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Ghaziabad News: बिना रिमांड के गिरफ्तारी, गुजरात पुलिस पर केस दर्ज
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बिना रिमांड के गिरफ्तारी, गुजरात पुलिस पर केस दर्ज
गाजियाबाद। कोर्ट से बिना रिमांड लिए विजयनगर क्षेत्र से एक व्यक्ति को उसके घर से आधी रात को जबरन गिरफ्तार कर विजयनगर थाने में ले जाकर मारपीट करने और फिर गुजरात ले जाने का मामला सामने आया है। आरोप गुजरात सूरत के सिटी थाने की पुलिस पर है। मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पत्नी मोनिका ने गुजरात पुलिस के खिलाफ कोर्ट का सहारा लेकर विजयनगर थाने में अपहरण, मारपीट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया है। सेक्टर-9 निवासी मोनिका अग्रवाल का कहना है कि 25 दिसंबर 2022 की रात करीब एक बजे कुछ पुलिसकर्मी उनके घर आए। उन्होंने खुद को गुजरात के जिला सूरत की साइबर टीम से बताया। जिसमें एसआई यूएम महाराज सिंह, एएसआई पृथ्वीराज वघेला, हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह और कांस्टेबल कौशिक के अलावा पांच और पुलिसकर्मी थे। आरोप है कि सभी पुलिसकर्मी उनके घर में जबरन घुस गए और अभद्रता करने लगे। इसके बाद वे उनके पति देवेंद्र गुप्ता को बिस्तर से उठाकर विजयनगर थाने ले गए। थाने पहुंचकर उन्होंने पति को पकड़कर लाने के बारे में पूछा तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भगा दिया और एक कमरे में ले जाकर उनके पति की बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने उसी समय यूपी-112 पर सूचना दी। मौके पर आए पुलिसकर्मी भी बिना मदद किए चले गए। विजयनगर थाना पुलिस ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि उनके पति को सुबह छोड़ देंगे। अगले दिन वह सुबह थाने पहुंची तो पति वहां नहीं मिले। दोपहर को पुलिस ने बताया कि उनके पति को वजीराबाद दिल्ली ले जाया गया है। शाम तक वापस आ जाएंगे।
डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल ने बताया कि सूरत से पुलिस विजयनगर थाने आई थी। उनके साथ एक टीम विजयनगर थाने से भेजी गई थी। लेकिन सूरत पुलिस प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर एक व्यक्ति को ले गई। इस मामले में जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विजयनगर पुलिस ने कोर्ट से कहा, गुजरात पुलिस ने नहीं दी सूचना
मोनिका का कहना है विजयनगर पुलिस ने जब उनकी मदद नहीं की तो उन्होंने कोर्ट का सहारा लेकर विजयनगर पुलिस से जवाब मांगा। विजयनगर पुलिस ने कोर्ट में जवाब दिया कि गुजरात पुलिस स्थानीय थाने को सूचना दिए बिना देवेंद्र गुप्ता को साथ ले गई है। मोनिका अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने गुजरात पुलिस के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का सहारा लेकर गुजरात पुलिस के एसआई यूएम महाराज सिंह, एएसआई पृथ्वीराज वघेला, हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह और कांस्टेबल कौशिक के अलावा पांच अज्ञात के खिलाफ विजयनगर पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश कराए।
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आदेश के बाद भी नहीं दर्ज की एफआईआर
मोनिका के अधिवक्ता भवनीश गोला का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी विजयनगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद कोर्ट में अवमानना की अर्जी लगाई तो कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने को कहा, लेकिन पुलिस ने फिर भी केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से मामले में वाद चलाने को कहा तो कोर्ट से नोटिस जाने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया।
75 लाख की ठगी का था मामला
पुलिस ने बताया कि सूरत से पुलिस 75 लाख रुपये की ठगी के एक मामले में विजयनगर पहुंची थी। इस ठगी के मामले में इस्तेमाल किए गए सिम से देवेंद्र गुप्ता का लिंक मिला था। इसी के आधार पर पुलिस विजयनगर थाने देवेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार करने आई।
कैमरे कई महीनों से बताए खराब
मोनिका के अधिवक्ता भवनीश गोला ने बताया कि पुलिस देवेंद्र गुप्ता को पहले विजयनगर थाने लेकर गई थी। इस मामले में कोर्ट में पुलिस से सीसीटीवी कैमरों के बारे में पूछा तो जानकारी हुई कि कैमरे कई महीनों से खराब हैं। इसके बाद थाने के पूर्व थाना प्रभारी से भी सवाल किया गया है।
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गाजियाबाद। कोर्ट से बिना रिमांड लिए विजयनगर क्षेत्र से एक व्यक्ति को उसके घर से आधी रात को जबरन गिरफ्तार कर विजयनगर थाने में ले जाकर मारपीट करने और फिर गुजरात ले जाने का मामला सामने आया है। आरोप गुजरात सूरत के सिटी थाने की पुलिस पर है। मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पत्नी मोनिका ने गुजरात पुलिस के खिलाफ कोर्ट का सहारा लेकर विजयनगर थाने में अपहरण, मारपीट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया है। सेक्टर-9 निवासी मोनिका अग्रवाल का कहना है कि 25 दिसंबर 2022 की रात करीब एक बजे कुछ पुलिसकर्मी उनके घर आए। उन्होंने खुद को गुजरात के जिला सूरत की साइबर टीम से बताया। जिसमें एसआई यूएम महाराज सिंह, एएसआई पृथ्वीराज वघेला, हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह और कांस्टेबल कौशिक के अलावा पांच और पुलिसकर्मी थे। आरोप है कि सभी पुलिसकर्मी उनके घर में जबरन घुस गए और अभद्रता करने लगे। इसके बाद वे उनके पति देवेंद्र गुप्ता को बिस्तर से उठाकर विजयनगर थाने ले गए। थाने पहुंचकर उन्होंने पति को पकड़कर लाने के बारे में पूछा तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें भगा दिया और एक कमरे में ले जाकर उनके पति की बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने उसी समय यूपी-112 पर सूचना दी। मौके पर आए पुलिसकर्मी भी बिना मदद किए चले गए। विजयनगर थाना पुलिस ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि उनके पति को सुबह छोड़ देंगे। अगले दिन वह सुबह थाने पहुंची तो पति वहां नहीं मिले। दोपहर को पुलिस ने बताया कि उनके पति को वजीराबाद दिल्ली ले जाया गया है। शाम तक वापस आ जाएंगे।
डीसीपी नगर निपुण अग्रवाल ने बताया कि सूरत से पुलिस विजयनगर थाने आई थी। उनके साथ एक टीम विजयनगर थाने से भेजी गई थी। लेकिन सूरत पुलिस प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर एक व्यक्ति को ले गई। इस मामले में जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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विजयनगर पुलिस ने कोर्ट से कहा, गुजरात पुलिस ने नहीं दी सूचना
मोनिका का कहना है विजयनगर पुलिस ने जब उनकी मदद नहीं की तो उन्होंने कोर्ट का सहारा लेकर विजयनगर पुलिस से जवाब मांगा। विजयनगर पुलिस ने कोर्ट में जवाब दिया कि गुजरात पुलिस स्थानीय थाने को सूचना दिए बिना देवेंद्र गुप्ता को साथ ले गई है। मोनिका अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने गुजरात पुलिस के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का सहारा लेकर गुजरात पुलिस के एसआई यूएम महाराज सिंह, एएसआई पृथ्वीराज वघेला, हेड कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह और कांस्टेबल कौशिक के अलावा पांच अज्ञात के खिलाफ विजयनगर पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश कराए।
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आदेश के बाद भी नहीं दर्ज की एफआईआर
मोनिका के अधिवक्ता भवनीश गोला का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी विजयनगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद कोर्ट में अवमानना की अर्जी लगाई तो कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने को कहा, लेकिन पुलिस ने फिर भी केस दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से मामले में वाद चलाने को कहा तो कोर्ट से नोटिस जाने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया।
75 लाख की ठगी का था मामला
पुलिस ने बताया कि सूरत से पुलिस 75 लाख रुपये की ठगी के एक मामले में विजयनगर पहुंची थी। इस ठगी के मामले में इस्तेमाल किए गए सिम से देवेंद्र गुप्ता का लिंक मिला था। इसी के आधार पर पुलिस विजयनगर थाने देवेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार करने आई।
कैमरे कई महीनों से बताए खराब
मोनिका के अधिवक्ता भवनीश गोला ने बताया कि पुलिस देवेंद्र गुप्ता को पहले विजयनगर थाने लेकर गई थी। इस मामले में कोर्ट में पुलिस से सीसीटीवी कैमरों के बारे में पूछा तो जानकारी हुई कि कैमरे कई महीनों से खराब हैं। इसके बाद थाने के पूर्व थाना प्रभारी से भी सवाल किया गया है।