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जमीन न मिलने से हाथ से निकला 1000 करोड़ का निवेश
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जमीन न मिलने से हाथ से निकला 1000 करोड़ का निवेश
गाजियाबाद। उद्योग नगरी के रूप में पहचान बना रहे गाजियाबाद में जमीन की कमी हो जाने से निवेश की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। 27 हजार औद्योगिक इकाइयों वाले जिले में एक हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव देने वाले दिल्ली, पंजाब, फरीदाबाद, गुरुग्राम के 250 उद्यमियों को जिला उद्योग केंद्र के अफसर अब मजबूरी में दूसरे जिलों में जमीन तलाशने के सुझाव दे रहे हैं। जमीन की इस कमी से पहले से चल रहे उद्योगों का विस्तार भी मुश्किल हो गया है।
तीन जून को लखनऊ में पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई इनवेस्टर समिट में गाजियाबाद में 3550 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ हुआ, जबकि प्रस्ताव 4550 करोड़ रुपये के आए थे लेकिन इन सभी के लिए जमीन उपलब्ध नहीं थी। शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) से जानकारी कराई तो इसका पता चला। जमीन न मिलने से निराश 250 निवेशकों ने केंद्र के अफसरों से संपर्क किया तो उन्हें दूसरे जिलों में निवेश करने की सलाह दी गई। किसी से कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे के पास में जमीन खाली है, वहां देख लो तो किसी को बागपत भेज दिया गया। गाजियाबाद में यूपीएसआईडीए के पास मोदीनगर के भोजपुर ब्लॉक और जिंदल नगर में कुछ ही जमीन बची है।
टेक्सटाइल पार्क का भी था प्रस्ताव
निवेश के लिए दिए गए प्रस्तावों में चार टेक्सटाइल पार्क बनाने के थे। इनके लिए काफी जमीन चाहिए थी जो नहीं मिली। 80 निवेशकों ने अपने प्रोजेक्ट के लिए चार से पांच हजार वर्ग मीटर जमीन मांगी थी। यह भी नहीं मिली। इसी तरह 250 प्रस्ताव वापस कर दिए गए।
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उद्योगों के लिए पानी का भी संकट
गाजियाबाद में उद्योगों के लिए पानी का भी बड़ा संकट है। इसे देखते हुए उद्योगों को अलग से पानी देने के लिए दो साल पहले प्रदेश स्तर पर प्रस्ताव बनाया गया था। नगर निगम ने यह प्रस्ताव रखा भी लेकिन उस योजना को आगे नहीं बढ़ा पाया।
सिर्फ 100 भूखंड ही बचे
यूपीएसआईडीए के पास जिले के 10 औद्योगिक क्षेत्रों में पांच हजार भूखंड हैं। इनमें से 4900 पर उद्योग लग चुके हैं। सिर्फ 100 भूखंड बचे हैं। ये भी पहले आवंटित हो चुके हैं। उद्योग न लगने या विवाद होने के कारण इनका आवंटन निरस्त हुआ तो ये खाली की श्रेणी में आए। एक दशक से ज्यादा समय से कोई नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हुआ है। न ही लैंडबैंक तैयार हुआ है।
बयान
गाजियाबाद के लिए जो प्रस्ताव आए थे, उनको यमुना एक्सप्रेसवे और बागपत में जमीन की जानकारी दी गई है। हमारा प्रयास था कि यह निवेश यूपी से बाहर ना जाए। प्रयास किया जा रहा है कि यूपीसीडा के बंद हो चुके उद्योगों की जगह नए शुरू किए जाएं और बड़े प्लांट की जगह छोटी यूनिट लगाई जाएं जिसमें जमीन कम लगे। - वीरेंद्र सिंह, संयुक्त आयुक्त, जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र
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गाजियाबाद। उद्योग नगरी के रूप में पहचान बना रहे गाजियाबाद में जमीन की कमी हो जाने से निवेश की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। 27 हजार औद्योगिक इकाइयों वाले जिले में एक हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव देने वाले दिल्ली, पंजाब, फरीदाबाद, गुरुग्राम के 250 उद्यमियों को जिला उद्योग केंद्र के अफसर अब मजबूरी में दूसरे जिलों में जमीन तलाशने के सुझाव दे रहे हैं। जमीन की इस कमी से पहले से चल रहे उद्योगों का विस्तार भी मुश्किल हो गया है।
तीन जून को लखनऊ में पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई इनवेस्टर समिट में गाजियाबाद में 3550 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ हुआ, जबकि प्रस्ताव 4550 करोड़ रुपये के आए थे लेकिन इन सभी के लिए जमीन उपलब्ध नहीं थी। शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) से जानकारी कराई तो इसका पता चला। जमीन न मिलने से निराश 250 निवेशकों ने केंद्र के अफसरों से संपर्क किया तो उन्हें दूसरे जिलों में निवेश करने की सलाह दी गई। किसी से कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे के पास में जमीन खाली है, वहां देख लो तो किसी को बागपत भेज दिया गया। गाजियाबाद में यूपीएसआईडीए के पास मोदीनगर के भोजपुर ब्लॉक और जिंदल नगर में कुछ ही जमीन बची है।
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टेक्सटाइल पार्क का भी था प्रस्ताव
निवेश के लिए दिए गए प्रस्तावों में चार टेक्सटाइल पार्क बनाने के थे। इनके लिए काफी जमीन चाहिए थी जो नहीं मिली। 80 निवेशकों ने अपने प्रोजेक्ट के लिए चार से पांच हजार वर्ग मीटर जमीन मांगी थी। यह भी नहीं मिली। इसी तरह 250 प्रस्ताव वापस कर दिए गए।
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उद्योगों के लिए पानी का भी संकट
गाजियाबाद में उद्योगों के लिए पानी का भी बड़ा संकट है। इसे देखते हुए उद्योगों को अलग से पानी देने के लिए दो साल पहले प्रदेश स्तर पर प्रस्ताव बनाया गया था। नगर निगम ने यह प्रस्ताव रखा भी लेकिन उस योजना को आगे नहीं बढ़ा पाया।
सिर्फ 100 भूखंड ही बचे
यूपीएसआईडीए के पास जिले के 10 औद्योगिक क्षेत्रों में पांच हजार भूखंड हैं। इनमें से 4900 पर उद्योग लग चुके हैं। सिर्फ 100 भूखंड बचे हैं। ये भी पहले आवंटित हो चुके हैं। उद्योग न लगने या विवाद होने के कारण इनका आवंटन निरस्त हुआ तो ये खाली की श्रेणी में आए। एक दशक से ज्यादा समय से कोई नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हुआ है। न ही लैंडबैंक तैयार हुआ है।
बयान
गाजियाबाद के लिए जो प्रस्ताव आए थे, उनको यमुना एक्सप्रेसवे और बागपत में जमीन की जानकारी दी गई है। हमारा प्रयास था कि यह निवेश यूपी से बाहर ना जाए। प्रयास किया जा रहा है कि यूपीसीडा के बंद हो चुके उद्योगों की जगह नए शुरू किए जाएं और बड़े प्लांट की जगह छोटी यूनिट लगाई जाएं जिसमें जमीन कम लगे। - वीरेंद्र सिंह, संयुक्त आयुक्त, जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र