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दो घंटे की बारिश के दो दिन बाद भी पानी सड़कों पर जमा
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दो घंटे की बारिश के दो दिन बाद भी पानी सड़कों पर जमा
गाजियाबाद। नगर निगम में शहर में जगह-जगह गजब गाजियाबाद के होर्डिंग तो लगा दिए लेकिन शहर को गजब बनाने के लिए जो इंतजाम किए जाने चाहिए थे, वे नहीं किए। हकीकत यह है कि अगर थोड़ी देर भी बारिश हो जाए तो पानी बहुत देर तक सड़कों पर जमा रहता है। रविवार को हुई दो घंटे की बारिश के दो दिन बाद भी महरौली में सड़कें जलमग्न हैं। लोग गंदे पानी से होकर गुजरने पर मजबूर हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही हैं। वे ईंटों पर पैर रखकर पानी को पार कर रहे हैं। इस दौरान कई गिर भी जा रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम का कोई अधिकारी यहां झांकने तक नहीं आया है। यह हाल तब है जबकि अफसर जानते हैं कि हर बारिश में महरौली को यह मुसीबत झेलनी पड़ती है। पंपिंग सेट न लगवाया जाए तो पानी नहीं निकलता। पिछले मानसून में नालियों का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया था। लोगों का कहना है कि अभी तो थोड़ी सी बारिश हुई है, वह भी सिर्फ एक दिन, मानसून में क्या हाल होगा। कारण, यह है कि यहां जल निकासी के लिए छोटी नालियां तो हैं, लेकिन नाला नहीं है। बारिश का पानी तालाब में जाता है। यह भर जाए तो फिर सड़कों पर जमा हो जाता है।
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गाजियाबाद। नगर निगम में शहर में जगह-जगह गजब गाजियाबाद के होर्डिंग तो लगा दिए लेकिन शहर को गजब बनाने के लिए जो इंतजाम किए जाने चाहिए थे, वे नहीं किए। हकीकत यह है कि अगर थोड़ी देर भी बारिश हो जाए तो पानी बहुत देर तक सड़कों पर जमा रहता है। रविवार को हुई दो घंटे की बारिश के दो दिन बाद भी महरौली में सड़कें जलमग्न हैं। लोग गंदे पानी से होकर गुजरने पर मजबूर हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही हैं। वे ईंटों पर पैर रखकर पानी को पार कर रहे हैं। इस दौरान कई गिर भी जा रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम का कोई अधिकारी यहां झांकने तक नहीं आया है। यह हाल तब है जबकि अफसर जानते हैं कि हर बारिश में महरौली को यह मुसीबत झेलनी पड़ती है। पंपिंग सेट न लगवाया जाए तो पानी नहीं निकलता। पिछले मानसून में नालियों का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया था। लोगों का कहना है कि अभी तो थोड़ी सी बारिश हुई है, वह भी सिर्फ एक दिन, मानसून में क्या हाल होगा। कारण, यह है कि यहां जल निकासी के लिए छोटी नालियां तो हैं, लेकिन नाला नहीं है। बारिश का पानी तालाब में जाता है। यह भर जाए तो फिर सड़कों पर जमा हो जाता है।
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