{"_id":"6744f341c9da03a1c403f104","slug":"e-rickshaws-bought-to-collect-garbage-become-junk-ghaziabad-news-c-30-gbd1006-518232-2024-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा बने कबाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा बने कबाड़
विज्ञापन
गाजियाबाद। नगर निगम की ओर से गलियो में से डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा कबाड़ बनते जा रहे हैं। 100 में से 40 ई-रिक्शा तो पूरी तरह खराब हो चुके हैं। जिन्हें अब निगम के कबाड़ में छोड़ दिया गया है। जहां बारिश व धूल के कारण उनमें जंग भी लगने लगी हैं। ऐसे में शहर को स्वच्छ बनाने के दावे हवा-हवाई होते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, नगर निगम की ओर से 2021 में इन ई-रिक्शा को शहर की संकरी व छोटी गलियों से कचरा लाने के लिए चलाया गया था। ये ई-रिक्शा एक साल भी ढंग से नहीं चल पाए। इनका प्रयोग नहीं होने से यह कबाड़ में तब्दील हो गए और नगर निगम के गैराज में धूल फांक रहे हैं। इन वाहनों के पहिए तक खराब हो चुके हैं। इनके शीशे पूरी तरह से टूट चुके हैं। कूड़ा डालने के लिए बनाया गया कपार्टमेंट में जंग लग चुका है।
वार्ड नंबर 27 के पार्षद नरेश जाटव ने बताया कि 10 महीने चलने के बाद ई-रिक्शा कबाड़ बनने लगे। आज तक इनकी लॉग-बुक भी नहीं भरी गई है। कौन सा रिक्शा किस रूट पर जा रहा है, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। कर्मचारी अधिकारियों की मनमर्जी के हिसाब से तय की गई जगहों से कचरा उठाने ई-रिक्शा लेकर चले जाते हैं। वार्ड से कूड़ा उठान के लिए निगम से ई रिक्शा और हाथ गाड़ी की मांग की गई थी, लेकिन वह भी नहीं मिल सका।
विज्ञापन
डेढ़ लाख है एक ई-रिक्शा का मूल्य
शहर की संकरी गलियों से कूड़ा उठान के लिए खरीदा गया एक ई रिक्शा लगभग डेढ़ लाख रुपये का हैं। इन पर कंपनी की ओर से एक साल की वारंटी भी दी गई थी। 100 ई रिक्शा खरीदने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया गया था। अब तो इनकी वारंटी भी खत्म हो गई है। ऐसे में खराब हो चुके ई रिक्शा को बदलवाने या ठीक कराने में भी निगम को लाखों रुपये खर्च करने होंगे।
चल रहे 35 ई-रिक्शा की भी हालत खराब
60 में से बाकी बचे 35 ई-रिक्शाओं के हालात भी खराब ही हैं। किसी की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है तो कोई रास्ते में ही बंद हो जाता है। इन ई-रिक्शा को चला रहे चालकों की मानें तो ओवरब्रिज पर चढ़ाते समय ई-रिक्शा का दम निकलने लगता है। इसलिए अधिकतर ड्राइवर इन्हें ओवरब्रिजों पर चढ़ाने से झिझकते हैं।
ई-रिक्शा की मरम्मत हो सकेगी तो करवाएंगे। बाकी हर घर से कचरा उठाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. मिथलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
विज्ञापन
दरअसल, नगर निगम की ओर से 2021 में इन ई-रिक्शा को शहर की संकरी व छोटी गलियों से कचरा लाने के लिए चलाया गया था। ये ई-रिक्शा एक साल भी ढंग से नहीं चल पाए। इनका प्रयोग नहीं होने से यह कबाड़ में तब्दील हो गए और नगर निगम के गैराज में धूल फांक रहे हैं। इन वाहनों के पहिए तक खराब हो चुके हैं। इनके शीशे पूरी तरह से टूट चुके हैं। कूड़ा डालने के लिए बनाया गया कपार्टमेंट में जंग लग चुका है।
विज्ञापन
वार्ड नंबर 27 के पार्षद नरेश जाटव ने बताया कि 10 महीने चलने के बाद ई-रिक्शा कबाड़ बनने लगे। आज तक इनकी लॉग-बुक भी नहीं भरी गई है। कौन सा रिक्शा किस रूट पर जा रहा है, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। कर्मचारी अधिकारियों की मनमर्जी के हिसाब से तय की गई जगहों से कचरा उठाने ई-रिक्शा लेकर चले जाते हैं। वार्ड से कूड़ा उठान के लिए निगम से ई रिक्शा और हाथ गाड़ी की मांग की गई थी, लेकिन वह भी नहीं मिल सका।
विज्ञापन
डेढ़ लाख है एक ई-रिक्शा का मूल्य
शहर की संकरी गलियों से कूड़ा उठान के लिए खरीदा गया एक ई रिक्शा लगभग डेढ़ लाख रुपये का हैं। इन पर कंपनी की ओर से एक साल की वारंटी भी दी गई थी। 100 ई रिक्शा खरीदने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया गया था। अब तो इनकी वारंटी भी खत्म हो गई है। ऐसे में खराब हो चुके ई रिक्शा को बदलवाने या ठीक कराने में भी निगम को लाखों रुपये खर्च करने होंगे।
चल रहे 35 ई-रिक्शा की भी हालत खराब
60 में से बाकी बचे 35 ई-रिक्शाओं के हालात भी खराब ही हैं। किसी की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है तो कोई रास्ते में ही बंद हो जाता है। इन ई-रिक्शा को चला रहे चालकों की मानें तो ओवरब्रिज पर चढ़ाते समय ई-रिक्शा का दम निकलने लगता है। इसलिए अधिकतर ड्राइवर इन्हें ओवरब्रिजों पर चढ़ाने से झिझकते हैं।
ई-रिक्शा की मरम्मत हो सकेगी तो करवाएंगे। बाकी हर घर से कचरा उठाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. मिथलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी