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Ghaziabad News: भूखंड आवंटन में धोखाधड़ी का आरोप, चोपड़ा दंपती पर प्राथमिकी
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लोनी। ट्रोनिका सिटी थाने में बुधवार को औद्योगिक भूखंड आवंटन में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आरोपी स्वाति चोपड़ा और राजीव चोपड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन पर अनुसूचित जाति कोटे का अनुचित लाभ लेने के लिए गुमराह करने का भी आरोप है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यूपीसीडा ने 27 मई 2026 को कानपुर मुख्यालय से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। सहायक कनिष्ठ परियोजना अधिकारी इंद्रवीर सिंह ने 22 सितंबर को ट्रोनिका सिटी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि चोपड़ा दंपती ने वर्ष 2006 की औद्योगिक भूखंड आवंटन योजना का लाभ उठाया। उन्होंने मैसर्स यूनिक एक्सपोर्ट नामक साझेदारी फर्म बनाई। इस फर्म में वेदप्रकाश को 55 फीसदी का डमी साझीदार बनाकर अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत 450 वर्गमीटर भूखंड के आवंटन का आवेदन किया। यह भूखंड जी-211 था, जिसे पहले जी-210 के नाम से आवंटित किया गया था। एसीपी लोनी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। वेदप्रकाश को केवल कागजों पर साझीदार दिखाया गया। वेदप्रकाश ने किसी भी आवेदन या प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनका जाति प्रमाणपत्र और राशन कार्ड का पता भी अधूरा था। वेदप्रकाश ने किसी भी आवेदन या प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनका जाति प्रमाणपत्र और राशन कार्ड का पता भी अधूरा था। फर्म के वास्तविक संचालक स्वाति चोपड़ा और राजीव चोपड़ा ही थे। प्रशासन को गुमराह कर गैर कानूनी तरीके से भूखंड आवंटन का लाभ लेने का आरोप है। फर्म के वास्तविक संचालक स्वाति चोपड़ा और राजीव चोपड़ा ही थे। प्रशासन को गुमराह कर गैर कानूनी तरीके से भूखंड आवंटन का लाभ लेने का आरोप है।
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अस्तिव में ही नहीं है वेद प्रकाश
आवंटन के समय वेदप्रकाश को 51 फीसदी भागीदारी बनाए रखने और शपथ पत्र देने की शर्त थी, लेकिन उन्होंने शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया। राजीव के चोपड़ा ने 5 मार्च 2009 को यूनिक एक्सपोर्टेक प्राइवेट लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई। इसमें शुरुआत में केवल राजीव के चोपड़ा और स्वाति चोपड़ा ही निदेशक थे। बाद में उन्होंने निदेशकों और अंशधारकों की अलग-अलग सूचियां प्रस्तुत कीं, जो विरोधाभासी थीं। वेदप्रकाश ने इसके लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। वेदप्रकाश को भेजे गए नोटिस भी पता अधूरा होने के कारण वापस आ गए।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यूपीसीडा ने 27 मई 2026 को कानपुर मुख्यालय से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। सहायक कनिष्ठ परियोजना अधिकारी इंद्रवीर सिंह ने 22 सितंबर को ट्रोनिका सिटी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि चोपड़ा दंपती ने वर्ष 2006 की औद्योगिक भूखंड आवंटन योजना का लाभ उठाया। उन्होंने मैसर्स यूनिक एक्सपोर्ट नामक साझेदारी फर्म बनाई। इस फर्म में वेदप्रकाश को 55 फीसदी का डमी साझीदार बनाकर अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत 450 वर्गमीटर भूखंड के आवंटन का आवेदन किया। यह भूखंड जी-211 था, जिसे पहले जी-210 के नाम से आवंटित किया गया था। एसीपी लोनी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। वेदप्रकाश को केवल कागजों पर साझीदार दिखाया गया। वेदप्रकाश ने किसी भी आवेदन या प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनका जाति प्रमाणपत्र और राशन कार्ड का पता भी अधूरा था। वेदप्रकाश ने किसी भी आवेदन या प्रपत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। उनका जाति प्रमाणपत्र और राशन कार्ड का पता भी अधूरा था। फर्म के वास्तविक संचालक स्वाति चोपड़ा और राजीव चोपड़ा ही थे। प्रशासन को गुमराह कर गैर कानूनी तरीके से भूखंड आवंटन का लाभ लेने का आरोप है। फर्म के वास्तविक संचालक स्वाति चोपड़ा और राजीव चोपड़ा ही थे। प्रशासन को गुमराह कर गैर कानूनी तरीके से भूखंड आवंटन का लाभ लेने का आरोप है।
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अस्तिव में ही नहीं है वेद प्रकाश
आवंटन के समय वेदप्रकाश को 51 फीसदी भागीदारी बनाए रखने और शपथ पत्र देने की शर्त थी, लेकिन उन्होंने शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया। राजीव के चोपड़ा ने 5 मार्च 2009 को यूनिक एक्सपोर्टेक प्राइवेट लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई। इसमें शुरुआत में केवल राजीव के चोपड़ा और स्वाति चोपड़ा ही निदेशक थे। बाद में उन्होंने निदेशकों और अंशधारकों की अलग-अलग सूचियां प्रस्तुत कीं, जो विरोधाभासी थीं। वेदप्रकाश ने इसके लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। वेदप्रकाश को भेजे गए नोटिस भी पता अधूरा होने के कारण वापस आ गए।
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