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कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज पर लगेगा ताला, नए सत्र में दाखिले किए गए बंद
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कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज पर लगेगा ताला, नए सत्र में दाखिले किए गए बंद
गाजियाबाद। डेढ़ हजार से ज्यादा छात्रों वाले कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज को भी प्रबंधन ने बंद करने का फैसला ले लिया है। इसके लिए 2022-2023 के सत्र को शून्य घोषित कर दिया गया है। इसमें किसी भी पाठ्यक्रम में कोई दाखिला नहीं होगा। दाखिलों में आई गिरावट और वित्तीय घाटे का हवाला देकर प्रबंधन ने घोषणा की है कि 2004 में मोहन नगर में खुले इस कॉलेज को अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई पूरी होते ही 2025 में पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दो महीने के भीतर कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से जुड़े तीन कॉलेजों में से यह दूसरा कॉलेज है जिसे बंद करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले साहिबाबाद स्थित इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज को दो जून को बंद करने की घोषणा की जा चुकी है। इसमें 2000 से ज्यादा छात्र हैं।
कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्तमान में बीटेक कंप्यूटर साइंस, बीटेक सीएस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, बीटेक सीएस एआई व मशीन लर्निंग, बीटेक इंर्फोमेशन तकनीक के साथ एमसीए पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इससे पहले कॉलेज में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल सहित कई कोर ब्रांच की पढ़ाई होती थी। कॉलेज में वर्तमान में 1550 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अंतिम वर्ष के छात्रों के पास होने और प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं होने से कॉलेज में दूसरे से चौथे साल के विद्यार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1100 रह जाएगी।
आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस, डाटा साइंस ब्रांच की ली थी मान्यता
मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल ब्रांच में विद्यार्थियों का रुझान घटने का हवाला देते हुए कॉलेज प्रबंधन ने कई कोर ब्रांच को बंद कर दिया था। साथ ही पिछले दो सालों में सीएस आईटी के अलावा आईर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निंग नई ब्रांच शुरू हुई हैं। सीएस आईटी के अलावा इन नई ब्रांच में प्रवेश के लिए अधिक रुझान देखा जा रहा था। ऐसे में नई ब्रांच शुरू करने के बाद एकाएक कॉलेज बंद करने के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं।
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मजबूरी में लेना पड़ा निर्णय
कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक एडमिन मनोज गोयल का कहना है कि कॉलेज में सालाना दाखिलों की संख्या घटकर 300 के करीब रह गई। ऐसे में वित्तीय स्तर पर हो रहे नुकसान से बचने के लिए दूसरा विकल्प नहीं बचा था। कॉलेज बंद करने का निर्णय लेना बेहद कठिन है। ऐसे में नवीन सत्र में कोई दाखिला नहीं किया जाएगा।
सात सालों में छह कॉलेज हुए बंद
- इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, साहिबाबाद
- केएनजीडी इंस्टीट्यूट, मोदीनगर
- आरसीसीवी टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गुलधर
- डीजे इंजीनियरिंग कॉलेज, मुरादनगर
- ट्राइडेंट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुहाई
- एडवांस इंस्टीट्यूट, एनएच-9
दो कॉलेज बंद, तीसरे में प्रवेश के लिए मारामारी
कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तीन कॉलेज हैं। दो को बंद करने का निर्णय लिया गया है। ये हैं इंद्रप्रस्थ और कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज जबकि तीसरे कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (काइट) में प्रवेश के लिए मारामारी है। सवाल यह उठ रहा है कि एक ही प्रबंधन के होते हुए एक कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र आ रहे हैं तो अन्य दो में क्यों नहीं आ रहे?
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गाजियाबाद। डेढ़ हजार से ज्यादा छात्रों वाले कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज को भी प्रबंधन ने बंद करने का फैसला ले लिया है। इसके लिए 2022-2023 के सत्र को शून्य घोषित कर दिया गया है। इसमें किसी भी पाठ्यक्रम में कोई दाखिला नहीं होगा। दाखिलों में आई गिरावट और वित्तीय घाटे का हवाला देकर प्रबंधन ने घोषणा की है कि 2004 में मोहन नगर में खुले इस कॉलेज को अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई पूरी होते ही 2025 में पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दो महीने के भीतर कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से जुड़े तीन कॉलेजों में से यह दूसरा कॉलेज है जिसे बंद करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले साहिबाबाद स्थित इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज को दो जून को बंद करने की घोषणा की जा चुकी है। इसमें 2000 से ज्यादा छात्र हैं।
कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्तमान में बीटेक कंप्यूटर साइंस, बीटेक सीएस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, बीटेक सीएस एआई व मशीन लर्निंग, बीटेक इंर्फोमेशन तकनीक के साथ एमसीए पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इससे पहले कॉलेज में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल सहित कई कोर ब्रांच की पढ़ाई होती थी। कॉलेज में वर्तमान में 1550 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अंतिम वर्ष के छात्रों के पास होने और प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं होने से कॉलेज में दूसरे से चौथे साल के विद्यार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1100 रह जाएगी।
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आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस, डाटा साइंस ब्रांच की ली थी मान्यता
मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल ब्रांच में विद्यार्थियों का रुझान घटने का हवाला देते हुए कॉलेज प्रबंधन ने कई कोर ब्रांच को बंद कर दिया था। साथ ही पिछले दो सालों में सीएस आईटी के अलावा आईर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निंग नई ब्रांच शुरू हुई हैं। सीएस आईटी के अलावा इन नई ब्रांच में प्रवेश के लिए अधिक रुझान देखा जा रहा था। ऐसे में नई ब्रांच शुरू करने के बाद एकाएक कॉलेज बंद करने के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं।
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मजबूरी में लेना पड़ा निर्णय
कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के निदेशक एडमिन मनोज गोयल का कहना है कि कॉलेज में सालाना दाखिलों की संख्या घटकर 300 के करीब रह गई। ऐसे में वित्तीय स्तर पर हो रहे नुकसान से बचने के लिए दूसरा विकल्प नहीं बचा था। कॉलेज बंद करने का निर्णय लेना बेहद कठिन है। ऐसे में नवीन सत्र में कोई दाखिला नहीं किया जाएगा।
सात सालों में छह कॉलेज हुए बंद
- इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, साहिबाबाद
- केएनजीडी इंस्टीट्यूट, मोदीनगर
- आरसीसीवी टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गुलधर
- डीजे इंजीनियरिंग कॉलेज, मुरादनगर
- ट्राइडेंट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुहाई
- एडवांस इंस्टीट्यूट, एनएच-9
दो कॉलेज बंद, तीसरे में प्रवेश के लिए मारामारी
कृष्णा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तीन कॉलेज हैं। दो को बंद करने का निर्णय लिया गया है। ये हैं इंद्रप्रस्थ और कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज जबकि तीसरे कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (काइट) में प्रवेश के लिए मारामारी है। सवाल यह उठ रहा है कि एक ही प्रबंधन के होते हुए एक कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र आ रहे हैं तो अन्य दो में क्यों नहीं आ रहे?