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डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन गांवों में नहीं हो रहा सफल
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डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन गांवों में नहीं हो रहा सफल
गाजियाबाद। शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना शुरु की गई है लेकिन गांवों में यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। जिले में 205 गांव हैं जिसमें से महज एक गांव में इसको लागू किया जा सका है। विभाग फिर पहले चरण में 30 गांवों से इस योजना को लागू करने का प्रयास कर रहा है।
रजापुर ब्लॉक का भोवापुर गांव में घर से कूड़ा उठाने की योजना सफल हो पा रही है और गांव वाले इसका शुल्क जमा कर रहे हैं। बाकी किसी गांव में यह योजना सफल नहीं हो पाई है। कूड़ा निस्तारण के लिए 30 रुपये प्रति परिवार शुल्क निर्धारित किया गया था। इस योजना को ग्राम्य विकास विभाग और पंचायती राज विभाग ने लगभग तीन-चार साल पहले सभी ग्राम पंचायतों में पूर्ण रुप से लागू कर दिया था लेकिन शुल्क नहीं मिलने के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिवों को दी गई थी लेकिन गांवों के ज्यादातर लोगों ने शुल्क देने से साफ इनकार कर दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि शासन से यह पूर्ण रूप से लागू करने का कोई आदेश नहीं आया है किसी पर सख्ती भी नहीं की जा सकती है इसलिए इस योजना को पूर्ण रुप से लागू करने में समस्या आ रही है। इस योजना पर लाखों खर्च होते हैं लेकिन गांवों से इसकी वसूली नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि 30 गांवों को ओडीएफ प्लस योजना में शामिल किया गया है, जिसमें इस योजना को दोबारा से लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। आदर्श गांव बनाने के लिए इन गांवों में सभी सुविधाएं जरूरी होंगी।
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गाजियाबाद। शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना शुरु की गई है लेकिन गांवों में यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। जिले में 205 गांव हैं जिसमें से महज एक गांव में इसको लागू किया जा सका है। विभाग फिर पहले चरण में 30 गांवों से इस योजना को लागू करने का प्रयास कर रहा है।
रजापुर ब्लॉक का भोवापुर गांव में घर से कूड़ा उठाने की योजना सफल हो पा रही है और गांव वाले इसका शुल्क जमा कर रहे हैं। बाकी किसी गांव में यह योजना सफल नहीं हो पाई है। कूड़ा निस्तारण के लिए 30 रुपये प्रति परिवार शुल्क निर्धारित किया गया था। इस योजना को ग्राम्य विकास विभाग और पंचायती राज विभाग ने लगभग तीन-चार साल पहले सभी ग्राम पंचायतों में पूर्ण रुप से लागू कर दिया था लेकिन शुल्क नहीं मिलने के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिवों को दी गई थी लेकिन गांवों के ज्यादातर लोगों ने शुल्क देने से साफ इनकार कर दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि शासन से यह पूर्ण रूप से लागू करने का कोई आदेश नहीं आया है किसी पर सख्ती भी नहीं की जा सकती है इसलिए इस योजना को पूर्ण रुप से लागू करने में समस्या आ रही है। इस योजना पर लाखों खर्च होते हैं लेकिन गांवों से इसकी वसूली नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि 30 गांवों को ओडीएफ प्लस योजना में शामिल किया गया है, जिसमें इस योजना को दोबारा से लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। आदर्श गांव बनाने के लिए इन गांवों में सभी सुविधाएं जरूरी होंगी।
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