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डिजनीलैंड वाटर पार्क में बिना एनओसी चल रहा नलकूप सील
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डिजनीलैंड वाटर पार्क में बिना एनओसी चल रहा नलकूप सील
गाजियाबाद। दिल्ली- मेरठ रोड स्थित डिजनीलैंड वाटर पार्क में बिना एनओसी ट्यूबवेल लगाकर जल दोहन करने का मामला पकड़ा गया है। मौके पर प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम ने नलकूप सील कर दिया।
सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता हरीओम सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था लेकिन जवाब देने के लिए समय मांगा गया था। जवाब देने की मियाद बीतने के बाद औचक निरीक्षण किया गया और एनओसी दिखाने के लिए कहा गया तो पता चला कि एनओसी नहीं है। जिस क्षेत्र में जलदोहन हो रहा था वह क्रिटिकल जोन में आता है। यहां किसी को व्यवसायिक या औद्योगिक जल दोहन की अनुमति नहीं है। कार्यवाही के दौरान नायब तहसीलदार सदर ओमप्रकाश व अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। सिंह ने बताया कि नलकूप में लगे मोटर की क्षमता साढ़े सात हार्स पावर की हो सकती है।
बिना एनओसी के जल दोहन पर दो से पांच लाख के जुर्माने का प्रावधान
अधिशासी अभियंता ने बताया कि बिना एनओसी के जल दोहन करने पर दो से पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा छह महीने तक जेल की भी सजा है। सजा या जुर्माना पर फैसला करने का अधिकार भूजल प्रबंधन कौंसिल के पास है। यह मामला कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। फिलहाल बोरवेल को सील कर दिया गया है।
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गाजियाबाद। दिल्ली- मेरठ रोड स्थित डिजनीलैंड वाटर पार्क में बिना एनओसी ट्यूबवेल लगाकर जल दोहन करने का मामला पकड़ा गया है। मौके पर प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम ने नलकूप सील कर दिया।
सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता हरीओम सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था लेकिन जवाब देने के लिए समय मांगा गया था। जवाब देने की मियाद बीतने के बाद औचक निरीक्षण किया गया और एनओसी दिखाने के लिए कहा गया तो पता चला कि एनओसी नहीं है। जिस क्षेत्र में जलदोहन हो रहा था वह क्रिटिकल जोन में आता है। यहां किसी को व्यवसायिक या औद्योगिक जल दोहन की अनुमति नहीं है। कार्यवाही के दौरान नायब तहसीलदार सदर ओमप्रकाश व अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। सिंह ने बताया कि नलकूप में लगे मोटर की क्षमता साढ़े सात हार्स पावर की हो सकती है।
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बिना एनओसी के जल दोहन पर दो से पांच लाख के जुर्माने का प्रावधान
अधिशासी अभियंता ने बताया कि बिना एनओसी के जल दोहन करने पर दो से पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा छह महीने तक जेल की भी सजा है। सजा या जुर्माना पर फैसला करने का अधिकार भूजल प्रबंधन कौंसिल के पास है। यह मामला कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। फिलहाल बोरवेल को सील कर दिया गया है।
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