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महापंचायत में किसानों का एलान, नहीं होने देंगे जीडीए का काम
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महापंचायत में किसानों का एलान, नहीं होने देंगे जीडीए का काम
गाजियाबाद। बढ़े मुआवजे की मांग के साथ सालों से धरने पर बैठे किसानों का सब्र टूटता जा रहा है। रविवार को सदरपुर गांव के स्कूल परिसर में छह गांवों के 100 से अधिक किसानों ने महापंचायत कर जीडीए की मधुबन बापूधाम योजना में चल रहे विकास के काम को रोकने का एलान कर दिया है।
किसानों का कहना है कि जीडीए ने मधुबन बापूधाम योजना को विकसित करने के लिए 2004 से 2008 के बीच छह गांवों की 1200 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें आठ सौ एकड़ जमीन के किसानों ने मुआवजा नहीं लिया था। किसान गौरी शंकर का कहना है कि किसानों को 1100 रुपये मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया गया था। इसका किसानों ने विरोध किया तो विकास प्राधिकरण ने किसानों को आश्वस्त किया कि योजना में दाम बढ़ने के साथ ही मुआवजा भी बढ़ा दिया जाएगा। 281 एकड़ जमीन के किसान कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद काफी किसानों को 6000 से लेकर 12 हजार रुपये मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया गया है लेकिन अभी 800 एकड़ के किसानों को बढ़े मुआवजे का लाभ नहीं मिला है। किसान बोस चौधरी को कहना है कि जीडीए यदि जल्द ही किसानों को बढ़ा मुआवजा कोर्ट के आदेशानुसार नहीं देता है तो वह और अन्य किसान काम रोक देंगे।
इन गांवों की जमीन का हुआ अधिग्रहण
रईशपुर, याकूतपुर, दुहाई, मैनापुर, मोरटा, सदरपुर गांव की जमीन का अधिग्रहण विकास प्राधिकरण ने किया है। किसान तेजवीर ने बताया कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट में किसानों ने बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर केस किया था। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देकर किसानों को मुआवजा देेने को कहा था।
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ये किसान रहे मौजूद
महापंचायत में बोस चौधरी, सुदीप शर्मा, ब्रहचारी शर्मा, आशु, सुनील सेहरावत समेत काफी संख्या में अन्य किसान मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे।
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गाजियाबाद। बढ़े मुआवजे की मांग के साथ सालों से धरने पर बैठे किसानों का सब्र टूटता जा रहा है। रविवार को सदरपुर गांव के स्कूल परिसर में छह गांवों के 100 से अधिक किसानों ने महापंचायत कर जीडीए की मधुबन बापूधाम योजना में चल रहे विकास के काम को रोकने का एलान कर दिया है।
किसानों का कहना है कि जीडीए ने मधुबन बापूधाम योजना को विकसित करने के लिए 2004 से 2008 के बीच छह गांवों की 1200 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें आठ सौ एकड़ जमीन के किसानों ने मुआवजा नहीं लिया था। किसान गौरी शंकर का कहना है कि किसानों को 1100 रुपये मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया गया था। इसका किसानों ने विरोध किया तो विकास प्राधिकरण ने किसानों को आश्वस्त किया कि योजना में दाम बढ़ने के साथ ही मुआवजा भी बढ़ा दिया जाएगा। 281 एकड़ जमीन के किसान कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद काफी किसानों को 6000 से लेकर 12 हजार रुपये मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया गया है लेकिन अभी 800 एकड़ के किसानों को बढ़े मुआवजे का लाभ नहीं मिला है। किसान बोस चौधरी को कहना है कि जीडीए यदि जल्द ही किसानों को बढ़ा मुआवजा कोर्ट के आदेशानुसार नहीं देता है तो वह और अन्य किसान काम रोक देंगे।
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इन गांवों की जमीन का हुआ अधिग्रहण
रईशपुर, याकूतपुर, दुहाई, मैनापुर, मोरटा, सदरपुर गांव की जमीन का अधिग्रहण विकास प्राधिकरण ने किया है। किसान तेजवीर ने बताया कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट में किसानों ने बढ़े मुआवजे की मांग को लेकर केस किया था। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देकर किसानों को मुआवजा देेने को कहा था।
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ये किसान रहे मौजूद
महापंचायत में बोस चौधरी, सुदीप शर्मा, ब्रहचारी शर्मा, आशु, सुनील सेहरावत समेत काफी संख्या में अन्य किसान मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे।