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दो लाख भवन मालिकों को अब देना होगा ज्यादा गृहकर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 01:06 AM IST
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दो लाख भवन मालिकों को अब देना होगा ज्यादा गृहकर
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गाजियाबाद। मकानों का विस्तार कर बदलाव करने वाले शहर के दो लाख भवन मालिकों को अब बीते साल से ज्यादा गृहकर देना होगा। नगर निगम ने जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) सर्वे में ऐसे आवासीय और व्यावसायिक भवनों को चिह्नित किया है, जिन्होंने भवनों में 25 से लेकर 100 फीसदी तक बदलाव कर विस्तार किया है। इन भवनों पर अब नई पैमाइश के हिसाब से गृहकर वसूला जाएगा। नगर निगम ने इन भवन मालिकों को बढ़े कर के बिल भेजने शुरू कर दिए हैं।
दरअसल, नगर निगम में गृहकर निर्धारण के लिए स्वकर निर्धारण प्रणाली (सेल्फ असेसमेंट) लागू है। इसके तहत आवासीय भवनों के मालिकों को अपने घरों की पैमाइश की जानकारी एक फार्म पर भरकर नगर निगम के संपत्ति कर विभाग में जमा करना होता है। निगम के अधिकारी इन भवनों की पैमाइश नहीं करते और भवन मालिक की सूचना के आधार पर ही गृहकर का निर्धारण कर देते हैं। करीब 15 साल से नगर निगम स्तर पर कोई सर्वे कराकर भवनों की पैमाइश का सत्यापन भी नहीं कराया गया है, जबकि इन 15 साल में बड़े स्तर पर मकानों का विस्तार हुआ है। अब शासन के निर्देश पर नगर निगम ने जीआईएस सर्वे कराया तो भवनों में किया गया बदलाव पकड़ में आया है। नगर निगम अधिकारी भवनों के विस्तार के अनुपात में ही उन पर बढ़े गृहकर का निर्धारण करेंगे।
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तीन श्रेणी में बांटे बदलाव वाले भवन
नगर निगम ने पैमाइश में बदलाव वाले इन भवनों को तीन श्रेणी में बांटा है। पहली श्रेणी में ऐसे भवनों को रखा गया है जिनमें 25 फीसदी तक बदलाव आया है, दूसरी श्रेणी में 25 से 50 फीसदी तक विस्तार वाले और तीसरी श्रेणी में 50 फीसदी से ज्यादा विस्तार वाले भवनों को शामिल किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने अब नई पैमाइश के आधार पर इन भवनों पर गृहकर लगाकर डिमांड नोटिस भेजे हैं। उन्होंने इन भवन मालिकों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है और इसके लिए बिल मिलने के बाद 30 दिन की मोहलत दी गई है।
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मकानों और व्यावसायिक भवनों में बदलाव करने वालों का आंकड़ा
भवनों में बदलाव आवासीय अनावासीय भवन मिश्रित भवन
25 फीसदी 86245 4740 1452
25 से 50 फीसदी 35596 1094 577
50 फीसदी से ज्यादा 70240 7411 7652
आमदनी बढ़ाने का गाजियाबाद का फार्मूला सभी नगर निगमों में लागू होगा
बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए नगर निगम का यह आमदनी बढ़ाने का फार्मूला नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी पसंद आया। बीते शनिवार को उन्होंने लखनऊ में सभी नगर निगमों के मुख्य कर निर्धारण अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सभी नगर आयुक्त वर्चुअल माध्यम से जुड़े हुए थे। गाजियाबाद नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार सिन्हा से उन्होंने आमदनी बढ़ाने के लिए किए गए प्रयास की जानकारी तो उन्होंने कर और विज्ञापन से बढ़ी आमदनी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस विज्ञापन की मद में पहले 1.5 से 2 करोड़ रुपये सालाना मिलते थे, उसी मद में अब 15 करोड़ रुपये मिले हैं। इस पर उन्होंने न सिर्फ सराहना की, बल्कि मुख्य कर निर्धारण को निर्देश दिए कि एक सप्ताह में इसकी डिटेल स्थानीय निकाय निदेशक नेहा शर्मा को बनाकर भेज दें। उन्होंने निदेशक को इस फार्मूले को सभी नगर निगमों में लागू कराने के निर्देश दिए।

सालाना 100 करोड़ ज्यादा होगी आमदनी
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा का कहना है कि जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर गृहकर निर्धारण कर दिया गया है। इसमें विस्तार करने वाले भवनों के साथ-साथ नए भवनों को भी चिह्नित किया गया है। नए सर्वे के हिसाब से कर वसूली हुई तो नगर निगम को सालाना करीब 100 करोड़ रुपये ज्यादा की आमदनी होगी।
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