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तारीख पर तारीख : 30 साल से 4140 लोग कर रहे न्याय का इंतजार
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तारीख पर तारीख : 30 साल से 4140 लोग कर रहे न्याय का इंतजार
गाजियाबाद। 30 साल से जिले में 4140 लोगों को न्याय का इंतजार है। कई ऐसे भी हैं जो अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया छोड़ गए। वर्तमान में 241080 मामले अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं। इसमें क्रिमिनल (अपराध) से संबंधित अलग-अलग अदालतों में 209945 और सिविल से संबंधित 31135 मामले विचाराधीन हैं। कचहरी में 68 अदालतें संचालित हैं। इनमें से 18 अदालतें लंबे समय से रिक्त चल रही हैं और विचाराधीन मुकदमों में सिर्फ तारीख लग रही है।
32 साल से पिता की संपत्ति पाने की लड़ रहीं लड़ाई
जटवाड़ा निवासी सुनीता और उनकी दो बहन संगीता व गीता ने अपने पिता की संपत्ति हासिल करने के लिए वर्ष 1990 में मुकदमा दायर किया था। चाचा और ताऊ से मुकदमा चल रहा है। इन 32 वर्षों में कई जज आए और चले गए, लेकिन तीनों बहनों को अब भी सिर्फ तारीख मिल रही है।
जातिसूचक शब्द कहने का 28 साल से झेल रहे दंश
गौतमबुद्धनगर के ततारपुर निवासी प्रदीप ने बताया कि 1994 में कुछ लोगों से कहासुनी हो गई थी। उस समय गाजियाबाद के मसूरी थाने में गांव लगता था। तब से अभी तक मामले का निस्तारण नहीं हुआ है।
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मारपीट के मामले में 24 साल से इंसाफ का इंतजार
नोएडा के इटैरा निवासी दौलतराम ने बताया कि 1998 में पड़ोसियों से मारपीट हो गई थी। दोनों पक्षों को चोट लगी थी। उस समय से गाजियाबाद में मुकदमा चल रहा है लेकिन आज तक सिर्फ तारीख लग रही है।
18 साल से दबंगों ने कर रखा है प्लॉट पर कब्जा
भोजपुर के दतैड़ी निवासी हरिओम ने बताया कि कुछ दबंगों ने 18 साल पहले उनके प्लॉट पर कब्जा कर लिया था। थानों के चक्कर काटने के बाद न्याय पाने के लिए वाद दायर किया, आज तक कुछ नहीं हासिल हुआ।
15 साल से न्याय की जगह मिल रही तारीख
नोएडा निवासी ललित का कहना है कि मैं पिछले 15 साल से अदालत में हक की लड़ाई के लिए मुकदमे लड़ रहा हूं, लेकिन अभी तक यह नहीं पता कि कितने साल और लड़ाई लड़नी पड़ेगी। गाजियाबाद के अलग-अलग अदालतों में 27 मुकदमे चल रहे हैं। इस दौरान में अदालत और अधिवक्ता की फीस के अलावा आने जाने में दो से ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
कोट
अधिवक्ता और वादी दोनों होते हैं परेशान
बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में भी लंबे समय तक अदालतों में कामकाज नहीं हुआ, इसके अलावा अदालतों के रिक्त होने से वादी-प्रतिवादी को परेशानी होती है। समय से न्याय नहीं मिल पाता है।
हाईकोर्ट से न्यायाधीशों की नियुक्ति की मांग
बार सचिव नितिन यादव का कहना है कि अदालतों में रिक्त पदों को भरने के लिए जिला जज के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी बार और अधिवक्ताओं की तरफ से पत्र लिखा गया है। संभावना है जल्द ही नियुक्ति हो जाएगी।
वादी हो जाते हैं निराश
अधिवक्ता राजकुमार का कहना है कि समय पर न्याय न मिलने से वादी कई बार निराश हो जाते हैं, इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। अगर अदालतों में समय पर न्याय मिलने लगे तो अपराध भी कम हो जाए।
यह है अदालतों की स्थिति
कचहरी में संचालित कुल अदालत - 68
अदालत - स्वीकृत - रिक्त
सीबीआई - 04 - 01
अपर जिला जज - 22 - 08
वरिष्ठ सिविल - 11 - 05
मजिस्ट्रेट - 09 - 03
न्यायिक मजिस्ट्रेट - 08 - 01 (प्रतिनियिुक्त)
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार
विचाराधीन कुल मुकदमे - 241080
अपराध से संबंधित - 209945
सिविल वाद - 31135
वर्ष - अपराध - सिविल
0 से 1 - 51158 - 8636
2 से 3 - 59307 - 8776
4 से 5 - 21868 - 6597
6 से 10 - 43145 - 4831
11 से 20 - 30727 - 1346
21 से 30 - 3528 - 612
30 वर्ष से अधिक - 214 - 337
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गाजियाबाद। 30 साल से जिले में 4140 लोगों को न्याय का इंतजार है। कई ऐसे भी हैं जो अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया छोड़ गए। वर्तमान में 241080 मामले अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं। इसमें क्रिमिनल (अपराध) से संबंधित अलग-अलग अदालतों में 209945 और सिविल से संबंधित 31135 मामले विचाराधीन हैं। कचहरी में 68 अदालतें संचालित हैं। इनमें से 18 अदालतें लंबे समय से रिक्त चल रही हैं और विचाराधीन मुकदमों में सिर्फ तारीख लग रही है।
32 साल से पिता की संपत्ति पाने की लड़ रहीं लड़ाई
जटवाड़ा निवासी सुनीता और उनकी दो बहन संगीता व गीता ने अपने पिता की संपत्ति हासिल करने के लिए वर्ष 1990 में मुकदमा दायर किया था। चाचा और ताऊ से मुकदमा चल रहा है। इन 32 वर्षों में कई जज आए और चले गए, लेकिन तीनों बहनों को अब भी सिर्फ तारीख मिल रही है।
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जातिसूचक शब्द कहने का 28 साल से झेल रहे दंश
गौतमबुद्धनगर के ततारपुर निवासी प्रदीप ने बताया कि 1994 में कुछ लोगों से कहासुनी हो गई थी। उस समय गाजियाबाद के मसूरी थाने में गांव लगता था। तब से अभी तक मामले का निस्तारण नहीं हुआ है।
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मारपीट के मामले में 24 साल से इंसाफ का इंतजार
नोएडा के इटैरा निवासी दौलतराम ने बताया कि 1998 में पड़ोसियों से मारपीट हो गई थी। दोनों पक्षों को चोट लगी थी। उस समय से गाजियाबाद में मुकदमा चल रहा है लेकिन आज तक सिर्फ तारीख लग रही है।
18 साल से दबंगों ने कर रखा है प्लॉट पर कब्जा
भोजपुर के दतैड़ी निवासी हरिओम ने बताया कि कुछ दबंगों ने 18 साल पहले उनके प्लॉट पर कब्जा कर लिया था। थानों के चक्कर काटने के बाद न्याय पाने के लिए वाद दायर किया, आज तक कुछ नहीं हासिल हुआ।
15 साल से न्याय की जगह मिल रही तारीख
नोएडा निवासी ललित का कहना है कि मैं पिछले 15 साल से अदालत में हक की लड़ाई के लिए मुकदमे लड़ रहा हूं, लेकिन अभी तक यह नहीं पता कि कितने साल और लड़ाई लड़नी पड़ेगी। गाजियाबाद के अलग-अलग अदालतों में 27 मुकदमे चल रहे हैं। इस दौरान में अदालत और अधिवक्ता की फीस के अलावा आने जाने में दो से ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
कोट
अधिवक्ता और वादी दोनों होते हैं परेशान
बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में भी लंबे समय तक अदालतों में कामकाज नहीं हुआ, इसके अलावा अदालतों के रिक्त होने से वादी-प्रतिवादी को परेशानी होती है। समय से न्याय नहीं मिल पाता है।
हाईकोर्ट से न्यायाधीशों की नियुक्ति की मांग
बार सचिव नितिन यादव का कहना है कि अदालतों में रिक्त पदों को भरने के लिए जिला जज के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी बार और अधिवक्ताओं की तरफ से पत्र लिखा गया है। संभावना है जल्द ही नियुक्ति हो जाएगी।
वादी हो जाते हैं निराश
अधिवक्ता राजकुमार का कहना है कि समय पर न्याय न मिलने से वादी कई बार निराश हो जाते हैं, इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। अगर अदालतों में समय पर न्याय मिलने लगे तो अपराध भी कम हो जाए।
यह है अदालतों की स्थिति
कचहरी में संचालित कुल अदालत - 68
अदालत - स्वीकृत - रिक्त
सीबीआई - 04 - 01
अपर जिला जज - 22 - 08
वरिष्ठ सिविल - 11 - 05
मजिस्ट्रेट - 09 - 03
न्यायिक मजिस्ट्रेट - 08 - 01 (प्रतिनियिुक्त)
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार
विचाराधीन कुल मुकदमे - 241080
अपराध से संबंधित - 209945
सिविल वाद - 31135
वर्ष - अपराध - सिविल
0 से 1 - 51158 - 8636
2 से 3 - 59307 - 8776
4 से 5 - 21868 - 6597
6 से 10 - 43145 - 4831
11 से 20 - 30727 - 1346
21 से 30 - 3528 - 612
30 वर्ष से अधिक - 214 - 337