या सर्दी के मौसम में रुम हीटर भी सूखेपन की एक वजह होता है।
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आंखों में आंसू सूखने के कारण
एमएमजी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ नरेंद्र कुमार का कहना है कि आंखों में आंसू सूखने की तेजी से बढ़ती समस्या की वजह खासतौर पर युवाओं में देर तक कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने काम करना है। इसके अलावा एलर्जी, किसी दवाई का साइडइफेक्ट, किसी तरह के इंफेक्शन या बढ़ती उम्र के कारण होनेवाली समस्याएं जैसे महिलाओं में मेनॉपॉज और पुरुषों में हॉर्मोन का असंतुलन, कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल, किसी सर्जरी के कारण, थाइरॉइड का असंतुलन। अगर आंखों में ड्राईनेस की समस्या को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो व्यक्ति अंधा तो नहीं होता लेकिन आगे चलकर आंखों में हर समय जलन की समस्या, थकान, भारीपन रहने लगेगा। यहां तक कि मरीज का मन ही नहीं करता है कि वो आंखें खोले।
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