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Ghaziabad News: 18 लाख जुर्माना लगाया और 30 टन की जब्त पर बाजार से पॉलीथिन नहीं हो रही खत्म

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:30 AM IST
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Despite the imposition of fines and confiscations, the use of polythene in the market is not being eliminated.
माई सिटी रिपोर्टर
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साहिबाबाद। वर्ष 2022 में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू किए जाने और नगर निगम की ओर से जुर्माना और जब्ती के बावजूद लोगों के बीच सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं हो पा रहा। इसे जागरूकता की कमी कहें या फिर प्रशासन की लापरवाही कि न तो वह लोगों के मन में डर बना पा रहा न ही जागरूक कर पा रहा। यही वजह है कि लाखों रुपये जुर्माना भरने और पॉलीथिन जब्त होने के बावजूद बाजार में पॉलीथिन का प्रयोग नहीं रुक पा रहा। लोगों को पॉलीथिन बैग छोड़ने को प्रेरित करने के लिए हर साल 3 जुलाई को इंटरनेशनल पॉलीथिन बैग फ्री डे मनाया जाता है।
आंकड़ों की बात करें तो बीते एक वर्ष में नगर निगम जनपद से करीब 30 टन प्रतिबंधित पॉलीथिन जब्त कर चुका है और करीब दो हजार लोगों से 18 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जा चुका है। शहर के सब्जी बाजारों, फल विक्रेताओं, किराना दुकानों और फुटपाथ पर लगने वाले ठेलों पर खुलेआम पॉलीथिन में सामान दिया जा रहा है।
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स्थिति यह है कि नालों, सड़कों और कचरे के ढेरों में बड़ी मात्रा में पॉलीथिन दिखाई देती है। इससे न केवल शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि नालियां जाम होने से जलभराव की समस्या भी बढ़ रही है। बारिश के दौरान यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अधिकारी एनके त्रिपाठी का कहना है कि पॉलीथिन तेजी से वातावरण में जहर घोल रही है। यह आसानी से नष्ट नहीं होती और वर्षों तक मिट्टी में पड़ी रहती है, जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। खुले में फेंकी गई पॉलीथिन को जब जलाया जाता है तो उससे निकलने वाला जहरीला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है।

एनके त्रिपाठी के मुताबिक पॉलीथिन नदियों और जल स्रोतों तक पहुंचकर जल प्रदूषण का कारण बनती है। इसके छोटे-छोटे कण (माइक्रोप्लास्टिक) खाद्य शृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहे हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि इसके प्रति लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा, जुर्माने की बजाय जागरूकता से ही इसके प्रयोग को रोकना संभव है।
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