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Ghaziabad News: पति ने पत्नी पर ढाई लाख रुपये और गहने चोरी करने का लगाया आरोप
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गाजियाबाद। पत्नी पर ढाई लाख रुपये नकद और सोने की चेन व अंगूठी चोरी करने का आरोप लगाने वाले पति की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या एक ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश देने से इन्कार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मामला पारिवारिक और वैवाहिक विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। सुनवाई के लिए आठ दिसंबर की तारीख लगाई है।
मामले में आवेदक माधव माहेश्वरी ने अपनी पत्नी नैनी गुप्ता के खिलाफ धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप है कि दोनों का विवाह 23 फरवरी 2025 को हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। आवेदक का कहना है कि शादी के बाद पत्नी उस पर और उसके माता-पिता की संपत्ति को लेकर दबाव बनाने लगी। आरोप है कि पत्नी ने नेहरूनगर स्थित मकान अपने नाम कराने की मांग की और मांग पूरी न होने पर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। पति के अनुसार 9 अप्रैल 2026 को पत्नी झगड़े के बाद घर की अलमारी में रखे ढाई लाख रुपये नकद, सोने की चेन और अंगूठी लेकर चली गई। बाद में मध्यस्थता केंद्र मुजफ्फरनगर में मुलाकात के दौरान उसने सामान और रकम लौटाने से इन्कार कर दिया। मामले में पुलिस और उच्च अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने थाना कोतवाली से रिपोर्ट तलब की थी, जिसमें मुकदमा दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार प्रथम ने कहा कि मामले से जुड़े तथ्य आवेदक और उसके गवाहों के व्यक्तिगत ज्ञान में हैं और वे न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
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मामले में आवेदक माधव माहेश्वरी ने अपनी पत्नी नैनी गुप्ता के खिलाफ धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप है कि दोनों का विवाह 23 फरवरी 2025 को हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। आवेदक का कहना है कि शादी के बाद पत्नी उस पर और उसके माता-पिता की संपत्ति को लेकर दबाव बनाने लगी। आरोप है कि पत्नी ने नेहरूनगर स्थित मकान अपने नाम कराने की मांग की और मांग पूरी न होने पर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। पति के अनुसार 9 अप्रैल 2026 को पत्नी झगड़े के बाद घर की अलमारी में रखे ढाई लाख रुपये नकद, सोने की चेन और अंगूठी लेकर चली गई। बाद में मध्यस्थता केंद्र मुजफ्फरनगर में मुलाकात के दौरान उसने सामान और रकम लौटाने से इन्कार कर दिया। मामले में पुलिस और उच्च अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने थाना कोतवाली से रिपोर्ट तलब की थी, जिसमें मुकदमा दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार प्रथम ने कहा कि मामले से जुड़े तथ्य आवेदक और उसके गवाहों के व्यक्तिगत ज्ञान में हैं और वे न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
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