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सिपाही की पत्नी को फर्जी कंपनी का निदेशक बना ठगे सात लाख
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सिपाही की पत्नी को फर्जी कंपनी का निदेशक बना ठगे सात लाख
गाजियाबाद। लोग ही नहीं बल्कि पुलिस कर्मियों के परिवार भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। कविनगर थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें आरोपियों ने पुलिस लाइन में तैनात सिपाही की पत्नी को फर्जी कंपनी का निदेशक बनाया और निवेश के नाम पर सात लाख रुपये ठग लिए। एसएसपी पवन कुमार के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी दंपती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
गोविंदपुरम में श्वेता चौहान रहती हैं। उनके पति रामेंद्र सिंह पुलिस लाइन में तैनात हैं। श्वेता ने बताया कि नवंबर-2020 में पति का एक्सीडेंट हो गया था। इस दौरान घायल पति का हाल लेने उनके सहकर्मी हेड कांस्टेबल अनिल कुमार आते थे। अनिल के साथ ढिडार गांव निवासी अजय कुमार भी आने लगा। अजय ने पेंट फैक्टरी खोलने की बात कहकर श्वेता को उसमें पाटर्नर बनाने का झांसा दिया। इस बीच अजय की पत्नी आंचल भी उनसे आकर मिली। दोनों की बातों में आकर श्वेता ने कंपनी के दस्तावेज देखकर सात लाख रुपये उन्हें दे दिए। कंपनी से कई दिनों तक कुछ नहीं मिला तो उन्होंने आरोपी के गांव में जाकर पूछताछ की। इस पर आरोपी के परिजन झगड़े पर उतारू हो गए और गाली-गलौच करने लगे। श्वेता ने बताया कि अगले दिन आंचल और अजय ने घर आकर उन्हें 4.54 लाख रुपये का चेक दिया, जो बाउंस हो गया। कंपनी की पड़ताल करने पर श्वेता को पता चला कि अजय ने कोई कंपनी नहीं खोली है।
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गाजियाबाद। लोग ही नहीं बल्कि पुलिस कर्मियों के परिवार भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। कविनगर थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें आरोपियों ने पुलिस लाइन में तैनात सिपाही की पत्नी को फर्जी कंपनी का निदेशक बनाया और निवेश के नाम पर सात लाख रुपये ठग लिए। एसएसपी पवन कुमार के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी दंपती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
गोविंदपुरम में श्वेता चौहान रहती हैं। उनके पति रामेंद्र सिंह पुलिस लाइन में तैनात हैं। श्वेता ने बताया कि नवंबर-2020 में पति का एक्सीडेंट हो गया था। इस दौरान घायल पति का हाल लेने उनके सहकर्मी हेड कांस्टेबल अनिल कुमार आते थे। अनिल के साथ ढिडार गांव निवासी अजय कुमार भी आने लगा। अजय ने पेंट फैक्टरी खोलने की बात कहकर श्वेता को उसमें पाटर्नर बनाने का झांसा दिया। इस बीच अजय की पत्नी आंचल भी उनसे आकर मिली। दोनों की बातों में आकर श्वेता ने कंपनी के दस्तावेज देखकर सात लाख रुपये उन्हें दे दिए। कंपनी से कई दिनों तक कुछ नहीं मिला तो उन्होंने आरोपी के गांव में जाकर पूछताछ की। इस पर आरोपी के परिजन झगड़े पर उतारू हो गए और गाली-गलौच करने लगे। श्वेता ने बताया कि अगले दिन आंचल और अजय ने घर आकर उन्हें 4.54 लाख रुपये का चेक दिया, जो बाउंस हो गया। कंपनी की पड़ताल करने पर श्वेता को पता चला कि अजय ने कोई कंपनी नहीं खोली है।
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