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Ghaziabad News: मियाद खत्म, फीसदी ही पूरा हुआ बिजनेस प्लान का काम
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गाजियाबाद। ऊर्जा निगम के वर्ष 2025-26 के बिजनेस प्लान के काम 21 अगस्त तक पूरे किए जाने का दावा अब गलत साबित हो रहा है। निर्धारित समयसीमा खत्म होने के बावजूद तीनों जोन में महज 50 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। ऐसे में बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए तैयार किए गए प्लान का लाभ उपभोक्ताओं को अभी नहीं मिल पा रहा है। मामूली बारिश में भी बिजली कटौती और फॉल्ट की समस्या बनी हुई है।
बिजनेस प्लान के काम समय पर पूरा कराने के लिए प्रबंध निदेशक कार्यालय से लगातार निगम के अफसरों को हिदायत दी जा रही थी। जुलाई में ठेकेदारों के साथ बैठक कर सभी काम 21 अगस्त तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे। काम में देरी करने वालों को चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद अभी तक करीब 50 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।
जोन एक में 75-80 किलोमीटर लाइन बदलने के साथ अन्य कार्य भी किए जाने थे। इनमें एबीसी के साथ खुली लाइन को बदलने का काम भी शामिल है। वहीं, जोन दो और तीन में भी न तो निर्धारित लाइनों को बदला जा सका है और न ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा सकी है। सितंबर का दूसरा सप्ताह गुजरने को है और आने वाले दो माह में भी सभी काम पूरे होने की उम्मीद कम है।
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ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ठेकेदारों को इस संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने का कारण पूछा गया है।
250 करोड़ रुपये खर्च होने थे, 100 करोड़ ही खर्च
वर्ष 2025-26 के नए बिजनेस प्लान के तहत ऊर्जा निगम को करीब 250 करोड़ रुपये खर्च करने थे। अभी तक करीब 100 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं। योजना के काम अधूरे रहने का असर बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। गर्मी के सीजन में लोगों को बिजली संबंधी परेशानी झेलनी पड़ी। अब भी मामूली बूंदाबांदी में पॉश इलाकों तक में बिजली कटौती शुरू हो जाती है। फॉल्ट और जंपर फुंकने की समस्या भी आम है।
बिजनेस प्लान के काम समय पर पूरा कराने के लिए प्रबंध निदेशक कार्यालय से लगातार निगम के अफसरों को हिदायत दी जा रही थी। जुलाई में ठेकेदारों के साथ बैठक कर सभी काम 21 अगस्त तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे। काम में देरी करने वालों को चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद अभी तक करीब 50 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है।
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जोन एक में 75-80 किलोमीटर लाइन बदलने के साथ अन्य कार्य भी किए जाने थे। इनमें एबीसी के साथ खुली लाइन को बदलने का काम भी शामिल है। वहीं, जोन दो और तीन में भी न तो निर्धारित लाइनों को बदला जा सका है और न ही ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा सकी है। सितंबर का दूसरा सप्ताह गुजरने को है और आने वाले दो माह में भी सभी काम पूरे होने की उम्मीद कम है।
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ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ठेकेदारों को इस संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने का कारण पूछा गया है।
250 करोड़ रुपये खर्च होने थे, 100 करोड़ ही खर्च
वर्ष 2025-26 के नए बिजनेस प्लान के तहत ऊर्जा निगम को करीब 250 करोड़ रुपये खर्च करने थे। अभी तक करीब 100 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं। योजना के काम अधूरे रहने का असर बिजली व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। गर्मी के सीजन में लोगों को बिजली संबंधी परेशानी झेलनी पड़ी। अब भी मामूली बूंदाबांदी में पॉश इलाकों तक में बिजली कटौती शुरू हो जाती है। फॉल्ट और जंपर फुंकने की समस्या भी आम है।