फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Due to delay in approval, a budget of Rs 38 crores was lying with the departments

Ghaziabad News: स्वीकृति में देरी से विभागों के पास पड़ा 38 करोड़ का बजट

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 24 Mar 2025 12:26 AM IST
विज्ञापन
Due to delay in approval, a budget of Rs 38 crores was lying with the departments
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

हापुड़। सरकारी विभागों की सुस्ती से करोड़ों का बजट अब लौटने की कगार पर है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब सात दिन ही शेष हैं। कुछ विभागों के पास 38 करोड़ से अधिक का बजट पड़ा है। इतने दिन में यह बजट विकास कार्यों पर खर्च होना संभव हो सकेगा।
विभागों में पहले कार्ययोजना बनाने में देरी होती है और उसके बाद फाइलों की सुस्त गति के कारण योजनाएं समय से पास नहीं हो पाती हैं। इसका परिणाम यह है कि अब वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा और विभागों के पास करोड़ों का बजट शेष पड़ा है। जिले में सबसे अधिक बजट लोक निर्माण विभाग के पास 23 करोड़ बचा है। इसके बाद सीएमओ और सीएमएस कार्यालय के पास करीब 11 करोड़ की धनराशि बची है। इसी प्रकार अन्य विभागों का भी हाल है। वन विभाग से लेकर सिंचाई विभाग और अन्य के पास बजट पड़ा है। यदि विभाग इस बजट को खर्च नहीं कर पाते हैं तो फिर इसे लौटाना भी पड़ सकता है।
विज्ञापन


वहीं, आम जन सुविधाओं के लिए परेशान हैं। बजट का सही प्रकार से प्रयोग होता तो फिर जनता की परेशानी कुछ कम हो जाती। हालांकि, विभागों को जो बजट मिलता है, उसमें अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन आदि भी शामिल रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


-विभागों में धूल फांक रहीं फाइलें--

सरकारी विभागों में अभी भी फाइलें एक से दूसरी टेबल पर नहीं पहुंच पा रही हैं। समय से कार्ययोजना न बनना और फाइलों को अटकाने के कारण यह परेशानी हो रही है। जबकि, वित्तीय वर्ष की शुरूआत के कुछ माह तक तो कार्ययोजना बनाने में ही देरी होती है। इस कारण आवंटित बजट खत्म नहीं हो पाता है। यदि अप्रैल-मई में कार्य योजना बनाई जाए तो फिर समय से बजट खर्च हो जाए। शासन के सख्त आदेश हैं कि कार्यालयों में किसी भी टेबल पर तीन दिन से अधिक फाइल नहीं रुकनी चाहिए। इसके लिए जिला मुख्यालय और विकास भवन में ई-आफिस प्रणाली भी शुरू की गई है। जबकि, अन्य विभागों में अभी यह सिस्टम नहीं है। इस कारण फाइलों पर निगरानी नहीं रखी जा रही है। फाइलों पर निगरानी शुरू होगी तो कार्यों में देरी भी नहीं होगी। एडीएम संदीप कुमार ने बताया कि पूरी कोशिश है कि जिन विभागों के पास जो बजट बचा है, उसे 31 मार्च तक योजनाओं में शामिल कर जिलेवासियों को लाभ दिया जाए। अधिकतर विभाग वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले बजट को खर्च कर देते हैं।



विभागों को मिला बजट और खर्चा

विभाग का नाम मिली धनराशि खर्च धनराशि

सीएमओ और सीएमएस 69.72 57

लोक निर्माण विभाग 91.51 68.58
वन विभाग 33.18 29.40

विकास भवन 22.92 22.50
पुलिस 21.34 20.65

(नोट - धनराशि करोड़ में है।)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed