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Ghaziabad News: ईयरफोन से हो रही है माइग्रेन और सिरदर्द की बीमारी
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आशुतोष यादव
गाजियाबाद। देर तक ईयरफोन, हेडफोन व ईयर बड्स का प्रयोग करने से माइग्रेन और सिर दर्द की बीमारी बढ़ रही है। देर तक इन चीजों को लगाकर गाने सुनने से तेज आवाज सीधे कानों के भीतर जाकर नसों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इस कारण से दिमाग की नसें भी कमजोर रहो रही हैं। 15 से 25 वर्ष के किशाेर और युवा वर्ग को यह परेशानी अधिक हो रही है। एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 120 से 140 मरीजों से 70 से 80 मरीजों में यह परेशानी पाई जा रही है। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए तीन मार्च को विश्व श्रवण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नाक गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी का कहना है कि कई मरीजों में टिन्निटस की समस्याएं भी देखने को मिली हैं, इसमें कानों में लगातार या रह-रह कर गूंजने की, सीटियां बजने, भिनभिनाने या फुफकारने की ध्वनियां सुनाई देती हैं। ये उपकरण सिर्फ कानों को ही प्रभावित नहीं कर रहे, इनका असर मस्तिष्क पर भी हो रहा है। सिर दर्द, माइग्रेन की समस्या तो बढ़ ही रही है। पहले से चक्कर आने से परेशान रोगियों की समस्याएं और ज्यादा बढ़ जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आ रहे 10 मरीजों में से यह परेशानी छह में मिल रही है। उन्हें इनका प्रयोग बंद करने की सलाह दी जा रही है।
ईयर ड्रम को हो रही है क्षति
एमएमजी अस्पताल के नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि कान के अंदर एक पर्दा होता है जिसे ईयर ड्रम कहते हैं। इसमें कई बारीक नसें होती हैं, जो दिमाग से जुड़ी होती हैं। जब ईयरफोन या हेडफोन लगाकर तेज आवाज सुनते हैं तो उसका कंपन दबाव के साथ ईयर ड्रम से टकराता है और उसे क्षति पहुंचा देता है। इसका तत्काल उपचार नहीं किया गया तो यह स्थायी समस्या बन जाती है और तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचा देती है।
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न्यूरोफिजिशियन डाॅ. राकेश सिंह का कहना है कि कान में सीधे तेज आवाज जाने से नसों को नुकसान पहुंच रहा है जो दिमाग से सीधे जुड़ी होती हैं। इसकी वजह से माइग्रेन, सिर दर्द व चक्कर आने की समस्याएं बढ़ रही हैं। जो लोग पहले से चक्कर आने की समस्या से परेशान हैं, ईयरफोन से उनकी समस्या और बढ़ जा रही है।
चक्कर आने की बढ़ गई थी परेशानी
पटेलनगर निवासी राकेश को यूट्यूब पर श्रीराम कथा व भजन सुनने की आदत है। वह ज्यादातर समय ईयरफोन लगाकर कथा व भजन सुनते रहते हैं। उन्हें उच्च रक्तचाप की भी बीमारी है। छह महीने से उनकी चक्कर आने की भी दवा चल रही है। दवा खाने के बाद उनका चक्कर कम होने की बजाय बढ़ता गया। जांच के बाद डॉक्टर ने ईयरफोन का उपयोग बंद करा दिया। उसके बाद से चक्कर की परेशानी दूर हो गई।
कान में सीटियां बजने की थी परेशानी
नंदग्राम निवासी अनन्या ने डॉक्टर से बताया कि कान में सीटियां बजने जैसा महसूस होता है। पिछले तीन माह से सुनाई देना भी कम हो गया था। डाॅक्टर के पूछने पर अनन्या ने बताया कि पिछले एक वर्ष से वह ज्यादातर समय बात करने, मोबाइल देखने के दौरान ईयरबड्स का उपयोग करती हैं। डाॅक्टर ने उपकरण के उपयोग पर रोक लगा दी। इसके बाद हालत में सुधार हो गया।
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गाजियाबाद। देर तक ईयरफोन, हेडफोन व ईयर बड्स का प्रयोग करने से माइग्रेन और सिर दर्द की बीमारी बढ़ रही है। देर तक इन चीजों को लगाकर गाने सुनने से तेज आवाज सीधे कानों के भीतर जाकर नसों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इस कारण से दिमाग की नसें भी कमजोर रहो रही हैं। 15 से 25 वर्ष के किशाेर और युवा वर्ग को यह परेशानी अधिक हो रही है। एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 120 से 140 मरीजों से 70 से 80 मरीजों में यह परेशानी पाई जा रही है। लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए तीन मार्च को विश्व श्रवण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नाक गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी का कहना है कि कई मरीजों में टिन्निटस की समस्याएं भी देखने को मिली हैं, इसमें कानों में लगातार या रह-रह कर गूंजने की, सीटियां बजने, भिनभिनाने या फुफकारने की ध्वनियां सुनाई देती हैं। ये उपकरण सिर्फ कानों को ही प्रभावित नहीं कर रहे, इनका असर मस्तिष्क पर भी हो रहा है। सिर दर्द, माइग्रेन की समस्या तो बढ़ ही रही है। पहले से चक्कर आने से परेशान रोगियों की समस्याएं और ज्यादा बढ़ जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आ रहे 10 मरीजों में से यह परेशानी छह में मिल रही है। उन्हें इनका प्रयोग बंद करने की सलाह दी जा रही है।
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ईयर ड्रम को हो रही है क्षति
एमएमजी अस्पताल के नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि कान के अंदर एक पर्दा होता है जिसे ईयर ड्रम कहते हैं। इसमें कई बारीक नसें होती हैं, जो दिमाग से जुड़ी होती हैं। जब ईयरफोन या हेडफोन लगाकर तेज आवाज सुनते हैं तो उसका कंपन दबाव के साथ ईयर ड्रम से टकराता है और उसे क्षति पहुंचा देता है। इसका तत्काल उपचार नहीं किया गया तो यह स्थायी समस्या बन जाती है और तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचा देती है।
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न्यूरोफिजिशियन डाॅ. राकेश सिंह का कहना है कि कान में सीधे तेज आवाज जाने से नसों को नुकसान पहुंच रहा है जो दिमाग से सीधे जुड़ी होती हैं। इसकी वजह से माइग्रेन, सिर दर्द व चक्कर आने की समस्याएं बढ़ रही हैं। जो लोग पहले से चक्कर आने की समस्या से परेशान हैं, ईयरफोन से उनकी समस्या और बढ़ जा रही है।
चक्कर आने की बढ़ गई थी परेशानी
पटेलनगर निवासी राकेश को यूट्यूब पर श्रीराम कथा व भजन सुनने की आदत है। वह ज्यादातर समय ईयरफोन लगाकर कथा व भजन सुनते रहते हैं। उन्हें उच्च रक्तचाप की भी बीमारी है। छह महीने से उनकी चक्कर आने की भी दवा चल रही है। दवा खाने के बाद उनका चक्कर कम होने की बजाय बढ़ता गया। जांच के बाद डॉक्टर ने ईयरफोन का उपयोग बंद करा दिया। उसके बाद से चक्कर की परेशानी दूर हो गई।
कान में सीटियां बजने की थी परेशानी
नंदग्राम निवासी अनन्या ने डॉक्टर से बताया कि कान में सीटियां बजने जैसा महसूस होता है। पिछले तीन माह से सुनाई देना भी कम हो गया था। डाॅक्टर के पूछने पर अनन्या ने बताया कि पिछले एक वर्ष से वह ज्यादातर समय बात करने, मोबाइल देखने के दौरान ईयरबड्स का उपयोग करती हैं। डाॅक्टर ने उपकरण के उपयोग पर रोक लगा दी। इसके बाद हालत में सुधार हो गया।