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सपा का 26 और कांग्रेस का 20 साल से नहीं खुला खाता

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 01:20 AM IST
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सपा का 26 और कांग्रेस का 20 साल से नहीं खुला खाता
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गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के जरिए इस बार नए समीकरण बनाने उम्मीद की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सपा को 26 साल से और कांग्रेस का 20 साल से जिले में खाता नहीं खुला। बसपा को 2012 के बाद जिले में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। भाजपा ने 2017 के बाद अब 2022 में भी पांचों सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष को क्लीन स्वीप कर दिया है।
आम विधानसभा चुनाव में सपा जिले में सिर्फ एक बार मुरादनगर सीट पर जीती है। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी ने 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2004 में हुए उपचुनाव में पार्टी के प्रत्याशी सुरेंद्र मुन्नी ने चुनाव जीता था। आम चुनाव में 1996 के बाद पार्टी का खाता नहीं खुला। 2002 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने गाजियाबाद, मोदीनगर और मुरादनगर तीनों सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन तीनों हार गए। उस वक्त साहिबाबाद और लोनी विधानसभा सीटों का गठन नहीं हुआ था। इसके बाद 2007 में पार्टी ने प्रत्याशी उतारे, लेकिन एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। 2012 में भी समाजवादी पार्टी का जीत का इंतजार खत्म नहीं हुआ। 2012 में पांच में से चार सीटों पर बसपा और मोदीनगर सीट पर रालोद के प्रत्याशी जीतकर विधानसभा में पहुंचे।
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कांग्रेस भी 2002 के बाद जिले में जीत का खाता नहीं खोल पाई। 2002 में सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने गाजियाबाद सदर सीट पर और राजपाल त्यागी ने मुरादनगर सीट पर कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद कांग्रेस किसी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाई है। 2007 में कांग्रेस के टिकट पर गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़े सुरेंद्र कुमार मुन्नी, मुरादनगर से विवेक त्यागी तीसरे नंबर पर रहे थे। मोदीनगर सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार सुदेश शर्मा को तब महज 11690 वोट मिले थे। वह छठे नंबर पर रहे थे।
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2012 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और रालोद ने गठबंधन में लड़ा था। लोनी और मोदीनगर सीट पर आरएलडी के उम्मीदवार थे। बाकी तीन सीट गाजियाबाद, साहिबाबाद और मुरादनगर पर कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारे थे। मुरादनगर में कांग्रेस चौथे नंबर पर, गाजियाबाद व साहिबाबाद सीट पर तीसरे नंबर पर रही थी। 2017 के चुनाव में भाजपा ने सभी दलों को क्लीन स्वीप कर पांचों सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस का गाजियाबाद में जीत का खाता खोलने का 20 साल का इंतजार इस बार भी पूरा नहीं हुआ।
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