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Ghaziabad News: बहुत शातिर था दक्ष, बनना चाहता था डाॅन
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राहुल सिंघल
गाजियाबाद। दक्ष उर्फ अक्की का इरादा दिल्ली-एनसीआर में अपराध की दुनिया का डाॅन बनने का था। इसके लिए उसना पूरा गिरोह खड़ा कर लिया था। उसके साथियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह बेहद शातिर किस्म का अपराधी था। वह अपने ठिकाने बदलता रहता था। कभी दिल्ली में रहता था तो कभी बागपत में और कभी नोएडा में। किसी को अपना असली नाम नहीं बताता था।
उसके साथियों ने बताया कि वह मोबाइल फोन रखता था लेकिन उसमें सिम कार्ड नहीं था। वह व्हाट्सएप काॅलिंग के माध्यम से ही बात करता था। बात करते ही लोकेशन बदल देता था। उसे मालूम था कि पुलिस लोकेशन का पता लगा लेती है। वह फोटो खिंचवाने से भी बचता था। गिरोह के किसी बदमाश के पास उसका फोटो नहीं है।
वह मैनपुरी का रहने वाला था लेकिन गिरोह में उसने खुद को अनाथ बता रखा था। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस को बताया कि उसने अपने कई नाम रख रखे थे। अक्की, अनिल, अजय... जो भी मन में आता था, वही नाम बोल देता था लेकिन असली नाम नहीं बताता था। उसने गिरोह के बदमाशों को भी कई तरह के हथकंडे सिखा रहे थे। वारदात के बाद सभी अलग-अलग ठिकाने पर जाते थे और काफी समय पर एक-दूसरे से फोन पर संपर्क नहीं करते थे।
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डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि अक्की के माता-पिता पहले दिल्ली-एनसीआर में रहते थे। अक्की का जन्म दिल्ली में ही हुआ था। अक्की की मां की एक रिश्तेदार किन्नर है। इसकी जानकारी अक्की के पिता को हुई तो वे यहां से मैनपुरी चले गए। लेकिन अक्की यहीं दिल्ली में रिश्तेदार के यहां रहता था, जो किन्नर है। यहीं रहकर गलत संगत में पड़ कर उसने नशे की लत लगाई और नशे की लत को पूरा करने के लिए गिरोह बनाकर लूटपाट करने लगा। अक्की के पास से मिला आधार कार्ड पर मैनपुरी के किशनी का पता मिला है। (संवाद)
नशे के लिए बना अपराधी
पूछताछ में गिरफ्तार बदमाश लवकुश ने पुलिस को बताया कि वह हाईस्कूल पास है। इसके बाद पिता के साथ लोअर पैंट बनाने का काम करने लगा लेकिन नशे की लत को पूरा करने के लिए पिछले कुछ साल से दक्ष के साथ मिलकर लूटपाट करने लगा था। पिछले साल दिल्ली में एक जगह दो पक्षों में चाकूबाजी हुई थी। इसमें उनका एक साथी मारा गया था जबकि वह खुद घायल हो गया था। पुलिस का कहना है कि सभी के आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है।
17 महीने में 100 मुठभेड़... तीन बदमाश ढेर
जिन अपराधियों ने किसी की जान ली, वे ही मुठभेड़ में मारे गए
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। कमिश्नरेट बने हुए लगभग 17 महीने हुए हैं। इस दौरान पुलिस की बदमाशों के साथ 100 बार मुठभेड़ हुई है। इनमें 166 अपराधियों को गिरफ्तार किया है जबकि 107 अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल हुए हैं। 17 महीनों में हुई 100 मुठभेड़ों में पुलिस तीन बदमाशों को ढेर कर चुकी हैं। खास बात यह है कि मुठभेड़ में वे ही बदमाश मारे गए जिन्होंने किसी की जान ली थी। चोरी, लूट, दुष्कर्म और तस्करी करने वाले अपराधी मुठभेड़ में घायल हुए हैं। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने कहा कि अपराध करने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। अपराध रोकने के लिए पुलिस अलर्ट है।
ये हुए ढेर
- 23 मई 2023 में मुरादनगर में दुकान में घुसकर मोबाइल व्यापारी मुकेश गोयल की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। दो जून 2023 को पुलिस ने मुठभेड़ में मुख्य आरोपी मोनू को ढेर किया।
- 27 अक्तूबर 2023 को कॉलेज से ऑटो से हापुड़ जा रही छात्रा कीर्ति से बाइक सवार बदमाशों ने मोबाइल लूटा। जिससे वह सड़क पर गिर और उपचार के दौरान मौत हो गई थी। 30 अक्तूबर 2023 को मुठभेड़ में पुलिस ने बदमाश जितेंद्र उर्फ जीतू को मार गिराया।
दो साल से नहीं की
थी माता-पिता से बात
संवाद न्यूज एजेंसी
किशनी (मैनपुरी)। दक्ष गांव हरिसिंगपुर का रहने वाला था। दो साल पहले वह गांव छोड़ कर चला गया था। तभी से उसने माता-पिता से भी बात नहीं की थी। शुक्रवार को जब मुठभेड़ में मौत की खबर गांव पहुंची तो परिजन शव लेने के लिए गाजियाबाद रवाना हो गए।
सतेंद्र चौहान का पुत्र दक्ष अपने एक रिश्तेदार के यहां सीलमपुर दिल्ली में रह रहा था। छह माह पहले नानी की मौत की खबर मिलने के बाद वह गांव आया था। इसके बाद वापस चला गया था। वह घरवालों से भी संपर्क नहीं रखता था। दक्ष ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए बता रखा था कि उसके माता-पिता नहीं है और उसकी परवरिश एक किन्नर ने की है। उसके साथियों से पुलिस को सही जानकारी मिल गई। गाजियाबाद पुलिस ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर उसके परिजन को सूचना दी। दक्ष के खिलाफ किशनी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उसने कस्बे में ही हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी।
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गाजियाबाद। दक्ष उर्फ अक्की का इरादा दिल्ली-एनसीआर में अपराध की दुनिया का डाॅन बनने का था। इसके लिए उसना पूरा गिरोह खड़ा कर लिया था। उसके साथियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह बेहद शातिर किस्म का अपराधी था। वह अपने ठिकाने बदलता रहता था। कभी दिल्ली में रहता था तो कभी बागपत में और कभी नोएडा में। किसी को अपना असली नाम नहीं बताता था।
उसके साथियों ने बताया कि वह मोबाइल फोन रखता था लेकिन उसमें सिम कार्ड नहीं था। वह व्हाट्सएप काॅलिंग के माध्यम से ही बात करता था। बात करते ही लोकेशन बदल देता था। उसे मालूम था कि पुलिस लोकेशन का पता लगा लेती है। वह फोटो खिंचवाने से भी बचता था। गिरोह के किसी बदमाश के पास उसका फोटो नहीं है।
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वह मैनपुरी का रहने वाला था लेकिन गिरोह में उसने खुद को अनाथ बता रखा था। गिरफ्तार बदमाशों ने पुलिस को बताया कि उसने अपने कई नाम रख रखे थे। अक्की, अनिल, अजय... जो भी मन में आता था, वही नाम बोल देता था लेकिन असली नाम नहीं बताता था। उसने गिरोह के बदमाशों को भी कई तरह के हथकंडे सिखा रहे थे। वारदात के बाद सभी अलग-अलग ठिकाने पर जाते थे और काफी समय पर एक-दूसरे से फोन पर संपर्क नहीं करते थे।
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डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि अक्की के माता-पिता पहले दिल्ली-एनसीआर में रहते थे। अक्की का जन्म दिल्ली में ही हुआ था। अक्की की मां की एक रिश्तेदार किन्नर है। इसकी जानकारी अक्की के पिता को हुई तो वे यहां से मैनपुरी चले गए। लेकिन अक्की यहीं दिल्ली में रिश्तेदार के यहां रहता था, जो किन्नर है। यहीं रहकर गलत संगत में पड़ कर उसने नशे की लत लगाई और नशे की लत को पूरा करने के लिए गिरोह बनाकर लूटपाट करने लगा। अक्की के पास से मिला आधार कार्ड पर मैनपुरी के किशनी का पता मिला है। (संवाद)
नशे के लिए बना अपराधी
पूछताछ में गिरफ्तार बदमाश लवकुश ने पुलिस को बताया कि वह हाईस्कूल पास है। इसके बाद पिता के साथ लोअर पैंट बनाने का काम करने लगा लेकिन नशे की लत को पूरा करने के लिए पिछले कुछ साल से दक्ष के साथ मिलकर लूटपाट करने लगा था। पिछले साल दिल्ली में एक जगह दो पक्षों में चाकूबाजी हुई थी। इसमें उनका एक साथी मारा गया था जबकि वह खुद घायल हो गया था। पुलिस का कहना है कि सभी के आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है।
17 महीने में 100 मुठभेड़... तीन बदमाश ढेर
जिन अपराधियों ने किसी की जान ली, वे ही मुठभेड़ में मारे गए
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। कमिश्नरेट बने हुए लगभग 17 महीने हुए हैं। इस दौरान पुलिस की बदमाशों के साथ 100 बार मुठभेड़ हुई है। इनमें 166 अपराधियों को गिरफ्तार किया है जबकि 107 अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल हुए हैं। 17 महीनों में हुई 100 मुठभेड़ों में पुलिस तीन बदमाशों को ढेर कर चुकी हैं। खास बात यह है कि मुठभेड़ में वे ही बदमाश मारे गए जिन्होंने किसी की जान ली थी। चोरी, लूट, दुष्कर्म और तस्करी करने वाले अपराधी मुठभेड़ में घायल हुए हैं। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्र ने कहा कि अपराध करने वालों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। अपराध रोकने के लिए पुलिस अलर्ट है।
ये हुए ढेर
- 23 मई 2023 में मुरादनगर में दुकान में घुसकर मोबाइल व्यापारी मुकेश गोयल की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। दो जून 2023 को पुलिस ने मुठभेड़ में मुख्य आरोपी मोनू को ढेर किया।
- 27 अक्तूबर 2023 को कॉलेज से ऑटो से हापुड़ जा रही छात्रा कीर्ति से बाइक सवार बदमाशों ने मोबाइल लूटा। जिससे वह सड़क पर गिर और उपचार के दौरान मौत हो गई थी। 30 अक्तूबर 2023 को मुठभेड़ में पुलिस ने बदमाश जितेंद्र उर्फ जीतू को मार गिराया।
दो साल से नहीं की
थी माता-पिता से बात
संवाद न्यूज एजेंसी
किशनी (मैनपुरी)। दक्ष गांव हरिसिंगपुर का रहने वाला था। दो साल पहले वह गांव छोड़ कर चला गया था। तभी से उसने माता-पिता से भी बात नहीं की थी। शुक्रवार को जब मुठभेड़ में मौत की खबर गांव पहुंची तो परिजन शव लेने के लिए गाजियाबाद रवाना हो गए।
सतेंद्र चौहान का पुत्र दक्ष अपने एक रिश्तेदार के यहां सीलमपुर दिल्ली में रह रहा था। छह माह पहले नानी की मौत की खबर मिलने के बाद वह गांव आया था। इसके बाद वापस चला गया था। वह घरवालों से भी संपर्क नहीं रखता था। दक्ष ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए बता रखा था कि उसके माता-पिता नहीं है और उसकी परवरिश एक किन्नर ने की है। उसके साथियों से पुलिस को सही जानकारी मिल गई। गाजियाबाद पुलिस ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर उसके परिजन को सूचना दी। दक्ष के खिलाफ किशनी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उसने कस्बे में ही हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी।