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महंगाई से जन औषधि केंद्र को मिला बूस्टर डोज
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महंगाई से जन औषधि केंद्र को मिला बूस्टर डोज
गाजियाबाद। जीवन रक्षक दवाओं पर महंगाई की मार पड़ी तो जन औषधि केंद्रों की दुकान चल पड़ी। एक साल में दवाइयों के दाम बढ़ने से इन केंद्रों पर 15 से 20 फीसदी दवाइयों की बिक्री बढ़ गई है, जबकि बाजार में मेडिकल स्टोर पर मधुमेह और हृदय से संबंधित दवाइयों की कीमत 20 से 25 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। बुखार, सर्दी, खांसी, रक्तचाप, कई तरह की एंटीबायोटिक दवा के दाम दो से तीन बार बढ़े चुके हैं। बुखार नापने का डिजिटल थर्मामीटर, रक्तचाप नापने का बीपी रीडर और ऑक्सीजन का लेवल जानने के लिए ऑक्सीमीटर के दाम भी बढ़े हैं।
एम्स, जीटीबी और ईएसआई के पर्चे लेकर आते हैं मरीज
जीटी रोड स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सचिन सैनी ने बताया कि पहले लोग दवाइयां लेने से बचते थे, लेकिन अब एम्स, जीटीबी और ईएसआई अस्पताल के पर्चे भी आते हैं। बाजार में मिलने वाली दवाइयों की अपेक्षा जन औषधि केंद्र पर 60 से 90 फीसदी दवाइयां सस्ती मिलती हैं। सचिन का कहना है कि तीन महीने से हृदय और मधुमेह की दवाइयों की आपूर्ति की किल्लत हो रही है।
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि जो दवाइयां अस्पताल में नहीं रहती हैं, उसके लिए मरीजों को सलाह दी जाती है कि अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र से खरीद लें।
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तीन साल में बढ़े जन औषधि केंद्र
जिला औषधि निरीक्षक अनुरोध कुमार का कहना है कि तीन साल में जन औषधि केंद्र के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है। तीन साल में जिले में 17 मामले जन औषधि केंद्र बढ़े हैं। इस समय सिर्फ संयुक्त अस्पताल में एक केंद्र बंद है, जबकि जिले में 70 केंद्र संचालित हैं।
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गाजियाबाद। जीवन रक्षक दवाओं पर महंगाई की मार पड़ी तो जन औषधि केंद्रों की दुकान चल पड़ी। एक साल में दवाइयों के दाम बढ़ने से इन केंद्रों पर 15 से 20 फीसदी दवाइयों की बिक्री बढ़ गई है, जबकि बाजार में मेडिकल स्टोर पर मधुमेह और हृदय से संबंधित दवाइयों की कीमत 20 से 25 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। बुखार, सर्दी, खांसी, रक्तचाप, कई तरह की एंटीबायोटिक दवा के दाम दो से तीन बार बढ़े चुके हैं। बुखार नापने का डिजिटल थर्मामीटर, रक्तचाप नापने का बीपी रीडर और ऑक्सीजन का लेवल जानने के लिए ऑक्सीमीटर के दाम भी बढ़े हैं।
एम्स, जीटीबी और ईएसआई के पर्चे लेकर आते हैं मरीज
जीटी रोड स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सचिन सैनी ने बताया कि पहले लोग दवाइयां लेने से बचते थे, लेकिन अब एम्स, जीटीबी और ईएसआई अस्पताल के पर्चे भी आते हैं। बाजार में मिलने वाली दवाइयों की अपेक्षा जन औषधि केंद्र पर 60 से 90 फीसदी दवाइयां सस्ती मिलती हैं। सचिन का कहना है कि तीन महीने से हृदय और मधुमेह की दवाइयों की आपूर्ति की किल्लत हो रही है।
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एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि जो दवाइयां अस्पताल में नहीं रहती हैं, उसके लिए मरीजों को सलाह दी जाती है कि अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र से खरीद लें।
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तीन साल में बढ़े जन औषधि केंद्र
जिला औषधि निरीक्षक अनुरोध कुमार का कहना है कि तीन साल में जन औषधि केंद्र के प्रति लोगों में रुझान बढ़ा है। तीन साल में जिले में 17 मामले जन औषधि केंद्र बढ़े हैं। इस समय सिर्फ संयुक्त अस्पताल में एक केंद्र बंद है, जबकि जिले में 70 केंद्र संचालित हैं।