{"_id":"626c35225fd98d02f34aa020","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd237656667","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैशाली से मोहननगर के बाद अन्य तीन रूट पर दौड़ेगा रोपवे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैशाली से मोहननगर के बाद अन्य तीन रूट पर दौड़ेगा रोपवे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैशाली से मोहननगर के बाद तीन और रूट पर चलेगा रोपवे
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अन्य तीन रूट पर रोपवे चलाने की तैयारी है। प्राधिकरण की ओर से बोर्ड बैठक में नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-62 नोएडा मेट्रो स्टेशन और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन रूट का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी मिलने और पहला प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बाकी तीन रूट पर रोपवे चलाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
---
कंपनी को चारों रूट का भेजा गया है प्रस्ताव
वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण अब देश में रोपवे से जुड़े प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली एनएचएआई की विशेष परपज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) करेगी। प्राधिकरण की ओर से पहले प्रोजेक्ट के साथ भविष्य के बाकी तीन रूट का प्रस्ताव भी एनएचएलएमएल को भेजा गया है। कंपनी रोपवे की संभावनाओं पर विस्तृत मंथन के बाद अपनी रिपोर्ट जीडीए को देगी। जीडीए मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि फिलहाल वैशाली से मोहननगर रूट पर ही रोपवे चलाने की योजना है। भविष्य में तीन और रूट पर रोपवे संचालन की संभावना को देखते हुए प्रस्ताव में जगह दी गई है।
---
बोर्ड की मंजूरी के बाद पहला प्रोजेक्ट पकड़ेगा रफ्तार
रोपवे के वैशाली से मोहननगर पहले प्रोजेक्ट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्राधिकरण पहले ही तैयार कर चुका है। सलाहकार फर्म की ओर से प्रोजेक्ट की करीब 450 करोड़ लागत बताई गई थी। बोर्ड की मंजूरी मिलते ही प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा। रोपवे प्रोजेक्ट के लिए जीडीए को केवल निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी होगी। प्रोजेक्ट में फंडिंग सहित बाकी कार्य कंपनी की ओर से किए जाएंगे।
विज्ञापन
---
प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा करने का है लक्ष्य
रोपवे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 5.17 किमी है। जीडीए की ओर से तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, जो कि अब संभव होता दिख रहा है।
विज्ञापन
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अन्य तीन रूट पर रोपवे चलाने की तैयारी है। प्राधिकरण की ओर से बोर्ड बैठक में नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-62 नोएडा मेट्रो स्टेशन और राजनगर एक्सटेंशन चौराहे से हिंडन रिवर मेट्रो स्टेशन रूट का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी मिलने और पहला प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बाकी तीन रूट पर रोपवे चलाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
---
कंपनी को चारों रूट का भेजा गया है प्रस्ताव
वैशाली से मोहननगर रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण अब देश में रोपवे से जुड़े प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली एनएचएआई की विशेष परपज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) करेगी। प्राधिकरण की ओर से पहले प्रोजेक्ट के साथ भविष्य के बाकी तीन रूट का प्रस्ताव भी एनएचएलएमएल को भेजा गया है। कंपनी रोपवे की संभावनाओं पर विस्तृत मंथन के बाद अपनी रिपोर्ट जीडीए को देगी। जीडीए मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि फिलहाल वैशाली से मोहननगर रूट पर ही रोपवे चलाने की योजना है। भविष्य में तीन और रूट पर रोपवे संचालन की संभावना को देखते हुए प्रस्ताव में जगह दी गई है।
विज्ञापन
---
बोर्ड की मंजूरी के बाद पहला प्रोजेक्ट पकड़ेगा रफ्तार
रोपवे के वैशाली से मोहननगर पहले प्रोजेक्ट की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्राधिकरण पहले ही तैयार कर चुका है। सलाहकार फर्म की ओर से प्रोजेक्ट की करीब 450 करोड़ लागत बताई गई थी। बोर्ड की मंजूरी मिलते ही प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा। रोपवे प्रोजेक्ट के लिए जीडीए को केवल निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी होगी। प्रोजेक्ट में फंडिंग सहित बाकी कार्य कंपनी की ओर से किए जाएंगे।
विज्ञापन
---
प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा करने का है लक्ष्य
रोपवे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 5.17 किमी है। जीडीए की ओर से तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में प्रोजेक्ट को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था, जो कि अब संभव होता दिख रहा है।