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ट्रैक्टर रैली के बाद पल-पल बदलता रहा यूपी गेट का माहौल
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किसान आंदोलन
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ट्रैक्टर रैली निकलने के बाद पल-पल बदलता रहा यूपी गेट का माहौल
साहिबाबाद। एक ओर जहां हजारों की संख्या में किसान बैरियर हटाते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर यूपी गेट पर मौजूद महिला, युुवा व बुजुर्ग किसान रैली की पल-पल की खबर फोन और टीवी के जरिए ले रहे थे। इस दौरान दिल्ली में आगे बढ़ते किसानों के साथ ही माहौल बिगड़ने की खबर यहां लोगों तक पहुंचती तो सभी के चेहरे के भाव बदलते रहे। जब किसान की मौत की सूचना लोगों तक पहुंची तो दिल्ली में आगे बढ़ने की खुशी पल भर में काफूर हो गई । कैंप में मौजूद महिलाएं टीवी पर इस खबर को देख कर काफी आहत हुईं और अपनों के लिए चिंता की लकीरें उनके माथे पर उभर आईं।
तोड़फोड़ और पुलिस द्वारा आंसू गैस छोड़े जाने की सूचना पाते ही महिलाएं परेशान हो उठीं और रैली में शामिल अपनों की खबर के लिए फोन मिलाने लगीं। टीवी पर किसान की मौत की सूचना देखते ही पीलीभीत की बलजीत कौर काफी परेशान हो उठीं और अपना गुस्सा दिल्ली पुलिस पर उतारने लगीं। वहीं लखीमपुर खीरी से आंदोलन में दो दिन पहले ही पहुंचे 70 वर्षीय बाबा मोर सिंह भी पुलिस और सरकार पर बरस पड़े। दिल्ली में बिगड़े माहौल से हर किसी की बेचैनी बढ़ गई लेकिन इस दौरान बहुत से किसानों ने वहां की जिम्मेदारी संभालते हुए सभी से शांति बनाए रखने की अपील की और जीत हमारी होगी की बात कह कर लोगों से धीरज रखने को कहा।
दोपहर 12 बजे : यूपी गेट से लगातार ट्रैक्टर दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे। बिजनौर और बड़ौत से आए करीब 150 की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली की ओर आगे बढ़ते जा रहे थे। इस बीच लंगर के लिए भी लोगों की लाइन लगी रही। जो लोग दूर दराज से आए थे लंगर की लाइन में लगे और खाना खाकर ट्रैक्टर पर सवार हो रहे थे। महिलाएं लगातार लंगर की सेवा में जुटी हुई थी। वहीं, फ्लाईओवर के ऊपर से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ थी। हर कोई इस रैली को अपने मोबाइल में कैद करने की होड़ में था।
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दोपहर 1:30 बजे : यूपी गेट पर बने कैंपों में बुजुर्ग युवा किसान ट्रैक्टर रैली की पल-पल की अपडेट लेते हुए उस पर चर्चा करते दिखे। मंच पर केवल अनशन पर बैठे किसान ही रहे जबकि सामने की दरी खाली रही। लोगों की भीड़ चाय और कॉपी के स्टॉल पर थी या फिर टीवी व मोबाइल में अपडेट खबर देखने के लिए रही। कुछ युवा किसान पंजाबी गीतों पर झूमते-गाते नजर आए वहीं, कुछ किसान यूपी गेट पर फैली गंदगी को साफ कराने में जुटे रहे। किसानों के लिए यूपी गेट पर जुटाए गए सामानों की देेखरेख की जिम्मेदारी भी युवाओं एवं महिलाओं पर थी, जिसके लिए वह लोग लगातार सामान के ईद-गिर्द घूमते नजर आए।
दोपहर 2:15 बजे : आईटीओ में हो रहे हंगामे और तोड़फोड़ की सूचना लोगों तक पहुंच गई थी। इस बीच कुछ ट्रैक्टर आधे रास्ते से वापस यूपी गेट पर पहुंच गए थे, जिन्होंने दिल्ली में हो रही हिंसक घटनाओं की जानकारी यूपी गेट पर पहले से मौजूद किसानों को दी। इसके बाद अधिकतर महिलाएं ट्रैक्टर रैली में शामिल अपने परिवार के पुरुष सदस्यों का फोन लगाने लगीं और फोन पर उनकी खैरियत ली। वहां के हालात जानकार महिलाओं व बुजुर्ग किसानों के चेहरे पर उदासी छा गई।
दोपहर 3 बजे : अब तक यूपी गेट पर लगातार आधे रास्ते से लौटते किसानों के ट्रैक्टरों की लाइन लगने लगी थी। ट्रैक्टर रैली से वापस जैसे ही कोई ट्रैक्टर आता यूपी गेट पर मौजूद किसान दौड़कर उस ट्रैक्टर के पास पहुंचते और रैली की बातों की जानकारी लेते। इस समय तक लगभग सभी लोगों को किसान की मौत और हिंसक घटना की सूचना मिल चुकी थी। लोग लगातार एक दूसरे से चर्चा करते नजर आए।
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साहिबाबाद। एक ओर जहां हजारों की संख्या में किसान बैरियर हटाते हुए दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर यूपी गेट पर मौजूद महिला, युुवा व बुजुर्ग किसान रैली की पल-पल की खबर फोन और टीवी के जरिए ले रहे थे। इस दौरान दिल्ली में आगे बढ़ते किसानों के साथ ही माहौल बिगड़ने की खबर यहां लोगों तक पहुंचती तो सभी के चेहरे के भाव बदलते रहे। जब किसान की मौत की सूचना लोगों तक पहुंची तो दिल्ली में आगे बढ़ने की खुशी पल भर में काफूर हो गई । कैंप में मौजूद महिलाएं टीवी पर इस खबर को देख कर काफी आहत हुईं और अपनों के लिए चिंता की लकीरें उनके माथे पर उभर आईं।
तोड़फोड़ और पुलिस द्वारा आंसू गैस छोड़े जाने की सूचना पाते ही महिलाएं परेशान हो उठीं और रैली में शामिल अपनों की खबर के लिए फोन मिलाने लगीं। टीवी पर किसान की मौत की सूचना देखते ही पीलीभीत की बलजीत कौर काफी परेशान हो उठीं और अपना गुस्सा दिल्ली पुलिस पर उतारने लगीं। वहीं लखीमपुर खीरी से आंदोलन में दो दिन पहले ही पहुंचे 70 वर्षीय बाबा मोर सिंह भी पुलिस और सरकार पर बरस पड़े। दिल्ली में बिगड़े माहौल से हर किसी की बेचैनी बढ़ गई लेकिन इस दौरान बहुत से किसानों ने वहां की जिम्मेदारी संभालते हुए सभी से शांति बनाए रखने की अपील की और जीत हमारी होगी की बात कह कर लोगों से धीरज रखने को कहा।
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दोपहर 12 बजे : यूपी गेट से लगातार ट्रैक्टर दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे। बिजनौर और बड़ौत से आए करीब 150 की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली की ओर आगे बढ़ते जा रहे थे। इस बीच लंगर के लिए भी लोगों की लाइन लगी रही। जो लोग दूर दराज से आए थे लंगर की लाइन में लगे और खाना खाकर ट्रैक्टर पर सवार हो रहे थे। महिलाएं लगातार लंगर की सेवा में जुटी हुई थी। वहीं, फ्लाईओवर के ऊपर से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों की ट्रैक्टर रैली को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ थी। हर कोई इस रैली को अपने मोबाइल में कैद करने की होड़ में था।
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दोपहर 1:30 बजे : यूपी गेट पर बने कैंपों में बुजुर्ग युवा किसान ट्रैक्टर रैली की पल-पल की अपडेट लेते हुए उस पर चर्चा करते दिखे। मंच पर केवल अनशन पर बैठे किसान ही रहे जबकि सामने की दरी खाली रही। लोगों की भीड़ चाय और कॉपी के स्टॉल पर थी या फिर टीवी व मोबाइल में अपडेट खबर देखने के लिए रही। कुछ युवा किसान पंजाबी गीतों पर झूमते-गाते नजर आए वहीं, कुछ किसान यूपी गेट पर फैली गंदगी को साफ कराने में जुटे रहे। किसानों के लिए यूपी गेट पर जुटाए गए सामानों की देेखरेख की जिम्मेदारी भी युवाओं एवं महिलाओं पर थी, जिसके लिए वह लोग लगातार सामान के ईद-गिर्द घूमते नजर आए।
दोपहर 2:15 बजे : आईटीओ में हो रहे हंगामे और तोड़फोड़ की सूचना लोगों तक पहुंच गई थी। इस बीच कुछ ट्रैक्टर आधे रास्ते से वापस यूपी गेट पर पहुंच गए थे, जिन्होंने दिल्ली में हो रही हिंसक घटनाओं की जानकारी यूपी गेट पर पहले से मौजूद किसानों को दी। इसके बाद अधिकतर महिलाएं ट्रैक्टर रैली में शामिल अपने परिवार के पुरुष सदस्यों का फोन लगाने लगीं और फोन पर उनकी खैरियत ली। वहां के हालात जानकार महिलाओं व बुजुर्ग किसानों के चेहरे पर उदासी छा गई।
दोपहर 3 बजे : अब तक यूपी गेट पर लगातार आधे रास्ते से लौटते किसानों के ट्रैक्टरों की लाइन लगने लगी थी। ट्रैक्टर रैली से वापस जैसे ही कोई ट्रैक्टर आता यूपी गेट पर मौजूद किसान दौड़कर उस ट्रैक्टर के पास पहुंचते और रैली की बातों की जानकारी लेते। इस समय तक लगभग सभी लोगों को किसान की मौत और हिंसक घटना की सूचना मिल चुकी थी। लोग लगातार एक दूसरे से चर्चा करते नजर आए।