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कई अफसरों की टेबल से गुजरी फाइल, सवाल साल में नतीजा जीरो
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कई अफसरों की टेबल से गुजरी फाइल, सवा साल में नतीजा जीरो
गाजियाबाद। लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते मुरादनगर श्मशान घाट में हुए हादसे में 24 लोगों को जान गंवानी पड़ी। गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर नगर पालिका ईओ, जेई, सुपरवाइजर व दो ठेकेदारों को जेल भी भेज दिया गया, लेकिन करीब सवा साल पहले ठीक ऐसे ही नंदग्राम सीवर कांड की जांच सवालों के घेरे में है। बिना सेफ्टी किट सीवर लाइन में उतारे पांच मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी। गैर इरादतन हत्या में दर्ज हुए इस केस की फाइल कई अफसरों की टेबल की टेबल से गुजरी, लेकिन सवा साल बाद भी जांच अधूरी है।
22 अगस्त 2019 को नंदग्राम की कृष्णा कुंज कॉलोनी में सीवर लाइन में पांच मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी। उन्हें बिना सुरक्षा साधनों के सीवल लाइन में उतारा गया था। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर ईएमएस इन्फ्राकॉन कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह व मालिक आशीष तोमर, भूमि कंस्ट्रक्शन के मालिक धर्मेंद्र, मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट कंपनी के डायरेक्टर संजय त्यागी, जल निगम के जेई अजमत अली, एई प्रवीण कुमार, एक्सईएन रविंद्र सिंह व एसई कृष्ण मोहन यादव व मुख्य अभियंता ज्ञानेश स्वरुप श्रीवास्तव को आरोपी बनाया था। पुलिस ने इस मामले में कार्यदायी संस्थाओं के दो कर्मचारियों मोनू सिंह निवासी कोलसिनी बुलंदशहर व लक्ष्मण सिंह निवासी आगरा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
शुरुआती जांच में खेल करने पर सीओ के खिलाफ बैठी थी जांच
मामले की जांच तत्कालीन सीओ प्रथम धर्मेंद्र चौहान को सौंपी गई थी। सीओ ने जांच में खेल करते हुए गैर इरादतन हत्या को हादसे में तब्दील कर दिया था। आला अधिकारियों को पता लगा सीओ के खिलाफ जांच बैठा दी गई थी। तत्कालीन आईजी आलोक सिंह ने एएसपी हापुड़ को सीओ की जांच सौंपते हुए सीवर कांड की विवेचना तत्कालीन एसपी ग्रामीण नीरज कुमार जादौन को सौंपी थी।
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एसपी ग्रामीण ने माना गैर इरादतन हत्या
एसपी ग्रामीण ने सीओ सिटी फर्स्ट द्वारा की गई विवेचना को पलटते हुए मजदूरों की मौत को गैर इरादतन हत्या का मामला माना था। उनका कहना था कि कंपनी और संबंधित विभाग के अफसर व कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। मजदूरों द्वारा जो सीवर लाइन जोड़ी जा रही थी, उसकी ठेका लेने वाली कंपनी और संबंधित विभाग के अफसरों को पूरी जानकारी थी। आरोपियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया।
सीओ सेकेंड के पास पहुंची थी फाइल, वहीं अटक गई
तत्कालीन एसपी ग्रामीण ने फरवरी 2020 में मामले की विवेचना करने के बाद विधिक राय के लिए तत्कालीन सीओ सेकेंड आतिश कुमार के पास भेजी थी। कुछ समय बाद उनका तबादला हो गया और वर्तमान में अवनीश कुमार सीओ सेकेंड हैं। अब तक जांच की फाइल ज्यों की त्यों अटकी हुई है। हालांकि, सीओ का कहना है कि सभी पहलुओं पर गहनता से जांच की जा रही है।
एक साल में चार्जशीट भेजी, वह भी आधी अधूरी
सीवर कांड प्रदेशभर में सुर्खियों में रहा था। मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हैरत की बात यह है कि पुलिस ने बीते दिनों इस मामले में चार्जशीट भेजी, लेकिन आधी-अधूरी। शुरूआती दौर में गिरफ्तार किए गए कंपनी कर्मचारियों मोनू व लक्ष्मण के खिलाफ चार्जशीट भेजी गई, जबकि कंपनी के जिम्मेदार लोगों जल निगम के अधिकारियों के खिलाफ विवेचना अभी भी लंबित है। सीओ द्वितीय/जांच अधिकारी, सीवर प्रकरण अवनीश कुमार कहते हैं कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर विवेचना की जा रही है। कंपनी के दो कर्मचारियों के अलावा जल निगम के अवर अभियंता के खिलाफ भी चार्जशीट भेजी जा चुकी है। पांच मजदूरों की मौत के पीछे जल निगम के अन्य अधिकारियों व कंपनी से जुड़े लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ चार्जशीट भेजी जाएगी।
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गाजियाबाद। लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते मुरादनगर श्मशान घाट में हुए हादसे में 24 लोगों को जान गंवानी पड़ी। गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर नगर पालिका ईओ, जेई, सुपरवाइजर व दो ठेकेदारों को जेल भी भेज दिया गया, लेकिन करीब सवा साल पहले ठीक ऐसे ही नंदग्राम सीवर कांड की जांच सवालों के घेरे में है। बिना सेफ्टी किट सीवर लाइन में उतारे पांच मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी। गैर इरादतन हत्या में दर्ज हुए इस केस की फाइल कई अफसरों की टेबल की टेबल से गुजरी, लेकिन सवा साल बाद भी जांच अधूरी है।
22 अगस्त 2019 को नंदग्राम की कृष्णा कुंज कॉलोनी में सीवर लाइन में पांच मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई थी। उन्हें बिना सुरक्षा साधनों के सीवल लाइन में उतारा गया था। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर ईएमएस इन्फ्राकॉन कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह व मालिक आशीष तोमर, भूमि कंस्ट्रक्शन के मालिक धर्मेंद्र, मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट कंपनी के डायरेक्टर संजय त्यागी, जल निगम के जेई अजमत अली, एई प्रवीण कुमार, एक्सईएन रविंद्र सिंह व एसई कृष्ण मोहन यादव व मुख्य अभियंता ज्ञानेश स्वरुप श्रीवास्तव को आरोपी बनाया था। पुलिस ने इस मामले में कार्यदायी संस्थाओं के दो कर्मचारियों मोनू सिंह निवासी कोलसिनी बुलंदशहर व लक्ष्मण सिंह निवासी आगरा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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शुरुआती जांच में खेल करने पर सीओ के खिलाफ बैठी थी जांच
मामले की जांच तत्कालीन सीओ प्रथम धर्मेंद्र चौहान को सौंपी गई थी। सीओ ने जांच में खेल करते हुए गैर इरादतन हत्या को हादसे में तब्दील कर दिया था। आला अधिकारियों को पता लगा सीओ के खिलाफ जांच बैठा दी गई थी। तत्कालीन आईजी आलोक सिंह ने एएसपी हापुड़ को सीओ की जांच सौंपते हुए सीवर कांड की विवेचना तत्कालीन एसपी ग्रामीण नीरज कुमार जादौन को सौंपी थी।
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एसपी ग्रामीण ने माना गैर इरादतन हत्या
एसपी ग्रामीण ने सीओ सिटी फर्स्ट द्वारा की गई विवेचना को पलटते हुए मजदूरों की मौत को गैर इरादतन हत्या का मामला माना था। उनका कहना था कि कंपनी और संबंधित विभाग के अफसर व कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। मजदूरों द्वारा जो सीवर लाइन जोड़ी जा रही थी, उसकी ठेका लेने वाली कंपनी और संबंधित विभाग के अफसरों को पूरी जानकारी थी। आरोपियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया।
सीओ सेकेंड के पास पहुंची थी फाइल, वहीं अटक गई
तत्कालीन एसपी ग्रामीण ने फरवरी 2020 में मामले की विवेचना करने के बाद विधिक राय के लिए तत्कालीन सीओ सेकेंड आतिश कुमार के पास भेजी थी। कुछ समय बाद उनका तबादला हो गया और वर्तमान में अवनीश कुमार सीओ सेकेंड हैं। अब तक जांच की फाइल ज्यों की त्यों अटकी हुई है। हालांकि, सीओ का कहना है कि सभी पहलुओं पर गहनता से जांच की जा रही है।
एक साल में चार्जशीट भेजी, वह भी आधी अधूरी
सीवर कांड प्रदेशभर में सुर्खियों में रहा था। मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हैरत की बात यह है कि पुलिस ने बीते दिनों इस मामले में चार्जशीट भेजी, लेकिन आधी-अधूरी। शुरूआती दौर में गिरफ्तार किए गए कंपनी कर्मचारियों मोनू व लक्ष्मण के खिलाफ चार्जशीट भेजी गई, जबकि कंपनी के जिम्मेदार लोगों जल निगम के अधिकारियों के खिलाफ विवेचना अभी भी लंबित है। सीओ द्वितीय/जांच अधिकारी, सीवर प्रकरण अवनीश कुमार कहते हैं कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर विवेचना की जा रही है। कंपनी के दो कर्मचारियों के अलावा जल निगम के अवर अभियंता के खिलाफ भी चार्जशीट भेजी जा चुकी है। पांच मजदूरों की मौत के पीछे जल निगम के अन्य अधिकारियों व कंपनी से जुड़े लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ चार्जशीट भेजी जाएगी।