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बदइंतजामी : तीन घंटे में सैंपल और सात दिन में मिल पा रही है कोरोना जांच रिपोर्ट
Thu, 15 Apr 2021 01:13 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 15 Apr 2021 01:13 AM IST
सार
- एक साल में सिर्फ 9.44 लाख की जांच, पूरी आबादी में जांच करने में लग जाएंगे छह साल
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सोशल डिस्टेंसिंग की कोई परवाह नहीं...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच इंतजाम कम पड़ने लगे हैं। जांच से लेकर रिपोर्ट और अस्पताल में भर्ती होने तक लंबी वेटिंग है। हाल यह है कि कोरोना की जांच के लिए सैंपल देने के लिए ढाई से तीन घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है। आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लग रहा है। संदिग्ध मरीजों की रैपिड एंटीजन किट से जांच की जा रही है। कोरोना की पुष्टि होने पर अस्पताल में भर्ती करना आसान नहीं है। शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों में बेड खाली नहीं है।
संक्रमण के बीच जांच की रफ्तार धीमी होने से लोगों को समय पर इलाज मिल पाने में दिक्कत हो रही है। जांच में देरी के कारण संक्रमण कहीं अधिक तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। क्योंकि बड़ी संख्या में आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लेकर मरीजों होम आइसोलेशन में भेजे दिया जाता है। लंबे समय तक रिपोर्ट न आने के कारण मरीज घर में लापरवाही करता है, जिससे संक्रमण बाकी लोगों में भी फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक दिन में 1700 आरटीपीसीआर जांच के सापेक्ष 1925 और 4127 एंटीजन जांच की जा रही है। जबकि जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद जांच नहीं हो रही है।
पूरी आबादी की जांच करने में लगेंगे कई साल
फैल रहे संक्रमण के बीच अब बड़ी आबादी की जांच करने की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा समय में जांच की गति बेहद धीमी है। अगर इसी गति से जांच की जाती है तो पूरी आबादी की जांच करने में करीब पांच साल का समय लगेगा। वर्तमान में जिले की आबादी करीब 45 लाख है और स्वास्थ्य विभाग 13 महीनों में 9.44 लाख सैंपलों की जांच कर पाया है। आंकड़ों से साफ है कि संक्रमण के सापेक्ष पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है।
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जांच का हाल
- अभी जांच का दायरा बेहद सीमित है।
- कांटेक्ट ट्रेसिंग पूरी तरह नहीं हो रही।
- कंटेनमेंट जोन में भी सिर्फ समिति दायरे में सैंपलिंग।
- जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद नहीं लिए जा रहे सैंपल।
कब हो रही जांच
- लक्षण मिलने या विभागीय तौर पर रिपोर्ट मांगे जाने पर ही जांच।
- विदेश जाने, कुंभ या किसी दूसरे राज्य में जाने पर
- ऑपरेशन या प्रसव होने से पहले
14 दिन में संक्रमण दर 5.13 गुना हुई अधिक
कोरोना की पहली लहर लगभग समाप्त होने पर संक्रमण दर मात्र 0.69 फीसदी हो गई थी, लेकिन लापरवाही के चलते बीते 14 दिन में ही 5.13 गुना बढ़कर संक्रमण दर 3.53 पहुंच गई। इस अवधि में 1523 नए संक्रमति मिले हैं। इसके साथ ही स्वस्थ होने वालों की दर में कमी आई है। मार्च में स्वस्थ्य होने वालों की दर 98.51 थी जो अब 95.22 रह गई है।
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संक्रमण के बीच जांच की रफ्तार धीमी होने से लोगों को समय पर इलाज मिल पाने में दिक्कत हो रही है। जांच में देरी के कारण संक्रमण कहीं अधिक तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। क्योंकि बड़ी संख्या में आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लेकर मरीजों होम आइसोलेशन में भेजे दिया जाता है। लंबे समय तक रिपोर्ट न आने के कारण मरीज घर में लापरवाही करता है, जिससे संक्रमण बाकी लोगों में भी फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक दिन में 1700 आरटीपीसीआर जांच के सापेक्ष 1925 और 4127 एंटीजन जांच की जा रही है। जबकि जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद जांच नहीं हो रही है।
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पूरी आबादी की जांच करने में लगेंगे कई साल
फैल रहे संक्रमण के बीच अब बड़ी आबादी की जांच करने की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा समय में जांच की गति बेहद धीमी है। अगर इसी गति से जांच की जाती है तो पूरी आबादी की जांच करने में करीब पांच साल का समय लगेगा। वर्तमान में जिले की आबादी करीब 45 लाख है और स्वास्थ्य विभाग 13 महीनों में 9.44 लाख सैंपलों की जांच कर पाया है। आंकड़ों से साफ है कि संक्रमण के सापेक्ष पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है।
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जांच का हाल
- अभी जांच का दायरा बेहद सीमित है।
- कांटेक्ट ट्रेसिंग पूरी तरह नहीं हो रही।
- कंटेनमेंट जोन में भी सिर्फ समिति दायरे में सैंपलिंग।
- जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद नहीं लिए जा रहे सैंपल।
कब हो रही जांच
- लक्षण मिलने या विभागीय तौर पर रिपोर्ट मांगे जाने पर ही जांच।
- विदेश जाने, कुंभ या किसी दूसरे राज्य में जाने पर
- ऑपरेशन या प्रसव होने से पहले
14 दिन में संक्रमण दर 5.13 गुना हुई अधिक
कोरोना की पहली लहर लगभग समाप्त होने पर संक्रमण दर मात्र 0.69 फीसदी हो गई थी, लेकिन लापरवाही के चलते बीते 14 दिन में ही 5.13 गुना बढ़कर संक्रमण दर 3.53 पहुंच गई। इस अवधि में 1523 नए संक्रमति मिले हैं। इसके साथ ही स्वस्थ होने वालों की दर में कमी आई है। मार्च में स्वस्थ्य होने वालों की दर 98.51 थी जो अब 95.22 रह गई है।
नहीं है अस्पतालों में जगह, दिल्ली रेफर हो रहे मरीज
होम आइसोलेशन में महज 10 से 15 प्रतिशत मरीज ही हैं। तेजी से खराब हो रहे हालात के बीच स्थिति यह है कि जिले के 15 निजी कोविड अस्पतालों में बेड लगभग फुल हो चुके हैं। दो सरकारी अस्पतालों में 100 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। अब मरीजों को दिल्ली रेफर किया जा रहा है, जबकि दिल्ली में पहले से हालात बदतर हैं। स्वास्थ्य विभाग सरकारी स्तर पर बेड बढ़ाने के प्रयासों में जुटा है।
जरूरत बढ़ने पर बढ़ाएंगे दायरा
- अभी स्वास्थ्य विभाग के पास पूरी व्यवस्था है। हम लक्ष्य से अधिक जांच कर रहे हैं। इसी का कारण है कि संक्रमित होने वाले लोगों की दर तेजी से बढ़ रही है। बाकी आवश्यकता पड़ने पर जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा लेकिन अभी ऐसे हालात नहीं हैं। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
पूरी क्षमता से हो रही जांच
- आवश्यकता के हिसाब से पूरी जांच की जा रही हैं। अगर जरूरत पड़ती है तो जांच का दायरा भी बढ़ाया जाएगा लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी क्षमता से जांच कर रहा है। ज्यादा संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए रैपिड एंटीजन किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
छह महीने में संक्रमण दर और रिकवरी रेट
माह संक्रमण दर रिकवरी रेट
नवंबर - 4.14 - 93.00
दिसंबर - 2.99 - 98.00
जनवरी - 0.74 - 99.22
फरवरी - 0.31 - 99.40
मार्च - 0.69 - 98.51
अप्रैल - 1.90 - 95.22
अप्रैल में मिले नए संक्रमित
तिथि संक्रमित
1 अप्रैल 19
2 अप्रैल 73
3 अप्रैल 55
4 अप्रैल 63
5 अप्रैल 46
6 अप्रैल 82
7 अप्रैल 76
8 अप्रैल 108
9 अप्रैल 73
10 अप्रैल 159
11 अप्रैल 155
12 अप्रैल 187
13 अप्रैल 199
14 अप्रैल 275
जरूरत बढ़ने पर बढ़ाएंगे दायरा
- अभी स्वास्थ्य विभाग के पास पूरी व्यवस्था है। हम लक्ष्य से अधिक जांच कर रहे हैं। इसी का कारण है कि संक्रमित होने वाले लोगों की दर तेजी से बढ़ रही है। बाकी आवश्यकता पड़ने पर जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा लेकिन अभी ऐसे हालात नहीं हैं। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
पूरी क्षमता से हो रही जांच
- आवश्यकता के हिसाब से पूरी जांच की जा रही हैं। अगर जरूरत पड़ती है तो जांच का दायरा भी बढ़ाया जाएगा लेकिन स्वास्थ्य विभाग पूरी क्षमता से जांच कर रहा है। ज्यादा संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए रैपिड एंटीजन किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
छह महीने में संक्रमण दर और रिकवरी रेट
माह संक्रमण दर रिकवरी रेट
नवंबर - 4.14 - 93.00
दिसंबर - 2.99 - 98.00
जनवरी - 0.74 - 99.22
फरवरी - 0.31 - 99.40
मार्च - 0.69 - 98.51
अप्रैल - 1.90 - 95.22
अप्रैल में मिले नए संक्रमित
तिथि संक्रमित
1 अप्रैल 19
2 अप्रैल 73
3 अप्रैल 55
4 अप्रैल 63
5 अप्रैल 46
6 अप्रैल 82
7 अप्रैल 76
8 अप्रैल 108
9 अप्रैल 73
10 अप्रैल 159
11 अप्रैल 155
12 अप्रैल 187
13 अप्रैल 199
14 अप्रैल 275