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Ghaziabad News: एक तरफ छपे नोटों को जाली साबित नहीं कर सकी पुलिस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:25 AM IST
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Do not use the Sakim police to prove that a particular Facebook account is fake.
गाजियाबाद। जाली मुद्रा रखने के आरोप में दर्ज 17 साल पुराने मुकदमे में पुलिस की जांच और साक्ष्य संकलन की खामियां अभियोजन पक्ष पर भारी पड़ गईं। अपर सत्र न्यायाधीश मनीष निगम की अदालत ने आरोपी सुमित उपाध्याय को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। पुलिस ने जिन भारतीय नोटों को जाली बताया था, वे केवल एक तरफ छपे थे। बरामद अमेरिकी डॉलर और भूटानी मुद्रा की फोरेंसिक जांच भी नहीं कराई गई थी।
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लोनी पुलिस ने नौ फरवरी 2009 को गढ़ी कटैया पुश्ता के पास चेकिंग के दौरान दिल्ली की ओर से आ रही एक कार को रोका था। पुलिस के अनुसार, कार में मौजूद तुलसी निकेतन, साहिबाबाद निवासी सुमित उपाध्याय के पास से 200 ग्राम हेरोइन के साथ जाली भारतीय और विदेशी मुद्रा बरामद हुई थी। इस संबंध में लोनी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में मामला अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने पुलिस की बरामदगी को आधार बनाकर आरोप साबित करने का प्रयास किया।
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एक तरफ छपे नोटों पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में बरामद नोटों की प्रकृति पर सवाल उठे। पुलिस ने एक हजार और 50 रुपये के जिन नोटों की बरामदगी का दावा किया था, वे केवल एक तरफ छपे थे, जबकि दूसरी तरफ पूरी तरह कोरे थे। जिरह के दौरान गवाहों ने माना कि इन कागजों का असली मुद्रा की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था। ऐसे में इन्हें जाली नोट साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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विदेशी मुद्रा की फोरेंसिक जांच नहीं
अदालत में यह भी सामने आया कि बरामद अमेरिकी डॉलर और भूटानी मुद्रा की फोरेंसिक जांच नहीं कराई गई थी। विवेचक यह स्पष्ट नहीं कर सके कि इन वस्तुओं को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था या नहीं। घटनास्थल सार्वजनिक स्थान होने के बावजूद किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया। पुलिसकर्मियों ने तलाशी से पहले नियमानुसार अपनी तलाशी देने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई थी। जांच की इन खामियों और पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अभियोजन पक्ष बरामदगी और आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने सुमित उपाध्याय को बरी कर दिया।
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