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Ghaziabad News: दूसरी छत पर भी सूख रहे थे तैयार पटाखे
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साहिबाबाद। सामुदायिक केंद्र में हुए धमाकों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। भवन में नगर निगम कर्मचारियों के लिए बनाए गए दो अलग कमरों की छत पर भी बारूद से तैयार किए गए पटाखे धूप में सूखने के लिए रखे गए थे। यानी जिस परिसर में विस्फोटक सामग्री के कारण पांच धमाके हो चुके थे, उसी भवन की दूसरी छत पर भी तैयार पटाखों को खुले में रखा गया था। वहीं, इस छत का वीडियो और धमाकों की वीडियो सोशल साइट्स पर जमकर वायरल हो रहा है। करीब 20 सेकेंड से ज्यादा के वीडियो में धमाके के बाद मौके पर अफरातफरी और धुआं दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक छत पर रखे पटाखे कई लोगों की नजर में आए थे। ऐसे में सवाल है कि परिसर में काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ी। गर्मी और किसी भी तरह की चिंगारी के संपर्क में आने पर इन पटाखों में आग लग सकती थी। ऐसी स्थिति में दूसरी छत के साथ आसपास के मकान भी चपेट में आ सकते थे। इसके अलावा समुदाय केंद्र की दीवार पर आईजीएल गैस का जंक्शन प्वाइंट है, जहां से सभी घरों के लिए गैस की सप्लाई होती है। वह चपेट में आ जाता, तो हादसा बड़ा हो सकता था।
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हादसे के दौरान पार्षद और समिति अध्यक्ष ने एक दूसरे पर लगाए आरोप
हादसे के बाद स्थानीय पार्षद हिमांशु का कहना है कि रामलीला समिति बिना अनुमति के ये काम करवा रही थी और इसकी शिकायत महापौर से भी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल पुतले में पटाखे का काम दशहरे से एक या दो दिन पहले होता है। इस साल समिति ने उन्हें इतने दिन पहले ही क्यों बुला लिया। साथ ही बताया कि उन्होंने घायलों को खुद अपने हाथों से उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया है। वहीं, समिति के अध्यक्ष विक्रम बैसला का कहना है कि उन्होंने इसकी परमिशन निगम से ली थी, उसके बाद 20 सितंबर को भूमि पूजन कराया। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानकर बारूद अंदर रखवा दिया ताकि किसी तरह से रामलीला न हो सके। इसकी जांच होनी चाहिए।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक छत पर रखे पटाखे कई लोगों की नजर में आए थे। ऐसे में सवाल है कि परिसर में काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ी। गर्मी और किसी भी तरह की चिंगारी के संपर्क में आने पर इन पटाखों में आग लग सकती थी। ऐसी स्थिति में दूसरी छत के साथ आसपास के मकान भी चपेट में आ सकते थे। इसके अलावा समुदाय केंद्र की दीवार पर आईजीएल गैस का जंक्शन प्वाइंट है, जहां से सभी घरों के लिए गैस की सप्लाई होती है। वह चपेट में आ जाता, तो हादसा बड़ा हो सकता था।
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हादसे के दौरान पार्षद और समिति अध्यक्ष ने एक दूसरे पर लगाए आरोप
हादसे के बाद स्थानीय पार्षद हिमांशु का कहना है कि रामलीला समिति बिना अनुमति के ये काम करवा रही थी और इसकी शिकायत महापौर से भी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल पुतले में पटाखे का काम दशहरे से एक या दो दिन पहले होता है। इस साल समिति ने उन्हें इतने दिन पहले ही क्यों बुला लिया। साथ ही बताया कि उन्होंने घायलों को खुद अपने हाथों से उठाकर अस्पताल तक पहुंचाया है। वहीं, समिति के अध्यक्ष विक्रम बैसला का कहना है कि उन्होंने इसकी परमिशन निगम से ली थी, उसके बाद 20 सितंबर को भूमि पूजन कराया। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानकर बारूद अंदर रखवा दिया ताकि किसी तरह से रामलीला न हो सके। इसकी जांच होनी चाहिए।
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