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Ghaziabad News: पिता दशरथ, मां कौशल्या तो बेटा बना राम
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दिव्यांशी भारद्वाज, कक्षा नौवीं की छात्रा। सीता जी का रोल
- फोटो : ARchive
गाजियाबाद। दिन में जॉब की व्यस्तता, शाम को धनुष-बाण और मुकुट। ऑफिस की मीटिंग खत्म कर रावण लंका का सिंहासन संभालते हैं, तो ड्यूटी पूरी कर दशरथ की मुलाकात बेटे राम से सीधे मंच पर होती है। कुछ ऐसी ही है क्रॉसिंग रिपब्लिक में हो रही रामलीला के पर्दे के पीछे की कहानी।
क्रॉसिंग रिपब्लिक की सोसायटियों में रहने वाले बच्चे और बड़े मिलकर रामलीला का मंचन कर रहे हैं। दिन में कोई पढ़ाई में व्यस्त है तो कोई ऑफिस में, लेकिन रात होते ही सभी कलाकार बनकर मंच पर रामकथा को जीवंत कर रहे हैं। यह आयोजन क्रॉसिंग रिपब्लिक की सांस्कृतिक कला समिति और क्रोमा की ओर से किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष क्षितिज सिंघल ने बताया कि रामलीला में बाहर से किसी कलाकार को नहीं बुलाया जाता, सभी किरदार सोसायटी के लोग ही निभाते हैं।
एक साथ मंच पर पूरा परिवार
इस रामलीला की खास बात यह है कि कई परिवार एक साथ मंच पर हैं। क्लेमेंट सिटी सोसायटी में रहने वाले अग्निहोत्री परिवार इसका उदाहरण है। अग्निहोत्री ने बताया कि वह रियल एस्टेट कंपनी में ब्रांच हेड हैं और रामलीला में दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। उनके बेटे श्रेयस, जो इंजीनियर हैं, राम बने हैं, जबकि पत्नी अर्चना कौशल्या के रूप में मंच पर हैं।
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उन्होंने बताया कि सुबह सभी आम दिनों की तरह ऑफिस जाते हैं और शाम को लौटकर मंचन का हिस्सा बनते हैं। उनका बेटा बचपन से ही रामलीला में किरदार निभा रहा है, जबकि वह खुद पिछले 10 वर्षों से सक्रिय हैं और अलग-अलग किरदार कर चुके हैं। उनकी पत्नी कौशल्या का किरदार निभाने के साथ ग्रीन रूम की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि यह हमारे लिए फैमिली टाइम जैसा है, जो सालभर की यादें दे जाता है।
बेटा पढ़ने गया तो पिता बने रावण
गौड़ ग्लोबल विलेज के रहने वाले भानु प्रताप पिछले 5 वर्षों से रामलीला में सक्रिय हैं। पहले उनका बेटा पार्थ रावण का किरदार निभाता था, अब पढ़ाई के लिए बाहर जाने के कारण पिछले तीन वर्षों से वह खुद रावण बन रहे हैं। भानु प्रताप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि ऑफिस से लौटकर जल्दी तैयार होकर मंच पर पहुंचते हैं, ये पल उनके लिए बेहद खास होते हैं। उनकी पत्नी शालिनी भी इस दौरान उनका साथ देती हैं और रामलीला में वेदवती का किरदार निभाती हैं।
बेटी बनी सीता, मां सुमित्रा
पैरामाउंट सिंफनी सोसायटी में रहने वाली दीपशिक्षा भारद्वाज पेशे से शिक्षिका हैं और बीएलओ की ड्यूटी भी कर रही हैं। सभी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद वह रामलीला में सुमित्रा का किरदार निभाती हैं। उनके लिए सबसे खास पल तब होता है जब उनकी बेटी दिव्यांशी सीता के रूप में मंच पर आती हैं। दीपशिक्षा ने बताया कि दिव्यांशी नौवीं कक्षा में पढ़ती है और जिस तरह वह माता सीता के किरदार में खुद को ढालती है, वह देखना सुखद होता है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे रामलीला का हिस्सा बनते हैं तो वे धर्म से जुड़ने के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों को भी समझते हैं।
कुल मिलाकर क्रॉसिंग रिपब्लिक की यह रामलीला सिर्फ मंचन नहीं, बल्कि सोसायटी के लोगों को एकजुट करने, परिवारों को साथ लाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन गई है, जहां दिन में प्रोफेशनल और रात में रामायण के पात्र एक ही मंच पर नजर आते हैं।
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क्रॉसिंग रिपब्लिक की सोसायटियों में रहने वाले बच्चे और बड़े मिलकर रामलीला का मंचन कर रहे हैं। दिन में कोई पढ़ाई में व्यस्त है तो कोई ऑफिस में, लेकिन रात होते ही सभी कलाकार बनकर मंच पर रामकथा को जीवंत कर रहे हैं। यह आयोजन क्रॉसिंग रिपब्लिक की सांस्कृतिक कला समिति और क्रोमा की ओर से किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष क्षितिज सिंघल ने बताया कि रामलीला में बाहर से किसी कलाकार को नहीं बुलाया जाता, सभी किरदार सोसायटी के लोग ही निभाते हैं।
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एक साथ मंच पर पूरा परिवार
इस रामलीला की खास बात यह है कि कई परिवार एक साथ मंच पर हैं। क्लेमेंट सिटी सोसायटी में रहने वाले अग्निहोत्री परिवार इसका उदाहरण है। अग्निहोत्री ने बताया कि वह रियल एस्टेट कंपनी में ब्रांच हेड हैं और रामलीला में दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। उनके बेटे श्रेयस, जो इंजीनियर हैं, राम बने हैं, जबकि पत्नी अर्चना कौशल्या के रूप में मंच पर हैं।
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उन्होंने बताया कि सुबह सभी आम दिनों की तरह ऑफिस जाते हैं और शाम को लौटकर मंचन का हिस्सा बनते हैं। उनका बेटा बचपन से ही रामलीला में किरदार निभा रहा है, जबकि वह खुद पिछले 10 वर्षों से सक्रिय हैं और अलग-अलग किरदार कर चुके हैं। उनकी पत्नी कौशल्या का किरदार निभाने के साथ ग्रीन रूम की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि यह हमारे लिए फैमिली टाइम जैसा है, जो सालभर की यादें दे जाता है।
बेटा पढ़ने गया तो पिता बने रावण
गौड़ ग्लोबल विलेज के रहने वाले भानु प्रताप पिछले 5 वर्षों से रामलीला में सक्रिय हैं। पहले उनका बेटा पार्थ रावण का किरदार निभाता था, अब पढ़ाई के लिए बाहर जाने के कारण पिछले तीन वर्षों से वह खुद रावण बन रहे हैं। भानु प्रताप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि ऑफिस से लौटकर जल्दी तैयार होकर मंच पर पहुंचते हैं, ये पल उनके लिए बेहद खास होते हैं। उनकी पत्नी शालिनी भी इस दौरान उनका साथ देती हैं और रामलीला में वेदवती का किरदार निभाती हैं।
बेटी बनी सीता, मां सुमित्रा
पैरामाउंट सिंफनी सोसायटी में रहने वाली दीपशिक्षा भारद्वाज पेशे से शिक्षिका हैं और बीएलओ की ड्यूटी भी कर रही हैं। सभी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद वह रामलीला में सुमित्रा का किरदार निभाती हैं। उनके लिए सबसे खास पल तब होता है जब उनकी बेटी दिव्यांशी सीता के रूप में मंच पर आती हैं। दीपशिक्षा ने बताया कि दिव्यांशी नौवीं कक्षा में पढ़ती है और जिस तरह वह माता सीता के किरदार में खुद को ढालती है, वह देखना सुखद होता है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे रामलीला का हिस्सा बनते हैं तो वे धर्म से जुड़ने के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों को भी समझते हैं।
कुल मिलाकर क्रॉसिंग रिपब्लिक की यह रामलीला सिर्फ मंचन नहीं, बल्कि सोसायटी के लोगों को एकजुट करने, परिवारों को साथ लाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन गई है, जहां दिन में प्रोफेशनल और रात में रामायण के पात्र एक ही मंच पर नजर आते हैं।

दिव्यांशी भारद्वाज, कक्षा नौवीं की छात्रा। सीता जी का रोल- फोटो : ARchive

दिव्यांशी भारद्वाज, कक्षा नौवीं की छात्रा। सीता जी का रोल- फोटो : ARchive

दिव्यांशी भारद्वाज, कक्षा नौवीं की छात्रा। सीता जी का रोल- फोटो : ARchive