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कर्मचारी ने ही लुटवाए थे पेट्रोल पंप के 25 लाख, दो गिरफ्तार
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कर्मचारी ने ही लुटवाए थे पेट्रोल पंप के 25 लाख, दो गिरफ्तार
गाजियाबाद। दो बदमाशों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अरिहंत पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ 28 मार्च को हुई 25 लाख की लूट का खुलासा हो जाने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि बदमाश मुकेश को शनिवार की रात मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया। जवाबी फायरिंग में उसके दोनों पैर में गोली लगी है। उससे लूट की रकम में से दस लाख बरामद किए गए हैं। इससे पहले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाश शोएब को पकड़ा गया। उसने ही बताया कि लूट की साजिश जेल में रची गई। कैश की जानकारी पेट्रोल पंप कर्मचारी आसिफ ने दी थी। वह गोकशी के पुराने मामले में अदालत में समर्पण करके पहले ही जेल जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि फैजाबाद निवासी आसिफ, दिल्ली निवासी शोएब और लोनी निवासी मुकेश 2016 में जेल में होने के दौरान संपर्क में आए थे। आसिफ नाम और पते बदल-बदलकर शहर में ही रह रहा था। उसने पेट्रोल पंप पर अपना नाम राशिद बता रखा था। उस पर पहले से ही शक था क्योंकि वारदात के बाद से न तो वह पंप पर आया और न ही घर पर मिला। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल से शोएब का नाम निकला। एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया कि शोएब को दबिश देकर पकड़ा गया। उससे 40 हजार रुपये मिले। उसने मुकेश का नाम बताया और यह भी सूचना दी कि वह शनिवार रात मसूरी के नाहल रोड पर आएगा। वहां घेराबंदी की गई। मुठभेड़ के बाद वह हाथ आ गया। उसकी गोली से गार्डन एंक्लेव चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार घायल हो गए। तीसरा बदमाश फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।
नाम बदलकर कर रहा था नौकरी
आसिफ पेट्रोल पंप पर नाम बदलकर नौकरी कर रहा था। उसने अपना नाम राशिद बता रखा था। पेट्रोल पंप पर कभी उसके कागजात का सत्यापन नहीं कराया गया। उसने इसी का फायदा उठाया। उसके खिलाफ गोकशी में वारंट जारी होते रहे। परिवार वाले कहते रहे कि वह शहर छोड़कर जा चुका है, लेकिन वह इसी शहर में नौकरी करता रहा। वह 2017 में लूट के मामले में जेल जा चुका है।
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साथी पकड़ा गया, फिर भी की लूट
लूट की तैयारी डेढ़ महीने पहले कर ली गई थी। जगह भी तय हो गई थी। मार्च के आखिर में लूट करनी थी, लेकिन इससे पहले ही गिरोह का सदस्य दीपक गिरफ्तार हो गया। इसके बाद भी बदमाशों ने लूट का इरादा नहीं बदला और 28 को वारदात कर डाली। यह भी देखा गया कि इस रूट पर दिन में पुलिस नहीं रहती है। लूट पुलिस लाइन के पास ही की गई थी।
खुलासे से पुलिस लापरवाही की खुली पोल
लूट के खुलासे से पुलिस की लापरवाही भी सामने आ गई। साफ हो गया कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी जिले में कहीं चेकिंग नहीं की गई। बदमाश कैश लेकर बाइक से ही लोनी तक पहुंच गए। थाने और चौकियों के सामने भी चेकिंग नहीं की गई। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि नकदी के भरा बैग छीनने के बाद फ्लाई ओवर पर रॉग साइड आकर हाईवे को छोड़ दिया। शास्त्री नगर होते हुए लोनी पहुंचे। इस दौरान वह कई थानों और चौकियों के सामने से गुजरे।लोनी में पहुंचकर लूट की रकम को बांटकर देर रात लोनी को छोड़ दिया था। पुलिस की दूसरी लापरवाही यह रही कि आसिफ उर्फ राशिद पिछले काफी सालों से एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद भी पेट्रोल पंप पर काम कर रहा था। इस बीच वह किसी बड़ी लूट की घटना को अंजाम देने की फिराक में था।
38 केस दर्ज, फिर भी खुला घूम रहा था मुकेश
मुकेश पर 38 केस दर्ज हैं। वह लूट में पहले भी जेल जा चुका है। जेल से आते ही चोरी और लूट शुरू कर देता है। इस बार भी यही हुआ। वह खुला घूम रहा था और लूट कर डाली। इस गिरोह के सभी सदस्यों की यही कहानी है। चाहें कितनी बार पकड़े जाएं, लूट करना नहीं छोड़ते। पुलिस को उम्मीद है कि इस बार मुकेश के लिए अपराध की राह आसान नहीं होगी क्योंकि उसके दोनों पैरों में गोली लगी है।
एसएसपी को किया गया था निलंबित
इस लूट के बाद भी तत्कालीन एसएसपी पवन कुमार को निलंबित कर दिया गया था। यह गाजियाबाद जिले के इतिहास में इस तरह की पहली कार्रवाई की गई थी। इससे पहले अपराध बेकाबू होने पर पुलिस कप्तान हटाए तो गए, लेकिन निलंबित नहीं किए गए। इस लूट के खुलासे के लिए पुलिस ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था।
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गाजियाबाद। दो बदमाशों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अरिहंत पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के साथ 28 मार्च को हुई 25 लाख की लूट का खुलासा हो जाने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि बदमाश मुकेश को शनिवार की रात मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया। जवाबी फायरिंग में उसके दोनों पैर में गोली लगी है। उससे लूट की रकम में से दस लाख बरामद किए गए हैं। इससे पहले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाश शोएब को पकड़ा गया। उसने ही बताया कि लूट की साजिश जेल में रची गई। कैश की जानकारी पेट्रोल पंप कर्मचारी आसिफ ने दी थी। वह गोकशी के पुराने मामले में अदालत में समर्पण करके पहले ही जेल जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि फैजाबाद निवासी आसिफ, दिल्ली निवासी शोएब और लोनी निवासी मुकेश 2016 में जेल में होने के दौरान संपर्क में आए थे। आसिफ नाम और पते बदल-बदलकर शहर में ही रह रहा था। उसने पेट्रोल पंप पर अपना नाम राशिद बता रखा था। उस पर पहले से ही शक था क्योंकि वारदात के बाद से न तो वह पंप पर आया और न ही घर पर मिला। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल से शोएब का नाम निकला। एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया कि शोएब को दबिश देकर पकड़ा गया। उससे 40 हजार रुपये मिले। उसने मुकेश का नाम बताया और यह भी सूचना दी कि वह शनिवार रात मसूरी के नाहल रोड पर आएगा। वहां घेराबंदी की गई। मुठभेड़ के बाद वह हाथ आ गया। उसकी गोली से गार्डन एंक्लेव चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार घायल हो गए। तीसरा बदमाश फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।
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नाम बदलकर कर रहा था नौकरी
आसिफ पेट्रोल पंप पर नाम बदलकर नौकरी कर रहा था। उसने अपना नाम राशिद बता रखा था। पेट्रोल पंप पर कभी उसके कागजात का सत्यापन नहीं कराया गया। उसने इसी का फायदा उठाया। उसके खिलाफ गोकशी में वारंट जारी होते रहे। परिवार वाले कहते रहे कि वह शहर छोड़कर जा चुका है, लेकिन वह इसी शहर में नौकरी करता रहा। वह 2017 में लूट के मामले में जेल जा चुका है।
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साथी पकड़ा गया, फिर भी की लूट
लूट की तैयारी डेढ़ महीने पहले कर ली गई थी। जगह भी तय हो गई थी। मार्च के आखिर में लूट करनी थी, लेकिन इससे पहले ही गिरोह का सदस्य दीपक गिरफ्तार हो गया। इसके बाद भी बदमाशों ने लूट का इरादा नहीं बदला और 28 को वारदात कर डाली। यह भी देखा गया कि इस रूट पर दिन में पुलिस नहीं रहती है। लूट पुलिस लाइन के पास ही की गई थी।
खुलासे से पुलिस लापरवाही की खुली पोल
लूट के खुलासे से पुलिस की लापरवाही भी सामने आ गई। साफ हो गया कि इतनी बड़ी वारदात के बाद भी जिले में कहीं चेकिंग नहीं की गई। बदमाश कैश लेकर बाइक से ही लोनी तक पहुंच गए। थाने और चौकियों के सामने भी चेकिंग नहीं की गई। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि नकदी के भरा बैग छीनने के बाद फ्लाई ओवर पर रॉग साइड आकर हाईवे को छोड़ दिया। शास्त्री नगर होते हुए लोनी पहुंचे। इस दौरान वह कई थानों और चौकियों के सामने से गुजरे।लोनी में पहुंचकर लूट की रकम को बांटकर देर रात लोनी को छोड़ दिया था। पुलिस की दूसरी लापरवाही यह रही कि आसिफ उर्फ राशिद पिछले काफी सालों से एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद भी पेट्रोल पंप पर काम कर रहा था। इस बीच वह किसी बड़ी लूट की घटना को अंजाम देने की फिराक में था।
38 केस दर्ज, फिर भी खुला घूम रहा था मुकेश
मुकेश पर 38 केस दर्ज हैं। वह लूट में पहले भी जेल जा चुका है। जेल से आते ही चोरी और लूट शुरू कर देता है। इस बार भी यही हुआ। वह खुला घूम रहा था और लूट कर डाली। इस गिरोह के सभी सदस्यों की यही कहानी है। चाहें कितनी बार पकड़े जाएं, लूट करना नहीं छोड़ते। पुलिस को उम्मीद है कि इस बार मुकेश के लिए अपराध की राह आसान नहीं होगी क्योंकि उसके दोनों पैरों में गोली लगी है।
एसएसपी को किया गया था निलंबित
इस लूट के बाद भी तत्कालीन एसएसपी पवन कुमार को निलंबित कर दिया गया था। यह गाजियाबाद जिले के इतिहास में इस तरह की पहली कार्रवाई की गई थी। इससे पहले अपराध बेकाबू होने पर पुलिस कप्तान हटाए तो गए, लेकिन निलंबित नहीं किए गए। इस लूट के खुलासे के लिए पुलिस ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था।