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किल्लत के बीच खाद्य तेलों पर महंगाई
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देसी घी 50 और रिफाइंड तेल 35 रुपये हुआ महंगा
गाजियाबाद। खाद्य तेलों पर किल्लत के बीच मूल्यवृद्धि शुरू हो गई है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को भी खाद्य तेलों की कमी और दाम बढ़ने का कारण माना जा रहा है। खाद्य तेल एसोसिएशन के मुताबिक बीते दस दिनों में रिफाइंड की सबसे अधिक कमी सामने आई है। जिले के अधिकांश व्यापारियों के पास रिफाइंड का स्टॉक काफी कम रह गया है। इसके दामों में भी 35 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।
देसी घी से लेकर रिफाइंड, वनस्पति घी के दाम 25 से 30 रुपये तक बढ़े हैं। बीते दिनों शादियों का सीजन भी बीते दो साल के मुकाबले काफी अच्छा रहने से व्यापारियों को खाद्य तेलों की अधिक मांग मिली। इससे देसी घी की मांग में 50 रुपये तक की वृद्धि देखी जा रही है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संदीप बंसल ने बताया कि ब्रांडेड देसी घी बटर ऑयल से तैयार किया जाता है। अधिकांश माल विदेशों से आता है। पहले ओमिक्रॉन और अब युद्ध के हालातों से बटर ऑयल की किल्लत ने देसी घी के दाम बढ़ गए हैं।
सन फ्लावर की 60 फीसदी पैदावार यूक्रेन में
खाद्य तेल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक रिफाइंड ऑयल बनाने में बड़े पैमान पर सन फ्लावर ऑयल का प्रयोग होता है। यूक्रेन वैश्विक स्तर पर सन फ्लावर का उत्पादक है। विश्व भर में सन फ्लावर ऑयल का 60 फीसदी उत्पादन यूक्रेन करता है। रूस से युद्ध के बाद सप्लाई चेन टूटने का असर रिफाइंड के दामों पर पड़ रहा है।
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पहले और अब के दाम
खाद्य तेल और घी 10 दिन पहले के दाम वर्तमान दाम
वनस्पति घी 140 रुपये लीटर 165 रुपये लीटर
रिफाइंड 130 रुपये लीटर 165 रुपये लीटर
सरसों का तेल 140 रुपये लीटर 150 रुपये लीटर
देसी घी 390 रुपये लीटर 440 रुपये लीटर
सोयाबीन के तेल की बढ़ी मांग
खाद्य तेल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि रिफाइंड की किल्लत के बाद अब मांग सोयाबीन के तेल पर आ गई है। इससे भी खाद्य तेलों के दाम बढ़े हैं। रिफाइंड की थोक बाजार में कमी है। आने वाले दिनों में रिफाइंड और देसी घी के दाम बढ़ेंगे।
सरसों की फसल आने से नियंत्रित होंगे दाम
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष संजय बिंदल ने बताया कि सरसों के तेल में अधिक महंगाई नहीं है। बाजार में सरसों की नई फसल आनी शुरू हो गई है। इसके बाद मूल्य वृद्धि पूरी तरह से नियंत्रित होगी।
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गाजियाबाद। खाद्य तेलों पर किल्लत के बीच मूल्यवृद्धि शुरू हो गई है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को भी खाद्य तेलों की कमी और दाम बढ़ने का कारण माना जा रहा है। खाद्य तेल एसोसिएशन के मुताबिक बीते दस दिनों में रिफाइंड की सबसे अधिक कमी सामने आई है। जिले के अधिकांश व्यापारियों के पास रिफाइंड का स्टॉक काफी कम रह गया है। इसके दामों में भी 35 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।
देसी घी से लेकर रिफाइंड, वनस्पति घी के दाम 25 से 30 रुपये तक बढ़े हैं। बीते दिनों शादियों का सीजन भी बीते दो साल के मुकाबले काफी अच्छा रहने से व्यापारियों को खाद्य तेलों की अधिक मांग मिली। इससे देसी घी की मांग में 50 रुपये तक की वृद्धि देखी जा रही है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संदीप बंसल ने बताया कि ब्रांडेड देसी घी बटर ऑयल से तैयार किया जाता है। अधिकांश माल विदेशों से आता है। पहले ओमिक्रॉन और अब युद्ध के हालातों से बटर ऑयल की किल्लत ने देसी घी के दाम बढ़ गए हैं।
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सन फ्लावर की 60 फीसदी पैदावार यूक्रेन में
खाद्य तेल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक रिफाइंड ऑयल बनाने में बड़े पैमान पर सन फ्लावर ऑयल का प्रयोग होता है। यूक्रेन वैश्विक स्तर पर सन फ्लावर का उत्पादक है। विश्व भर में सन फ्लावर ऑयल का 60 फीसदी उत्पादन यूक्रेन करता है। रूस से युद्ध के बाद सप्लाई चेन टूटने का असर रिफाइंड के दामों पर पड़ रहा है।
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पहले और अब के दाम
खाद्य तेल और घी 10 दिन पहले के दाम वर्तमान दाम
वनस्पति घी 140 रुपये लीटर 165 रुपये लीटर
रिफाइंड 130 रुपये लीटर 165 रुपये लीटर
सरसों का तेल 140 रुपये लीटर 150 रुपये लीटर
देसी घी 390 रुपये लीटर 440 रुपये लीटर
सोयाबीन के तेल की बढ़ी मांग
खाद्य तेल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि रिफाइंड की किल्लत के बाद अब मांग सोयाबीन के तेल पर आ गई है। इससे भी खाद्य तेलों के दाम बढ़े हैं। रिफाइंड की थोक बाजार में कमी है। आने वाले दिनों में रिफाइंड और देसी घी के दाम बढ़ेंगे।
सरसों की फसल आने से नियंत्रित होंगे दाम
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष संजय बिंदल ने बताया कि सरसों के तेल में अधिक महंगाई नहीं है। बाजार में सरसों की नई फसल आनी शुरू हो गई है। इसके बाद मूल्य वृद्धि पूरी तरह से नियंत्रित होगी।