{"_id":"621a846edabaef075e38e9f2","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd234653323","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्रवाई नहीं होने से हर महीने लग रही 64 करोड़ की चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्रवाई नहीं होने से हर महीने लग रही 64 करोड़ की चपत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्रवाई नहीं होने से हर महीने लग रही 64 करोड़ की चपत
गाजियाबाद। जिले में औसतन 64 करोड़ रुपये की हर महीने बिजली चोरी होती है। बीते तीन सालों में 7842 मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन बिजली चोरों पर कनेक्शन काटने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें देरी की वजह बिजली थाने में स्टाफ की कमी को बताया जा रहा है। तीन साल में महज दो हजार मामलों में चार्जशीट लगाई गई है। फिलहाल दर्ज मुकदमों में 4500 मामलों की जांच लंबित पड़ी है, इससे बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसना भी मुश्किल हो रहा है।
गाजियाबाद में साल 2019 सितंबर माह में एंटी पावर थेफ्ट (बिजली थाना) को शुरू किया गया था। वसुंधरा सेक्टर-8 में शुरू हुए थाने में महज तीन महीने के अंदर बिजली चोरी के एक हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। इसके बाद अगले साल करीब साढ़े चार हजार बिजली चोरी के केस थाने में दर्ज हुए। ये साल कोरोना संक्रमण की शुरुआत का साल था, जब देश में संपूर्ण लॉकडाउन के बाद जांच बंद होने से जिले में बिजली चोरी अचानक से बढ़ गई। कोरोना की बंदिशें खत्म होने के बाद विद्युत निगम ने चेकिंग अभियान चलाकर बिजली चोरों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। इसके बाद साल 2021 में भी 2300 से अधिक बिजली चोरी के केस थाने में दर्ज हुए। ब्यूरो
बीते तीन साल में बिजली थाने में दर्ज एफआईआर :
वर्ष एफआईआर की संख्या
2019 (सितंबर से दिसंबर) 1112
2020 4427
2021 2303
लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर बने हुए हैं आगे
मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी, पसौंडा, कैला भट्टा, नंदग्राम, डासना-मसूरी में सबसे अधिक बिजली चोरी की जा रही है। हर दिन औसतन दो करोड़ की बिजली में चपत लग रही है। लोनी में कुछ घरों में तो मीटर को बंद करने के मामले भी विभाग ने पकड़े हैं।
विज्ञापन
2 से 3 मुकदमाें पर जेल
अधिकांश मामलों में शमन शुल्क जमा कराने के बाद बिजली चोरी के मामले निस्तारित कर दिए जाते हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि दो से तीन मुकदमे होने पर जेल भेजने का प्रावधान है। जिले में किसी पर अभी लगातार दो या तीन मुकदमे दर्ज नहीं हुए हैं।
थाने में सृजित पदों के मुकाबले स्टाफ
थाने में 24 सृजित पदों के मुकाबले 16 पुलिस कर्मियों का स्टाफ है। इनमें एक निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, नौ हेड कांस्टेबल और नौ कांस्टेबल की जरूरत है। वसुंधरा स्थित थाने में एक निरीक्षक, एक उपनिरीक्षक, पांच हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल के अलावा दो कंप्यूटर ऑपरेटर हैं।
इन मामलों में दर्ज होती है एफआईआर
- कनेक्शन काटने की कार्रवाई के बाद लाइन चालू करने पर
- घरेलू बिजली का व्यावसायिक प्रयोग करने पर
- मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करने पर
- कटिया डालकर बिजली चोरी करने पर
- एक कनेक्शन से अन्य घर में बिजली के इस्तेमाल पर
कोट ----------------------------
बिजली चोरी के करीब दो हजार मामलों में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। बिजली चोरी वाले इलाकों में भी लगातार गश्त कराई जाती है। निगम अधिकारियों की शिकायत पर फोर्स भी उपलब्ध कराते हैं। फिलहाल स्टाफ चुनाव ड्यूटी में है। स्टाफ बढ़ाने के लिए शासन से मांग कर चुके हैं। - राजकुमार, प्रभारी निरीक्षक, एंटी पावर थेफ्ट थाना
विज्ञापन
गाजियाबाद। जिले में औसतन 64 करोड़ रुपये की हर महीने बिजली चोरी होती है। बीते तीन सालों में 7842 मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन बिजली चोरों पर कनेक्शन काटने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें देरी की वजह बिजली थाने में स्टाफ की कमी को बताया जा रहा है। तीन साल में महज दो हजार मामलों में चार्जशीट लगाई गई है। फिलहाल दर्ज मुकदमों में 4500 मामलों की जांच लंबित पड़ी है, इससे बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसना भी मुश्किल हो रहा है।
गाजियाबाद में साल 2019 सितंबर माह में एंटी पावर थेफ्ट (बिजली थाना) को शुरू किया गया था। वसुंधरा सेक्टर-8 में शुरू हुए थाने में महज तीन महीने के अंदर बिजली चोरी के एक हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। इसके बाद अगले साल करीब साढ़े चार हजार बिजली चोरी के केस थाने में दर्ज हुए। ये साल कोरोना संक्रमण की शुरुआत का साल था, जब देश में संपूर्ण लॉकडाउन के बाद जांच बंद होने से जिले में बिजली चोरी अचानक से बढ़ गई। कोरोना की बंदिशें खत्म होने के बाद विद्युत निगम ने चेकिंग अभियान चलाकर बिजली चोरों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। इसके बाद साल 2021 में भी 2300 से अधिक बिजली चोरी के केस थाने में दर्ज हुए। ब्यूरो
विज्ञापन
बीते तीन साल में बिजली थाने में दर्ज एफआईआर :
वर्ष एफआईआर की संख्या
2019 (सितंबर से दिसंबर) 1112
2020 4427
2021 2303
लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर बने हुए हैं आगे
मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी, पसौंडा, कैला भट्टा, नंदग्राम, डासना-मसूरी में सबसे अधिक बिजली चोरी की जा रही है। हर दिन औसतन दो करोड़ की बिजली में चपत लग रही है। लोनी में कुछ घरों में तो मीटर को बंद करने के मामले भी विभाग ने पकड़े हैं।
विज्ञापन
2 से 3 मुकदमाें पर जेल
अधिकांश मामलों में शमन शुल्क जमा कराने के बाद बिजली चोरी के मामले निस्तारित कर दिए जाते हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि दो से तीन मुकदमे होने पर जेल भेजने का प्रावधान है। जिले में किसी पर अभी लगातार दो या तीन मुकदमे दर्ज नहीं हुए हैं।
थाने में सृजित पदों के मुकाबले स्टाफ
थाने में 24 सृजित पदों के मुकाबले 16 पुलिस कर्मियों का स्टाफ है। इनमें एक निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, नौ हेड कांस्टेबल और नौ कांस्टेबल की जरूरत है। वसुंधरा स्थित थाने में एक निरीक्षक, एक उपनिरीक्षक, पांच हेड कांस्टेबल और पांच कांस्टेबल के अलावा दो कंप्यूटर ऑपरेटर हैं।
इन मामलों में दर्ज होती है एफआईआर
- कनेक्शन काटने की कार्रवाई के बाद लाइन चालू करने पर
- घरेलू बिजली का व्यावसायिक प्रयोग करने पर
- मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करने पर
- कटिया डालकर बिजली चोरी करने पर
- एक कनेक्शन से अन्य घर में बिजली के इस्तेमाल पर
कोट ----------------------------
बिजली चोरी के करीब दो हजार मामलों में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। बिजली चोरी वाले इलाकों में भी लगातार गश्त कराई जाती है। निगम अधिकारियों की शिकायत पर फोर्स भी उपलब्ध कराते हैं। फिलहाल स्टाफ चुनाव ड्यूटी में है। स्टाफ बढ़ाने के लिए शासन से मांग कर चुके हैं। - राजकुमार, प्रभारी निरीक्षक, एंटी पावर थेफ्ट थाना