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10 साल में बढ़े 2.25 लाख मकान मालिक, अब देना होगा गृहकर
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10 साल में बढ़े 2.25 लाख मकान मालिक, अब देना होगा गृहकर
गाजियाबाद। नगर निगम सीमा क्षेत्र में बीते 10 साल में 2.25 लाख मकान मालिक बढ़ गए। शहर के विस्तार के बाद विकसित हुई राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग सिटी समेत कई अन्य कॉलोनियों में इन मकानों की संख्या बढ़ी है। नगर निगम की ओर से कराए गए जीआईएस सर्वे के दौरान इसका खुलासा हुआ है। निगम के संपत्ति विभाग की ओर से इन भवनों को भी गृहकर के दायरे में लाया गया है। इन भवन मालिकों को वर्तमान वित्तीय वर्ष से गृहकर चुकाना होगा।
नगर निगम की ओर से कराया गया जीआईएस सर्वे करीब तीन साल चला। इस दौरान भवनों की सेटेलाइट इमेज ली गई और फिर भौतिक सत्यापन कर इनकी पैमाइश ली गई। जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट में चिह्नित किए गए भवनों का नगर निगम के रिकॉर्ड में मौजूद संपत्तियों से मिलान कराया गया। इस दौरान 2.25 लाख भवन ऐसे मिले, जिनका रिकार्ड नगर निगम में नहीं था। इन भवनों पर पहले गृहकर निर्धारण नहीं किया गया था।
ग्रामीण वार्डों के 110 मोहल्लों में सबसे ज्यादा 1.38 लाख भवन चयनित
राजनगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग सिटी में भवनों की संख्या ग्रामीण वार्डों की अपेक्षा ज्यादा हैं, लेकिन इनमें रहने वाले लोग खुद भी अपने मकानों पर गृहकर निर्धारण कराकर टैक्स जमा करा रहे हैं। ग्रामीण परिवेश के वार्डों के 110 मोहल्ले ऐसे हैं जिनमें सबसे ज्यादा ऐसे मकान मिले हैं जिनसे पूर्व में कभी गृहकर वसूला ही नहीं गया। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक इन 110 मोहल्लों में कुल 155936 मकान चिह्नित किए गए, इनमें 138436 मकानों पर पहले कभी भी टैक्स नहीं लगाया गया है।
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इन मोहल्लों में पहली बार टैक्स देने वाले भवन ज्यादा
मोरटा, महरौली, शाहपुर बम्हेटा, बागू-क्रिश्चयन नगर, राहुल विहार, माता कॉलोनी, बिहारी पुरा, डूंडाहेड़ा, शहीदनगर, संजय कॉलोनी, नायफल, बयाना, गढ़ी सिकरोड़, गुलधर, सदरपुर, दुहाई आदि।
शहरी परिवेश के वार्डों में भी मिले नए भवन
नगर निगम के जीआईएस सर्वे में शहरी परिवेश में भी ऐसे भवन मिले हैं जिन पर पहले टैक्स नहीं लगाया गया था, लेकिन इनकी संख्या कम है। इन वार्डों में 231106 भवन चिह्नित हुए हैं, इनमें से करीब 1.02 भवन नए हैं। बाकी अन्य भवनों का ब्यौरा अपडेट किया गया है।
नगर निगम के 100 वार्डों में जीआईएस सर्वे पूरा हो गया है। इसकी फाइनल रिपोर्ट तैयार हो गई है। अब गृहकर के दायरे में आई संपत्तियों की संख्या बढ़कर 637956 हो गई है। सर्वे से पूर्व यह संख्या करीब 4.13 लाख थी। इससे निगम की आमदनी में इजाफा होगा।
- डॉ संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
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गाजियाबाद। नगर निगम सीमा क्षेत्र में बीते 10 साल में 2.25 लाख मकान मालिक बढ़ गए। शहर के विस्तार के बाद विकसित हुई राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग सिटी समेत कई अन्य कॉलोनियों में इन मकानों की संख्या बढ़ी है। नगर निगम की ओर से कराए गए जीआईएस सर्वे के दौरान इसका खुलासा हुआ है। निगम के संपत्ति विभाग की ओर से इन भवनों को भी गृहकर के दायरे में लाया गया है। इन भवन मालिकों को वर्तमान वित्तीय वर्ष से गृहकर चुकाना होगा।
नगर निगम की ओर से कराया गया जीआईएस सर्वे करीब तीन साल चला। इस दौरान भवनों की सेटेलाइट इमेज ली गई और फिर भौतिक सत्यापन कर इनकी पैमाइश ली गई। जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट में चिह्नित किए गए भवनों का नगर निगम के रिकॉर्ड में मौजूद संपत्तियों से मिलान कराया गया। इस दौरान 2.25 लाख भवन ऐसे मिले, जिनका रिकार्ड नगर निगम में नहीं था। इन भवनों पर पहले गृहकर निर्धारण नहीं किया गया था।
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ग्रामीण वार्डों के 110 मोहल्लों में सबसे ज्यादा 1.38 लाख भवन चयनित
राजनगर एक्सटेंशन और क्रॉसिंग सिटी में भवनों की संख्या ग्रामीण वार्डों की अपेक्षा ज्यादा हैं, लेकिन इनमें रहने वाले लोग खुद भी अपने मकानों पर गृहकर निर्धारण कराकर टैक्स जमा करा रहे हैं। ग्रामीण परिवेश के वार्डों के 110 मोहल्ले ऐसे हैं जिनमें सबसे ज्यादा ऐसे मकान मिले हैं जिनसे पूर्व में कभी गृहकर वसूला ही नहीं गया। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक इन 110 मोहल्लों में कुल 155936 मकान चिह्नित किए गए, इनमें 138436 मकानों पर पहले कभी भी टैक्स नहीं लगाया गया है।
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इन मोहल्लों में पहली बार टैक्स देने वाले भवन ज्यादा
मोरटा, महरौली, शाहपुर बम्हेटा, बागू-क्रिश्चयन नगर, राहुल विहार, माता कॉलोनी, बिहारी पुरा, डूंडाहेड़ा, शहीदनगर, संजय कॉलोनी, नायफल, बयाना, गढ़ी सिकरोड़, गुलधर, सदरपुर, दुहाई आदि।
शहरी परिवेश के वार्डों में भी मिले नए भवन
नगर निगम के जीआईएस सर्वे में शहरी परिवेश में भी ऐसे भवन मिले हैं जिन पर पहले टैक्स नहीं लगाया गया था, लेकिन इनकी संख्या कम है। इन वार्डों में 231106 भवन चिह्नित हुए हैं, इनमें से करीब 1.02 भवन नए हैं। बाकी अन्य भवनों का ब्यौरा अपडेट किया गया है।
नगर निगम के 100 वार्डों में जीआईएस सर्वे पूरा हो गया है। इसकी फाइनल रिपोर्ट तैयार हो गई है। अब गृहकर के दायरे में आई संपत्तियों की संख्या बढ़कर 637956 हो गई है। सर्वे से पूर्व यह संख्या करीब 4.13 लाख थी। इससे निगम की आमदनी में इजाफा होगा।
- डॉ संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी