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दो करोड़ देकर खींचे हाथ, खंडहर हो रहा भवन
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दो करोड़ देकर खींचे हाथ, खंडहर हो रहा भवन
गाजियाबाद। सिस्टम की सुस्त चाल और बदहाली देखनी है तो शहर में चार साल से किशोरियों के लिए बन रहे संप्रेक्षण गृह की यह कहानी जानिए। साल 2016 में आठ करोड़ के बजट वाल संपेक्षण गृह का निर्माण शुरू हुआ। इस पर दो करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन बाकी छह करोड़ रुपये न मिल पाने की वजह से काम बीच में ही बंद हो गया। चार साल में हुआ दो करोड़ का निर्माण खंडहर में बदल रहा है और सूबे के छह जिलों की किशोरियां गाजियाबाद में किराए की बिल्डिंग में चल रहे संप्रेक्षण गृह में रखी गई हैं।
बिहार के संप्रेक्षण गृह में किशोरियों के साथ अनाचार की घटना के बाद किशोरियों की सुरक्षा को लेकर सूबे में भी शासन अलर्ट हो गया। प्रदेश के सभी संप्रेक्षण गृहों का निरीक्षण कर सीसीटीवी कैमरे आदि लगवाए गए। गाजियाबाद में डासना के कनौजा गांव में वर्ष 2016-17 से संप्रेक्षण गृह की बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ। इस संप्रेक्षण गृह केनिर्माण के लिए कुल आठ करोड़ का बजट प्रस्तावित था। जिसमें से लगभग दो करोड़ के बजट का कार्य भी हो गया है। बाकी छह करोड़ का बजट रह रहा है जो शासन से आना था। दो करोड़ की किश्त के बाद एक भी किश्त नहीं आई जिसकी वजह से पिछले पांच साल से यह कार्य ठप पड़ा है। निर्माण कार्य में देरी से पांच वर्षों में इसकी लागत और बढ़ भी सकती है। विभाग से इसके बजट के लिए डिमांड भी भेजी गई है।
खेलने का मैदान तक नहीं
नए संप्रेक्षण गृह में बालिकाओं के खेलने के लिए मैदान सहित वोकेशनल ट्रेनिंग की सुविधा, काउंसिलंग सुविधा, अधीक्षक का कमरा, गार्ड रूम से लेकर सभी सुविधाएं होंगी।अभी गाजियाबाद के संप्रेक्षण गृह में छह मंडल की किशोरियां रह रही हैं। इनके लिए एक डाइनिंग हॉल, एक बालिकाओं के सोने का कमरा , एक ट्रेनिंग हाल आदि है लेकिन खेलने के लिए मैदान और गार्ड रूम नहीं है।
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कोट्स
शासन से इसके लिए बजट की किश्त आएगी तो इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है। छह करोड़ के करीब बजट अभी आना बाकी है।
विकास चंद्रा, डीपीओ
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गाजियाबाद। सिस्टम की सुस्त चाल और बदहाली देखनी है तो शहर में चार साल से किशोरियों के लिए बन रहे संप्रेक्षण गृह की यह कहानी जानिए। साल 2016 में आठ करोड़ के बजट वाल संपेक्षण गृह का निर्माण शुरू हुआ। इस पर दो करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन बाकी छह करोड़ रुपये न मिल पाने की वजह से काम बीच में ही बंद हो गया। चार साल में हुआ दो करोड़ का निर्माण खंडहर में बदल रहा है और सूबे के छह जिलों की किशोरियां गाजियाबाद में किराए की बिल्डिंग में चल रहे संप्रेक्षण गृह में रखी गई हैं।
बिहार के संप्रेक्षण गृह में किशोरियों के साथ अनाचार की घटना के बाद किशोरियों की सुरक्षा को लेकर सूबे में भी शासन अलर्ट हो गया। प्रदेश के सभी संप्रेक्षण गृहों का निरीक्षण कर सीसीटीवी कैमरे आदि लगवाए गए। गाजियाबाद में डासना के कनौजा गांव में वर्ष 2016-17 से संप्रेक्षण गृह की बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ। इस संप्रेक्षण गृह केनिर्माण के लिए कुल आठ करोड़ का बजट प्रस्तावित था। जिसमें से लगभग दो करोड़ के बजट का कार्य भी हो गया है। बाकी छह करोड़ का बजट रह रहा है जो शासन से आना था। दो करोड़ की किश्त के बाद एक भी किश्त नहीं आई जिसकी वजह से पिछले पांच साल से यह कार्य ठप पड़ा है। निर्माण कार्य में देरी से पांच वर्षों में इसकी लागत और बढ़ भी सकती है। विभाग से इसके बजट के लिए डिमांड भी भेजी गई है।
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खेलने का मैदान तक नहीं
नए संप्रेक्षण गृह में बालिकाओं के खेलने के लिए मैदान सहित वोकेशनल ट्रेनिंग की सुविधा, काउंसिलंग सुविधा, अधीक्षक का कमरा, गार्ड रूम से लेकर सभी सुविधाएं होंगी।अभी गाजियाबाद के संप्रेक्षण गृह में छह मंडल की किशोरियां रह रही हैं। इनके लिए एक डाइनिंग हॉल, एक बालिकाओं के सोने का कमरा , एक ट्रेनिंग हाल आदि है लेकिन खेलने के लिए मैदान और गार्ड रूम नहीं है।
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कोट्स
शासन से इसके लिए बजट की किश्त आएगी तो इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। शासन को बजट की डिमांड भेजी गई है। छह करोड़ के करीब बजट अभी आना बाकी है।
विकास चंद्रा, डीपीओ