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ऑनलाइन क्लास से छात्राओं के नंबर किए जा रहे चोरी, पहले पढ़ाई के नाम पर कॉल फिर करने लगे अश्लील चैट

Sat, 06 Feb 2021 12:38 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद Published by: गाजियाबाद ब्यूरो Updated Sat, 06 Feb 2021 12:38 AM IST
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Number of girl students being stolen from online class
girl on phone

कोरोनाकाल में विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए शुरू की गईं ऑनलाइन क्लॉस मनचलों के निशाने पर हैं। क्लासेज के व्हाट्सएप ग्रुप्स से छात्राओं के नंबर चोरी कर उन्हें अश्लील कॉल की जा रही है। जिले के विभिन्न थानों व साइबर सेल में इस तरह की शिकायतें मिली हैं। पीड़ित छात्राओं व उनके परिजनों का आरोप है कि ऑनलाइन क्लास लेने से पहले उनके नंबर पर कोई अश्लीलता नहीं हुई। क्लास शुरू होने के कुछ दिनों बाद उनके नंबर पर इंटरनेट व वीडियो कॉल आनी शुरू हो गईं। पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी हैं।

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साइबर सेल से प्राप्त आंकड़े के मुताबिक, इस साल अब तक साइबर अपराध से जुड़ी 438 शिकायतें मिली हैं। इनमें से 35 शिकायतें सोशल मीडिया से संबंधित अपराध की हैं। इनमें से करीब आधे पीड़ित ऐसे हैं, जो ऑनलाइन क्लास लेते हैं। इनमें से अधिकांश संख्या युवतियों व किशोरियों की हैं। किसी के साथ फेसबुक पर अश्लीलता की गई तो किसी को व्हाट्सएप पर परेशान किया गया। मनचलों के नंबर ब्लॉक करने के बावजूद भी कोई राहत नहीं मिली। क्योंकि, आरोपियों ने नंबर बदलकर फिर से अश्लीलता शुरू कर दी। थक-हारकर न चाहते हुए भी छात्राओं या उनके परिजनों को पुलिस से गुहार लगानी पड़ी।
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पहले पढ़ाई के नाम पर कॉल फिर करने लगे अश्लील चैट
केस एक :
कविनगर क्षेत्र में रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा यूपीएससी की तैयारी कर रही है। उसने पुलिस को बताया कि वह टेलीग्राम एप पर ऑनलाइन स्टडी कर रही है। एक युवक ने उसे पर्सनल मेसेज भेजा, जिसमें पढ़ाई की बात की। छात्रा के रिप्लाई करते ही युवक पीछे पड़ गया। छात्रा का आरोप है कि अकाउंट हैक करने की धमकी देकर युवक ने अश्लील चैट का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, बदनाम करने की धमकी देकर आरोपी ने पैसों की मांग की। कविनगर पुलिस ने टेलीग्राम मुख्यालय से आरोपी की डिटेल मांगी है।
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केस दो : राजनगर सेक्टर-13 निवासी स्टील कारोबारी के मुताबिक उनका बेटा मेरठ रोड स्थित नामी स्कूल में कक्षा आठ का छात्र है। स्कूल की ऑनलाइन क्लॉस में किसी ने उनके बेटे के नाम से फर्जी आईडी बना ली और स्कूल की ही महिला टीचर को अश्लील मेसेज भेजने शुरू कर दिए। कारोबारी का आरोप है कि आरोपी ने उनके बेटे की आईडी भी हैक कर ली और उसे जान से मारने की धमकी दी। टीचर ने उनसे शिकायत की तो ऑनलाइन क्लास से शुरू हुए अपराध का पता लगा।

केस तीन : सिहानी गेट थानाक्षेत्र में रहने वाली एक लड़की कक्षा 12 की छात्रा है। कोरानाकाल में उसकी ऑनलाइन क्लास चली थीं। क्लास के ग्रुप में उसने पिता का नंबर जुड़वाया था। कुछ दिनों बाद उक्त नंबर पर अश्लील मेसेज आने शुरू हो गए। छात्रा के मुताबिक आरोपी ने वीडियो मेसेज भेजने के साथ-साथ व्हॉट्सएप कॉल करके भी परेशान करना शुरू कर दिया। शुरू में आरोपी ने खुद को छात्रा के टीचर का बेटा बताया, जबकि टीचर अविवाहित थे।

कुछ नंबर छात्राओं के परिजनों के निकले
साइबर सेल में कुछ ऐसे मामले भी आए, जिनमें मोबाइल नंबर पर अश्लील चैट व कॉलिंग की गई। उक्त नंबर ऑनलाइन क्लास के लिए इस्तेमाल तो छात्राएं करती थी, लेकिन वह नंबर उनके परिजनों के थे। परिजनों के पास अश्लील मेसेज व कॉर्ल्स आईं तो इसका पता चला। दो मामलों में परिजनों द्वारा चेतावनी भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें इंटरनेट कॉल करके छात्राओं से बात कराने का दबाव डाला गया।

फुल पेड एप इस्तेमाल न करना भी एक वजह
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह का कहना है कि ऑनलाइन क्लासेज दो तरीके से चल रही हैं। पहली किसी एप के जरिये और दूसरा व्हॉट्सएप ग्रुप के जरिये। अधिकांश स्कूल फुल पेड एप का इस्तेमाल नहीं कर रहे, जिसके चलते एक-दूसरे की आईडी के बारे में पता लगाया जा सकता है। अगर सर्टिफाइड और फुल पेड एप का इस्तेमाल किया जाए तो उसमें एक आर्गेनाइजर होगा। ग्रुप में जुड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के बारे में सिर्फ उसे ही पता होगा।

नंबर को ब्लॉक कर दें या व्हाट्सएप पर रिपोर्ट करें
साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह का कहना है कि ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद इस तरह के मामले बढ़े हैं। इससे बचने के दो रास्ते हैं। व्हाट्सएप पर किसी तरह का आपत्तिजनक मेसेज या पोस्ट आने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा तत्काल राहत के लिए नंबर को ब्लॉक कर दें या फिर व्हाट्सएप के ऑप्शन में जाकर रिपोर्ट करें। रिपोर्ट करने पर संबंधित मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप की सेवा बंद हो जाती है। इसके अलावा ऑनलाइन कॉल के लिए एक अलग नंबर लिया जा सकता है। उसे ऑनलाइन क्लास के अलावा इस्तेमाल न किया जाए।


पिछले साल सामने आए थे 700 मामले
साइबर सेल से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल साइबर अपराध के 37 सौ से अधिक शिकायतें आई थीं। इनमें से करीब 700 शिकायतें सोशल अकाउंट से जुड़ी थीं। अकेले फेसबुक से जुड़े 478 मामले थे। इसके अलावा व्हॉट्सएप के 161, जीमेल के 77, इंस्टाग्राम के 55 तथा ट्विटर के 54 मामले सामने आए थे।

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