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पढ़ाई में आगे, स्पोर्ट्स में पीछे
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 21 Feb 2017 10:44 PM IST
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स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। एकेटीयू और सीसीएसयू की टॉपर्स लिस्ट में भले ही गाजियाबाद के स्टूडेंट्स का दबदबा हो। लेकिन स्पोर्ट्स में खिलाड़ी पिछड़ते जा रहे हैं। मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूती देने में खेलों का बड़ा योगदान रहा है।
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इसके बावजूद प्रोत्साहन और सुविधाओं की कमी के चलते बाकी खिलाड़ी भी खेलों से दूर हो रहे हैं। सरकार का खेल बजट इसकी कहानी भी बयान करता है। एक ओर स्कूलों में पैरेंट्स बच्चों को खेलों में डालने को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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दूसरी ओर इंजीनियरिंग व डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के अभिभावक अभी खेलों से ज्यादा पढ़ाई पर अधिक जोर देते हैं। प्रतिस्पर्धा के युग में स्टूडेंट्स को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में खेलों को अनिवार्य किए जाने की जरूरत है।
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महानगर के अधिकांश डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेजों के पास खेल मैदान की कमी है। सरकार ने तो खेलों को आखिरी पाएदान पर रखा है। दूसरी ओर शैक्षिक संस्थान भी खेलों को अपनी आखिरी श्रेणी में जगह देते हैं।
प्रदेश स्तर के साथ संस्थानों में भी खेल सुविधाओं का काफी अभाव है। यहां न तो मानकों के अनुसार खेल सुविधाएं हैं, न प्रशिक्षक और न ही खिलाड़ियों के लिए उचित डाइट। पहले हर साल गाजियाबाद की झोली में सैकड़ों पदक आते थे, लेकिन बीते चार-पांच सालों में पदक की संख्या घटती जा रही है। स्टूडेंट्स के ओवरऑल विकास के लिए खेलों का बजट बढ़ाने और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
स्पोर्ट्स एक्टीविटीज हो कंपलसरी
प्रदेश में खिलाड़ियों का हाल बेहाल है। सुविधाओं और प्रोत्साहन की कमी के चलते खिलाड़ी हतोत्साहित हो रहे हैं। सरकार के खेल बजट में भी खेलों का नंबर सबसे बाद में आता है। खिलाड़ियों को न तो उचित ट्रेनिंग मिलती है, और न ही डाइट।
खेल संघों में राजनीतिक की जगह खिलाड़ियों को जगह मिलनी चाहिए। एकेटीयू ने स्पोर्ट्स फेस्ट की अच्छी पहल शुरू की है। खिलाड़ियों को मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए स्कूल-कॉलेजों में खेल को कंपलसरी करने की जरूरत है। - उदय सिंगटा, स्पोर्ट्स कन्वीनर एकेटीयू व खेल अधिकारी एमआईएस ईसी
खेलों के प्रति अभिभावक अभी भी नहीं जागरूक
1. स्कूल स्तर पर बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने में अभिभावक आगे हैं। लेकिन डिग्री व इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के पैरेंट्स स्पोर्ट्स को लेकर अभी भी जागरूक नहीं है। - राजेंद्र सिंह, एथलेटिक्स कोच
2. प्रदेश में खेलों का नंबर सबसे बाद में आता है। खेल सुविधाओं की बात हो या फिर अच्छे प्रशिक्षकों की। सभी में हम अन्य प्रदेशों से पीछे हैं। कॉलेजों को भी खेल मैदान और प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर प्रोत्साहित करना चाहिए। - अजय कुमार, एथलेटिक्स कोच
3. खेलों में पैसे की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते खिलाड़ियों का मनोबल गिर रहा है। खेल संघों में अनुभवी खिलाड़ियों को जगह दी जानी चाहिए। सरकार को भी खेल बजट में वृद्धि कर संदेश देना चाहिए। - मनप्रीत सिंह, बास्केट बॉल कोच
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खेलों के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार
- अभिभावकों में अवेयरनेस की कमी
- अनुभवी खेल प्रशिक्षकों का अभाव
- मानकों के अनुसार खेल सुविधाएं नहीं
- खेल मैदान व स्टेडियम नहीं होना
- खिलाड़ियों को तय डाइट उपलब्ध नहीं होना
- खेल संघों में राजनीतिक हस्तक्षेप
- खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और फंड की कमी
- खेलाें में बजट का नहीं बढ़ना
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खेलों में सुधार के लिए जरूरी
- स्कूल-कॉलेजों में स्पोर्ट्स एक्टिविटी हों कंपलसरी
- खेल के मैदान को विकसित किया जाए
- अनुभवी खेल प्रशिक्षकों की हो नियुक्ति
- खेल से जुड़े आधुनिक सामान व सुविधाएं बढ़ायी जाएं
- खिलाड़ियों की डाइट के लिए बजट बढ़े
- खेल संघों में अनुभवी खिलाड़ियों को मिले जगह