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Ghaziabad News: फ्रंटियर मेल बम धमाका... 27 साल में 19 फीसदी हुई गवाही
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। फ्रंटियर मेल (गोल्डन टैंपल एक्सप्रेस) में साहिबाबाद स्टेशन के पास हुए बम विस्फोट मामले में 27 साल में सिर्फ 19 फीसदी गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं। 59 गवाहों में से सिर्फ 12 की गवाही पूरी हुई है। 13वें गवाह का बयान दर्ज कराने के लिए अपर जिला सत्र न्यायालय-4 में छह फरवरी की तारीख लगी है। ट्रेन में बम विस्फोट का आरोप आतंकी अब्दुल करीम टुंडा पर है। वह भी मौजूदा समय में अजमेर की सेंट्रल जेल में एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश गवाह ट्रेन यात्री थे जो पंजाब प्रांत के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी गवाह अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। मौजूदा समय में यह भी जानकारी नहीं है कि कितने गवाह जीवित हैं और कितने की मौत हो चुकी है। अदालत से मिली जानकारी के अनुसार अब तक मुकदमा कई अदालतों में सुनवाई के लिए ट्रांसफर किया जा चुका है, लेकिन गवाहों के बयान पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
लंबे समय से नहीं पेश हो रहे गवाह
बचाव पक्ष ने बताया कि पुलिस ने घटना में अधिकांश गवाह ट्रेन में मौजूदा यात्रियों को बनाया था, जो पंजाब के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। कई बार नोटिस भेजने के बावजूद गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। एक गवाह को अदालत में तलब करने में ही पांच से छह महीने बीत जाते हैं, इसके बावजूद वह पेश नहीं होते हैं। इस कारण से मामले की सुनवाई भी लंबित है।
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एक सिपाही की मौत व 12 यात्री हुए थे घायल
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 1997 में मुंबई से अमृतसर की तरफ जा रही फ्रंटियर मेल ट्रेन के सामान्य कोच में साहिबाबाद स्टेशन के पास बम विस्फोट हुआ था। इसमें एक सिपाही समेत 12 लोग घायल हुए थे, एक सिपाही की मौत हो गई थी। घटना का मुकदमा जीआरपी ने दर्ज कर मामले की जांच की थी, जिसमें पता चला कि बम विस्फोट की घटना को पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने अंजाम दिया था। जीआरपी और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी, लेकिन लंबे समय तक टुंडा को जीआरपी और पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। 16 अगस्त 2014 को उसे दिल्ली पुलिस ने भारत नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। अब्दुल करीम पर जीआरपी ने तीन अलग-अलग केस दर्ज किए थे।
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गाजियाबाद। फ्रंटियर मेल (गोल्डन टैंपल एक्सप्रेस) में साहिबाबाद स्टेशन के पास हुए बम विस्फोट मामले में 27 साल में सिर्फ 19 फीसदी गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं। 59 गवाहों में से सिर्फ 12 की गवाही पूरी हुई है। 13वें गवाह का बयान दर्ज कराने के लिए अपर जिला सत्र न्यायालय-4 में छह फरवरी की तारीख लगी है। ट्रेन में बम विस्फोट का आरोप आतंकी अब्दुल करीम टुंडा पर है। वह भी मौजूदा समय में अजमेर की सेंट्रल जेल में एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश गवाह ट्रेन यात्री थे जो पंजाब प्रांत के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी गवाह अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। मौजूदा समय में यह भी जानकारी नहीं है कि कितने गवाह जीवित हैं और कितने की मौत हो चुकी है। अदालत से मिली जानकारी के अनुसार अब तक मुकदमा कई अदालतों में सुनवाई के लिए ट्रांसफर किया जा चुका है, लेकिन गवाहों के बयान पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
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लंबे समय से नहीं पेश हो रहे गवाह
बचाव पक्ष ने बताया कि पुलिस ने घटना में अधिकांश गवाह ट्रेन में मौजूदा यात्रियों को बनाया था, जो पंजाब के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। कई बार नोटिस भेजने के बावजूद गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। एक गवाह को अदालत में तलब करने में ही पांच से छह महीने बीत जाते हैं, इसके बावजूद वह पेश नहीं होते हैं। इस कारण से मामले की सुनवाई भी लंबित है।
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एक सिपाही की मौत व 12 यात्री हुए थे घायल
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 1997 में मुंबई से अमृतसर की तरफ जा रही फ्रंटियर मेल ट्रेन के सामान्य कोच में साहिबाबाद स्टेशन के पास बम विस्फोट हुआ था। इसमें एक सिपाही समेत 12 लोग घायल हुए थे, एक सिपाही की मौत हो गई थी। घटना का मुकदमा जीआरपी ने दर्ज कर मामले की जांच की थी, जिसमें पता चला कि बम विस्फोट की घटना को पिलखुवा निवासी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने अंजाम दिया था। जीआरपी और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी, लेकिन लंबे समय तक टुंडा को जीआरपी और पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। 16 अगस्त 2014 को उसे दिल्ली पुलिस ने भारत नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। अब्दुल करीम पर जीआरपी ने तीन अलग-अलग केस दर्ज किए थे।