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Ghaziabad News: युवाओं को तेजी से जकड़ रहा मधुमेह, गुर्दे दे रहे जवाब

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Nov 2025 01:25 AM IST
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Diabetes is rapidly gripping the youth, kidneys are failing
गाजियाबाद। जिले में मधुमेह के मरीजों की संख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। संजय नगर संयुक्त अस्पताल में डायलिसिस कराने वाले 80 फीसदी मरीज मधुमेह से ग्रसित हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओ की भी है। एमएमजी और संयुक्त अस्पताल सहित अन्य सरकारी संस्थानों में आने वाले मरीजों के आंकड़े बताते हैं कि मधुमेह अब सिर्फ बुजुर्गों की नहीं, बल्कि युवाओं की भी गंभीर समस्या बन गया है। अकेले गैर संचारी रोग (एनसीडी) प्रकोष्ठ में अप्रैल से छह नवंबर तक तीन लाख से ज्यादा शुगर मरीजों की पहचान की गई और उनका इलाज शुरू किया गया। निजी अस्पतालों को शामिल करें तो जिले में यह आंकड़ा छह लाख के पार पहुंच चुका है।
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14 साल की उम्र में भी दिख रहा टाइप-2 मधुमेह
आईएमए गाजियाबाद के आगामी अध्यक्ष व मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रहलाद चावला का कहना है कि पहले जहां मधुमेह का खतरा 45 वर्ष से अधिक आयु वालों में देखा जाता था, वहीं अब यह रोग 14 से 20 वर्ष के किशोरों में भी तेजी से बढ़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत की आयु 30 वर्ष से अधिक है। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 13 प्रतिशत लोग मधुमेह से ग्रसित हैं, जबकि 15 से 16 प्रतिशत लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। इनमें से लगभग आधे लोगों में आगे चलकर शुगर की समस्या स्थायी रूप से विकसित हो जाती है।
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छह ‘एस’ से सावधान रहने की सलाह
डॉ. चावला के अनुसार, मधुमेह से बचाव के लिए छह ‘एस’ का संतुलन बनाए रखना जरूरी है स्मोकिंग, साल्ट, सेडेटरी (बैठे रहने वाली) लाइफस्टाइल, स्लीप, शुगर और स्ट्रेस। इनमें गड़बड़ी होने पर व्यक्ति मधुमेह के खतरे में आ जाता है। उनका कहना है कि लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे शुगर के शिकार हो चुके हैं। जब तक रोग की पुष्टि होती है, तब तक शरीर के कई अंग, विशेषकर गुर्दे, आंखें और तंत्रिकाएं, प्रभावित हो चुके होते हैं।
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शारीरिक श्रम में कमी और जीवनशैली बदलाव बना कारण
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में लोगों की शारीरिक सक्रियता बहुत कम हो गई है। यही कारण है कि मधुमेह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब उनके पैरों में सुन्नता, आंखों की रोशनी में कमी या त्वचा पर खुजली जैसी शिकायतें शुरू हो जाती हैं। इस स्थिति में रोग पहले ही शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा चुका होता है।




हर साल बढ़ रहा आंकड़ा, युवाओं में सबसे ज्यादा खतरा
एनसीडी विंग के अनुसार, जिले में शुगर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022 में 2,51,494 मरीज दर्ज किए गए थे, 2023 में यह संख्या बढ़कर 2,76,258 हो गई। वर्ष 2024 में आंकड़ा 3,55,551 तक पहुंचा और 2025 में अब तक 3,01,183 मरीजों की पहचान की जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिले की लगभग 50 लाख आबादी में छह लाख से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत मरीज युवा हैं जिनका रक्त शर्करा स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है।
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