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पर्यावरण को पहुंचाया नुकसान, बिल्डर पर 60 करोड़ का जुर्माना
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पर्यावरण को पहुंचाया नुकसान, बिल्डर पर 60 करोड़ का जुर्माना
साहिबाबाद। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने मोहननगर स्थित सेवियर्स पार्क सोसायटी के बिल्डर सिद्धार्थ मोदी पर 60 करोड़ 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बगैर इजाजत के सीवर लाइन डालने और पानी का दोहन करने पर यह आदेश जारी किया गया। अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण ने पाया कि बिल्डर ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। जुर्माने की राशि दो महीने के भीतर जमा करनी होगी।
एओए के सह सचिव हिमांशु शर्मा ने बताया कि पहली सुनवाई में ही साफ हो गया था कि बिल्डर ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस पर एजीटी ने कई विभागों की एक संयुक्त कमेटी गठित कर सोसायटी में निरीक्षण कर रिपोर्ट जमा करने के ओदश दिए थे। चार मई को तीसरी सुनवाई हुई। छह मई को यह साबित हो गया कि बिल्डर दोषी है। एओए अध्यक्ष एके श्रीवास्तव ने कहा कि बिल्डर को दोषी पाने के बाद जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी के फैसले से सोसायटी के लोग खुश हैं। एओए ने 22 जुलाई 2021 को याचिका दाखिल की थी। फैसला आने पर एओए ने खुशी जताई।
ब्लैकलिस्टेड हो सकती फर्म
अगर बिल्डर ने तय समय दो महीने के भीतर जुर्माना की राशि जमा नहीं की तो उस पर फर्म को ब्लैकलिस्टेड करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। बिल्डर के खिलाफ लोगों ने प्रशासन से भी शिकायत की थी। इस पर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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कई मुद्दों पर थी याचिका
याचिका में कई मुद्दे उठाए गए थे। इनमें अवैध निर्माण करना, जल का दोहन करना, पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान न छोड़ना, हरित क्षेत्र कम छोड़ना शामिल थे। इन सभी पर अधिकारियों की कमेटी ने परीक्षण किया।
तारीख दर तारीख
- 22 जुलाई 2021 : एओए ने याचिका दाखिल की
- 13 अगस्त 2021 : एनजीटी में पहली सुनवाई हुई।
- 13 अगस्त - 2021 एनजीटी ने जांच कमेटी गठित की।
- 23 सितंबर 2021 - कमेटी ने सोसायटी का निरीक्षण किया।
- 24 जनवरी 2022- कमेटी ने जांच रिपोर्ट दाखिल की।
- 29 अप्रैल 2022 - कमेटी ने फिर से रिपोर्ट दाखिल की।
- 04 मई 2022 - एनजीटी में आखिरी बार सुनवाई हुई।
- 06 मई 2022 - बिल्डर पर जुर्माने का आदेश जारी हुआ।
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साहिबाबाद। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने मोहननगर स्थित सेवियर्स पार्क सोसायटी के बिल्डर सिद्धार्थ मोदी पर 60 करोड़ 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बगैर इजाजत के सीवर लाइन डालने और पानी का दोहन करने पर यह आदेश जारी किया गया। अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण ने पाया कि बिल्डर ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। जुर्माने की राशि दो महीने के भीतर जमा करनी होगी।
एओए के सह सचिव हिमांशु शर्मा ने बताया कि पहली सुनवाई में ही साफ हो गया था कि बिल्डर ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस पर एजीटी ने कई विभागों की एक संयुक्त कमेटी गठित कर सोसायटी में निरीक्षण कर रिपोर्ट जमा करने के ओदश दिए थे। चार मई को तीसरी सुनवाई हुई। छह मई को यह साबित हो गया कि बिल्डर दोषी है। एओए अध्यक्ष एके श्रीवास्तव ने कहा कि बिल्डर को दोषी पाने के बाद जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी के फैसले से सोसायटी के लोग खुश हैं। एओए ने 22 जुलाई 2021 को याचिका दाखिल की थी। फैसला आने पर एओए ने खुशी जताई।
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ब्लैकलिस्टेड हो सकती फर्म
अगर बिल्डर ने तय समय दो महीने के भीतर जुर्माना की राशि जमा नहीं की तो उस पर फर्म को ब्लैकलिस्टेड करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। बिल्डर के खिलाफ लोगों ने प्रशासन से भी शिकायत की थी। इस पर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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कई मुद्दों पर थी याचिका
याचिका में कई मुद्दे उठाए गए थे। इनमें अवैध निर्माण करना, जल का दोहन करना, पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान न छोड़ना, हरित क्षेत्र कम छोड़ना शामिल थे। इन सभी पर अधिकारियों की कमेटी ने परीक्षण किया।
तारीख दर तारीख
- 22 जुलाई 2021 : एओए ने याचिका दाखिल की
- 13 अगस्त 2021 : एनजीटी में पहली सुनवाई हुई।
- 13 अगस्त - 2021 एनजीटी ने जांच कमेटी गठित की।
- 23 सितंबर 2021 - कमेटी ने सोसायटी का निरीक्षण किया।
- 24 जनवरी 2022- कमेटी ने जांच रिपोर्ट दाखिल की।
- 29 अप्रैल 2022 - कमेटी ने फिर से रिपोर्ट दाखिल की।
- 04 मई 2022 - एनजीटी में आखिरी बार सुनवाई हुई।
- 06 मई 2022 - बिल्डर पर जुर्माने का आदेश जारी हुआ।