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Ghaziabad News: हरनंदीपुरम योजना में भागीदारी को तैयार किसान, उचित मुआवजे की रखी मांग
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गाजियाबाद। नए शहर हरनंदीपुरम को धरातल पर उतारने के लिए योजना से प्रभावित आठ गांवों के किसानों के साथ बृहस्पतिवार को जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने प्राधिकरण सभागार में बैठक की। वीसी ने जब किसानों को योजना की विस्तार से जानकारी दी तो उत्साहित किसानों ने अपनी भागीदारी शत-प्रतिशत देने का आश्वासन दिया और जमीन के रेट सही लगाने की मांग की। बैठक में 50 से अधिक किसान शामिल हुए। आपसी-सहमति से जमीन क्रय करने की प्रक्रिया पर विचार-विमर्श किया गया।
प्राधिकरण के सचिव राजेश कुमार सिंह ने नई योजना की रूपरेखा और इसके दूरगामी लाभों को विस्तार से समझाया। उन्होंने किसानों से उनकी राय और सुझाव मांगे। मथुरापुर, चंपतनगर, और अन्य संबंधित गांवों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे। नंगला फिरोज मोहनपुर के ग्राम प्रधान अमित कुमार ने कहा कि शहर हित में प्रस्तावित योजना में वह पूरा सहयोग करेंगे। जिन काश्तकारों की जमीन योजना में जा रही है उन्हें उचित मुआवजा तो मिले ही साथ ही विकसित भूखंड का लाभ भी प्रदान किया जाना चाहिए।
इसी गांव से किसान सचिन सहलोत ने कहा कि वह विकास योजनाओं के लिए सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस योजना में भागीदार बनने के साथ ही आने वाले समय में सृजित भू-खंडों का कोटा/आवंटन की मांग किसानों ने की।
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उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्राधिकरण सभी हितधारकों के लाभ को प्राथमिकता देता है और भूमि जुटाव के वर्तमान प्रावधानों एवं शासनादेश के अनुसार संपूर्ण लाभ भू- धारकों को दिए जाएंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने प्रस्ताव को एकमत होकर प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके आधार पर जल्द ही किसानों के साथ दोबारा बैठक करेंगे। प्राधिकरण के इस प्रस्ताव का किसानों ने समर्थन किया।
संबंधित अधिकारियों और किसानों को सामूहिक सहमति बनाने के लिए और विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए जल्द ही अगली बैठक का आयोजन किया जाएगा। बैठक में प्राधिकरण की अर्जन अनुभाग की टीम से सचिव, वित्त नियंत्रक एके बाजपेयी, अपर सचिव पीके सिंह, विशेष कार्याधिकारी गुंजा सिंह, नायब तहसीलदार रवि और अन्य अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
इन गांवों की जमीन पर बसेगा हरनंदीपुरम
मथुरापुर, चंपतनगर, नगला फिरोजपुर, शमशेर, भनेड़ा खुर्द, शाहपुर निज मोरटा, भोवापुर, मोरटा
1900 खसरे से ली जाएगी 501 हेक्टेयर जमीन
हरनंदीपुरम योजना को धरातल पर उतारने के लिए आठ गांवों के 1900 खसरे से 501 हेक्टेयर जमीन काश्तकारों से आपसी सहमति के आधार पर ली जानी है। जिन गांवों की जमीन योजना में ली जानी है उनके किसानों से प्राधिकरण के अधिकारी संपर्क साधने में जुट गए हैं।
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प्राधिकरण के सचिव राजेश कुमार सिंह ने नई योजना की रूपरेखा और इसके दूरगामी लाभों को विस्तार से समझाया। उन्होंने किसानों से उनकी राय और सुझाव मांगे। मथुरापुर, चंपतनगर, और अन्य संबंधित गांवों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे। नंगला फिरोज मोहनपुर के ग्राम प्रधान अमित कुमार ने कहा कि शहर हित में प्रस्तावित योजना में वह पूरा सहयोग करेंगे। जिन काश्तकारों की जमीन योजना में जा रही है उन्हें उचित मुआवजा तो मिले ही साथ ही विकसित भूखंड का लाभ भी प्रदान किया जाना चाहिए।
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इसी गांव से किसान सचिन सहलोत ने कहा कि वह विकास योजनाओं के लिए सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस योजना में भागीदार बनने के साथ ही आने वाले समय में सृजित भू-खंडों का कोटा/आवंटन की मांग किसानों ने की।
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उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्राधिकरण सभी हितधारकों के लाभ को प्राथमिकता देता है और भूमि जुटाव के वर्तमान प्रावधानों एवं शासनादेश के अनुसार संपूर्ण लाभ भू- धारकों को दिए जाएंगे। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने प्रस्ताव को एकमत होकर प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके आधार पर जल्द ही किसानों के साथ दोबारा बैठक करेंगे। प्राधिकरण के इस प्रस्ताव का किसानों ने समर्थन किया।
संबंधित अधिकारियों और किसानों को सामूहिक सहमति बनाने के लिए और विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए जल्द ही अगली बैठक का आयोजन किया जाएगा। बैठक में प्राधिकरण की अर्जन अनुभाग की टीम से सचिव, वित्त नियंत्रक एके बाजपेयी, अपर सचिव पीके सिंह, विशेष कार्याधिकारी गुंजा सिंह, नायब तहसीलदार रवि और अन्य अधिकारी और किसान मौजूद रहे।
इन गांवों की जमीन पर बसेगा हरनंदीपुरम
मथुरापुर, चंपतनगर, नगला फिरोजपुर, शमशेर, भनेड़ा खुर्द, शाहपुर निज मोरटा, भोवापुर, मोरटा
1900 खसरे से ली जाएगी 501 हेक्टेयर जमीन
हरनंदीपुरम योजना को धरातल पर उतारने के लिए आठ गांवों के 1900 खसरे से 501 हेक्टेयर जमीन काश्तकारों से आपसी सहमति के आधार पर ली जानी है। जिन गांवों की जमीन योजना में ली जानी है उनके किसानों से प्राधिकरण के अधिकारी संपर्क साधने में जुट गए हैं।