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तीर्थंकर महावीर विवि के चांसलर सहित आठ के खिलाफ समन
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तीर्थंकर महावीर विवि के चांसलर सहित आठ के खिलाफ समन
गाजियाबाद। मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में आठ साल पहले हुई छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई कोर्ट में मुकदमा चलेगा। इस मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को सीबीआई के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवांग सिंह ने खारिज कर दिया। अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट में गवाह बने विवि के चांसलर, वाइस चांसलर, डायरेक्टर, हॉस्टल वार्डन, मृतक छात्रा के साथ पढ़ने वाली चार छात्राओं को आरोपी बनाया है। अदालत ने सभी को हत्या, हत्या के सबूत नष्ट करने और षड्यंत्र की धाराओं में समन जारी किया है। परिजनों ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में याचिका डाली थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 16 मार्च तय की है।
फरीदाबाद निवासी एक छात्रा मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। छात्रा की छह जुलाई 2013 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। छात्रा के पिता ने हत्या का आरोप लगाते हुए सात जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर मनीष जैन ने छात्रा का शोषण किया। विरोध करने पर हत्या कर दी गई। इसमें गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन सुषमा भदौरिया, डायरेक्टर प्रशासन अभिषेक कपूर व दो छात्राओं पर षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया था, जबकि चांसलर सुरेश जैन पर मामले को छुपाने का आरोप है। कॉलेज प्रशासन आत्महत्या का मामला बताकर केस को कमजोर करने के प्रयास में जुटा था। मृतका के पिता की शिकायत पर मुरादाबाद के पकबड़ा थाने की पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पीड़ित पिता ने पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की, इसके बाद मामला सीबीसीआईडी बरेली को ट्रांसफर कर दिया गया था। इस जांच से भी मृतक छात्रा के पिता संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच की मांग की, बाद में प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी। 25 जुलाई 2013 को केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। सीबीआई ने 4 सितंबर 2013 को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर थी। जांच में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर मनीष जैन, डायरेक्टर (प्रशासन) अभिषेक कपूर, कॉलेज की वार्डन सुषमा भदौरिया समेत आठ लोगों के बयान दर्ज किए गए। बाद में 30 दिसंबर 2015 को केस में क्लोजर रिपोर्ट लगाकर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सीबीआई कोर्ट में पेश कर दी थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवांग सिंह की अदालत ने सोमवार को क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए परिस्थितिजन्य साक्ष्य को आधार मानते हुए हत्या, सबूत नष्ट करने और षड्यंत्र की धाराओं में यूनिवर्सिटी के चांसलर, वाइस चांसलर समेत आठ लोगों के खिलाफ समन जारी किया है।
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गाजियाबाद। मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में आठ साल पहले हुई छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई कोर्ट में मुकदमा चलेगा। इस मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को सीबीआई के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवांग सिंह ने खारिज कर दिया। अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट में गवाह बने विवि के चांसलर, वाइस चांसलर, डायरेक्टर, हॉस्टल वार्डन, मृतक छात्रा के साथ पढ़ने वाली चार छात्राओं को आरोपी बनाया है। अदालत ने सभी को हत्या, हत्या के सबूत नष्ट करने और षड्यंत्र की धाराओं में समन जारी किया है। परिजनों ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ अदालत में याचिका डाली थी। अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 16 मार्च तय की है।
फरीदाबाद निवासी एक छात्रा मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। छात्रा की छह जुलाई 2013 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। छात्रा के पिता ने हत्या का आरोप लगाते हुए सात जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर मनीष जैन ने छात्रा का शोषण किया। विरोध करने पर हत्या कर दी गई। इसमें गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन सुषमा भदौरिया, डायरेक्टर प्रशासन अभिषेक कपूर व दो छात्राओं पर षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया था, जबकि चांसलर सुरेश जैन पर मामले को छुपाने का आरोप है। कॉलेज प्रशासन आत्महत्या का मामला बताकर केस को कमजोर करने के प्रयास में जुटा था। मृतका के पिता की शिकायत पर मुरादाबाद के पकबड़ा थाने की पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पीड़ित पिता ने पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की, इसके बाद मामला सीबीसीआईडी बरेली को ट्रांसफर कर दिया गया था। इस जांच से भी मृतक छात्रा के पिता संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच की मांग की, बाद में प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी। 25 जुलाई 2013 को केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। सीबीआई ने 4 सितंबर 2013 को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर थी। जांच में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर मनीष जैन, डायरेक्टर (प्रशासन) अभिषेक कपूर, कॉलेज की वार्डन सुषमा भदौरिया समेत आठ लोगों के बयान दर्ज किए गए। बाद में 30 दिसंबर 2015 को केस में क्लोजर रिपोर्ट लगाकर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सीबीआई कोर्ट में पेश कर दी थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवांग सिंह की अदालत ने सोमवार को क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए परिस्थितिजन्य साक्ष्य को आधार मानते हुए हत्या, सबूत नष्ट करने और षड्यंत्र की धाराओं में यूनिवर्सिटी के चांसलर, वाइस चांसलर समेत आठ लोगों के खिलाफ समन जारी किया है।
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